सावन आयो रे.....
💙💛❤️💜💚💙💛❤️💜💚💙💛❤️💜💚💙💛❤️ 💙💛❤️💜💚💙💛❤️💜💚💙💛❤️💜💚💙💛❤️ देख सखी आया है सावन बरसत बुँदिया मोरे आँगन चलत हवाएँ जिया जरावें तरसत हूँ तेरे बिन साजन झुकी धरा पर घटाएँ काली गले मिल रहीं डाली डाली देख देख मन मोरा लजाय मेरी बहियाँ खाली खाली कासे कह दूँ जिया की पीर सखिया प्रियतम सँग अधीर सूना पड़ा मेरे मन का कोना नीरव नयन बहावें नीर घुमड़ घुमड़ रहे काले बादल सावन की आँखों में काजल मेरी बिन कजरारी आँखें बरस रहीं देखो बिन बादल डॉ अनिल कुमार बाजपेयी जबलपुर 💙💛❤️💜💚💙💛❤️💜💚💙💛❤️💜💚💙💛❤️