Posts

Showing posts with the label श्वेता सोनी

वो डरावने सपने - भाग २

Image
सोनाली के हाथ से चाय का कप छूट गया और फर्श पर पड़ते ही टूट गया | क्या हुआ सोनाली तेरी तबीयत तो ठीक है ना ! हां मां सब ठीक है ये बोल कर वो घर से बाहर चली गई | पीछे से सोनाली कि मां आवाज देते रह गयी | नाश्ता तो कर ले बेटा... तब तक सोनाली स्कूटी स्टार्ट कर के ऑफिस के लिए निकल गई | इधर सोनाली कि मां मधु अपनी सास के पास जाकर रोने लगी | क्या हो गया है मेरी बच्ची को किसकी बुरी नजर लग गयी है ! हे भगवान अब तुम ही हमारी मदद करो |  मधु कि सास शंकुतला देवी ने अपनी बहू को समझाया और जल्दी से तैयार होने के लिए कहा | मधु - हम कहा जा रहे हैं मां ! मधु कि सास - हम ऐसी जगह जा रहे है जहां हमारी समस्या का समाधान होगा |  कुछ ही देर में दोनों एक मंदिर के सामने थे | सोनाली कि मां और दादी शंकुतला देवी अपने शहर चांपा के प्रसिद्ध काली माता के मंदिर में थे | दोनों मंदिर में प्रवेश करके माता के दर्शन करते हैं | दर्शन करने के बाद वहां के परोहित जी से मिलते हैं | प्रणाम परोहित जी!!! मधु और शंकुतला देवी ने एक साथ कहा | परोहित जी - मां काली आपकी सभी मनोंकामना पूर्ण करें | कहिए क्या समस्या लेकर आयी है ...

वो डरावने सपने

Image
भयानक अंधेरी रात में एक लड़की बेतहाशा भागे जा रही है , शायद किसी से डर कर भाग रही है । उसने घुटने तक साड़ी पहन रखी है और पैरों में पुराने जमाने की पायजेब पहनी हुई है । पहनावे से किसी कबीले कि जान पढ़ रही है । भागते - भागते अचानक वह किसी मंदिर के प्रांगण में प्रवेश कर आसमान कि तरफ देखकर कहती हैं - तुम मुझे कभी नहीं पा सकते ना इस जन्म में और ना ही किसी और जन्म में .... इतना कह कर वह लड़की मंदिर में बने तालाब में कूद जाती हैं ..... और हमेशा की तरह यह सपना देखते हुए सोनाली डर कर जाग जाती है । सोनाली जब 10 साल की थी तभी से उसे ये डरावने सपने दिखाई देने लगे हैं और अभी तक ये सिलसिला चल रहा है । डर कर अचानक उठने के कारण सोनाली कि सांसें तेज चलने लगी थी , तभी अचानक सोनाली की मां कि आवाज आई -  सोनाली उठो बेटा ऑफिस नहीं जाना क्या ? जाना है मां बस थोड़ी देर में आई ... ये कह कर सोनाली फ्रेस होने बाथरूम में जाने लगी | करीब आधे घंटे में तैयार हो कर सोनाली रूम से बाहर आई |  अभी सोफे पर बैठ कर वो चाय पी रही थी और उस सपने के बारे में सोच ही रही थी कि मां ने कहा - कोई परेशानी है क्या बेट...

पुनर्विवाह - प्यार कि एक नयी शुरूआत ( अंतिम भाग )

Image
रविश प्यार से स्वाति का चेहरा देख रहे होते हैं । स्वाति सबके बीच रविश को इस तरह देखता पाकर शरमा जाती है । और आंखें नीचे कर तेजी से अपने रूम में चली जाती हैं । कुछ देर बाद रविश भी स्वाति  के पीछे रुम में जाते हैं । जहां स्वाति अपने रूम में बने खिड़की की तरफ मुंह करके सिर झुकाए खड़ी थी । रविश पीछे से आकर , स्वाति के कान में धीरे से कहते हैं - आप वहां से ऐसे क्यूं चली आई !  स्वाति जो अब तक खिड़की को निहारे खड़ी थी । अचानक से रविश की तरफ मुड़कर कहती हैं - आपके कारण ‌!  रविश अनजान बनते हुए - मेरे कारण ! वो कैसे !  स्वाति - अब ये भी मैं ही बताऊं !  रविश - बिल्कुल आप बताएंगी ! मैंने किया क्या है कि आप इस तरह से वहां से भाग आयी ! स्वाति को अपनी बाहों के घेरे में लेते हुए ...हम तो बस अपनी खूबसूरत सी बीवी को देख रहे थे । अब इसमें हमें  किसी तरह की कोई गलती नहीं दिखती ! ( स्वाति को अपने सामने लाते हुए ) अगर आप को ये ग़लत लगता है , तो बात अलग है ।  स्वाति - मैंने ऐसा कब कहा ! रविश - वैसे मानना पड़ेगा आपको , मैंने कभी सोचा नहीं था कि आप रिचा को ऐसे हैंडल कर...

पुनर्विवाह - भाग २९

Image
रविश और सरला जी रिचा को अपने घर में देखकर अवाक हो जाते है । स्वाति , रवि और नेहा से रिचा को गेस्ट रूम में ले जाने को कहती हैं ।रिचा के जाते ही ,  रविश स्वाति की ओर मुड़ कर उस से कुछ कहते , उससे पहले ही स्वाति ने धीरे से सब बताना शुरू किया ।  स्वाति - मां हम सब गार्डन घूमकर रेस्टोरेंट से खाना खाकर निकल ही थे कि रेस्टोंरेट के बाहर आइसक्रीम देखकर  शिवांश ने आइसक्रीम खाने की ज़िद करने लगा । हम सभी आइसक्रीम खा रहे थे कि अचानक एक कार हमारे सामने से इन्हें टक्कर मारते हुए । आगे बढ़ गई और इन्हें वहीं  बेहोश छोड़कर आगे बढ़ गई । वहां सड़क पर खड़े किसी इंसान ने इनकी मदद नहीं की और मैं इन्हें ऐसे सड़क पर मरता छोड़ कर नहीं आ सकती थी । स्वाति रविश की तरफ देखते हुए - और इतनी रात गए हास्पिटल ले जाने का फैसला मेरा था ।  इसमें नेहा या पीहू की कोई गलती नहीं है ।  मैंने कहा भी नेहा को की सब घर चलें जायें । लेकिन नेहा और पीहू ने मेरी बात नहीं मानी । स्वाति हाथ जोड़कर - मुझे माफ़ कर दीजिए आगे से बिना आपसे पूछे ऐसा कोई काम नहीं जिससे आपको तकलीफ हो । बोलते हुए स्वाति की आं...

पुनर्विवाह - भाग २८

Image
रविश नाश्ता करने के बाद सरला जी से .. रविश - मां मैं क्लिनीक जा रहा हूं । शाम को जल्दी घर आऊंगा । स्वाति आप और शिवांश तैयार रहना शाम को मैं आपको मंदिर ले जाऊंगा । आता हूं ...कहकर रविश क्लिनीक चलें जाते हैं । रविश के जाते ही नेहा हंसते हुए सरला जी से कहती हैं - मां  भैया भी ना ...उनको तो भाभी को मूवी दिखाने और डिनर पर ले जाना चाहिए । लेकिन वो भाभी को मंदिर ले जा रहे हैं ...।कह कर हंसती हुई नेहा अपने कालेज के लिए निकल जाती है और सब घर वाले भी नाश्ता कर के  अपने - अपने काम में चले जाते हैं पीहू और स्वाति नाश्ते के बर्तन समेट कर किचन में ले जा रही होती है ‌। तभी सरला जी स्वाति को रोक कर कहती हैं ...‌। सरला जी - स्वाति इधर आओ बेटा , मेरे पास बैठो ।  स्वाति सरला जी के पास जाकर बैठ जाती हैं ।  सरला जी - स्वाति , बेटा तुम नेहा की बात सुनकर परेशान मत होना । वो क्या है कि ना ...स्वाति सरला जी की बात बीच में काटकर कहती हैं ।  स्वाति - मां , आप परेशान मत होइए । मुझे नेहा की बात का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा और ना ही मैं परेशान हूं । दरअसल मैंने ही उन्हें कहा था , मंदि...

पुनर्विवाह - भाग २७

Image
रविश स्वाति की तरफ देखते हुए - स्वाति , आपके साथ पहले जो भी हुआ । मैं उसे बदल तो नहीं सकता लेकिन कोशिश जरूर करूंगा कि अब आपके साथ कुछ ग़लत नहीं हो । अब आप जल्दी से फ्रेश हो जाइए ,  क्योंकि अभी आप मेरे साथ वाक पर जा रही हैं । स्वाति खुश होते हुए - आप 10 मिनट बस रूकिए मैं बस अभी आती हूं कहते हुए स्वाति अचानक कुछ सोचते हुए रूक जाती हैं , और रविश की तरफ देखकर - सुनिए , अभी दो दिन ही हुए हैं शादी को अगर ... बोलते - बोलते स्वाति रूक गई । रविश , स्वाति की तरफ देखकर - आप मां और पापा की फ़िक्र मत करिए वो कुछ नहीं कहेंगे । क्योंकि मां , पापा खुद सुबह वाक पर जाते हैं । स्वाति की अधूरी बात को पूरा करते हुए रविश कहते हैं । और अगर आप शिवु की टेंशन ले रही हैैं , तो आप निश्चिंत रहो । मैं नेहा या पीहु को शिवू का ख्याल रखने के लिए कह देता हूं । तब तक आप रेडी हो जाइए । कह कर रविश कमरे के बाहर चले जाते हैं और स्वाति बाथरूम में । कुछ देर बाद स्वाति और रविश बाहर वाक पर जा रहे होते हैं तभी सरला जी रविश से कहती हैं सरला जी - रविश ,स्वाति बेटा आप लोग आज जल्दी घर आ जाना । क्योंकि आज स्वाति की पहली र...

पुनर्विवाह प्यार कि एक नई शुरुआत भाग २६

Image
  रचना - स्वाति - प्लीज़ ये गिरने वाली बात आप घर में किसी को मत बतायेगा ।  रविश मुस्कुराते हुए - नहीं बताऊंगा । लेकिन पहले आप मुझे मोच पर मलहम लगाने देंगी तो ही नहीं बताऊंगा । रविश के इतना कहते ही स्वाति चुप हो जाती है । और रविश , स्वाति के मोच पर मलहम लगाने लगते हैं ।  रविश - अब आप सोच जाइए । रात के दो बज रहे हैं । सुबह आपको जल्दी उठना होगा ना ! ये कहकर रविश सोफे की तरफ जाने लगते हैं । जिसे स्वाति देख रही है । रविश पलट कर वापिस आते हुए - मैं बस ये ब्लैंकेट लेने गया था । आप आराम से सो जाइये , मैं यहीं आपके पास ही हूं । इतना कहकर रविश बेड के किनारे एक तरफ होकर सो जाते हैं । लेकिन उसकी आंखों से नींद गायब हो चुकी थी । स्वाति उसके पास ही सोने वाली है , ये अहसास ही उसकी नींदे उड़ाने के लिए काफी था । रविश के लेटते ही स्वाति भी रविश के बगल में लेट जाती है । स्वाति भी अपने अहसासों के साथ लेट तो जाती है। लेकिन नींद उसे भी नहीं आ रही । अपने - अपने अहसासों के साथ दोनों कि आंख कब लगी । पता ही नहीं चला । सुबह पांच बजे चिड़ियों की चहचहाहट से रविश आंखें खुल जाती है । आंखें खुलते ही स्वा...

मेरे सपनों का घर

Image
 जब से होश संभाला है । अपने आपको एक ऐसे घर में रहते हुए पाया है । जहां ऊंची आवाज़ में चिल्लाना मना था । कोई भी काम अपनी मर्जी से करना मना था । घर - घर नहीं खेल सकते थे ना छुपन - छुपाई ।‌क्योंकि जहां हम रहते थे । वहां ये सब खेलना मना था । एक दिन मेरे मंदबुद्धि भाई ने तेज आवाज में गाना लगाकर नाचना शुरू कर दिया । तभी बगल के कमरें सेआती हुई  एक बुजुर्ग महिला चिल्लाना शुरू करके गाना बंद करवा दिया । मैंने अपनी मां से पूछा कि , हम यहां अपनी मर्जी से कुछ क्यों नहीं कर सकते । मां ने भरी आंखों से देखते हुए कहा - बेटा हम किराए के मकान में रहते हैं । यह घर किसी और का है हमारा नहीं । इसलिए तुम या मैं अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर सकते । जिस दिन हमारा खुद का घर होगा । उस दिन तुम कुछ भी कर सकते हो । तब कोई भी कुछ नहीं कहेगा हमें । ना हमारी बुराई पड़ोस में जाकर करेंगे ना ही किसी चीज को करने के लिए कोई मना करेंगा । अपने सपनों के घर के आस लिए मां इस दुनिया से चली गई । उनके जाने के सालों बाद मैंने अपना सपनों का घर बनवा लिया है । जिसमें मैं जो चाहे कर सकता हूं । जैसे मां कहती थी....मेरे सपनों...

पुनर्विवाह - प्यार की एक नई शुरुआत भाग - २५

Image
रचना - गिरने की आवाज़ सुनकर रविश की आंखें खुल गईं । बैड को देखा तो शिवांश मजे से सो रहा था लेकिन स्वाति नहीं दिखी । जब रविश सोफे से उठ कर पलंग के नीचे नीचे देखा तो उन्हें स्वाति पलंग से नीचे गिरी हुई दिखाई दी । स्वाति अपना पैर पकड़ कर बैठी हुई थी ।  रविश - स्वाति आप यहां पलंग के नीचे क्या कर रही हैं । स्वाति मन में - आज शादी के पहले दिन ही इज्जत का कचरा हो गया । अब ये क्या सोचेंगे मेरे बारे में कि , एक बच्चे की मां होकर पलंग से गिर गई । हे भगवान अब क्या कहूं इनसे !  रविश - स्वाति , मैं कुछ पूछ रहा हूं आपसे ।आप ऐसे नीचे क्यूं बैठी है ? स्वाति - वो मैं ... मैं... नींद में पलंग से नीचे गिर गई । स्वाति ने सर झुकाए हुए कहा और उठने की कोशिश करने लगी । लेकिन पैर में मोच आने के कारण उठ नहीं पा रही थी । रविश , स्वाति को सहारा देकर पलंग पर बिठाते हुए - स्वाति , आप पलंग पर से कैसे गिर गई । स्वाति मासूमियत से - आप हंसेंगे तो नहीं ! रविश मुस्कुराते हुए - नहीं हसूंगा अब बताओ । स्वाति - वो ...जब मैं छोटी थी तभी से सपने देखते हुए मैं पलंग से गिर जाती हूं । रविश हंसते हुए - अब समझा , इ...

पुनर्विवाह - प्यार की एक नई शुरुआत भाग - २४

Image
  आप क्या चाहती है , कि स्वाति मुझे मजबूरी में अपनाये ! नहीं ना ! मां आप मुझ पर भरोसा रखो मैं सब ठीक कर दूंगा । अच्छा अब आप सो जाओ । बहुत रात हो गई है । मैं शिवू को ले जाता हूं । सरला जी के गले लगते हुए रविश कहते हैं । रविश , शिवांश को उठाकर अपने साथ अपने कमरें में ले आते हैं । सरला जी , रविश को जाते देखकर मन में - हे भगवान , ये तू कैसी परिक्षा ले रहा है । अगर रविश को पता चल गया कि साक्षी वापस आ चुकी है , तो .... नहीं - नहीं हे भगवान इस साक्षी नाम की मुसीबत से मेरे बेटे को दूर रखना । सरला जी हाथ जोड़ते हुए कहती हैं । उधर रविश शिवांश को बैड पर सुलाकर ,  अपने लिए एक तकिया और ब्लैंकेट लेकर कमरें में बने सोफे पर सोने जा रहे होते हैं कि .... स्वाति उन्हें मना कर देती है । स्वाति - आप ये क्या कर रहे हैं । रविश चौंकते हुए स्वाति की तरफ देखते हैं । स्वाति धीरे से - मुझे ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा कि आप मेरी वजह से सोफे पर सोये और ये बैड इतना बड़ा है कि हम तीनों इस पर आराम से सो जायेंगे । रविश - स्वाति , मैं यहां ठीक हूं । तुम और शिवू आराम से बैड पर सो जाओ , ठीक है गुड नाईट स्...

पुनर्विवाह - प्यार की एक नई शुरुआत भाग - २३

Image
रचना - स्वाति मन ही मन - रविश आप जितना मेरा और शिवांश का ख्याल रख रहे हैं । उसका एक प्रतिशत भी मैं  आपकी जीवन साथी होने का फर्ज नहीं निभा रही हूं । मुझे इस रिश्ते को दिल से माना के लिए कुछ वक्त चाहिए । रवीश , स्वाति को सोचते हुए देखकर उसके सामने चुटकी बजाकर उसे ख्यालों से बाहर लाता है ।  रविश - कहां खो गई आप , आप कपड़े बदल लीजिए । तब तक मैं शिवू को मां के पास से लेकर आता हूं ।  स्वाति थोड़ा परेशान होते हुए - अगर मां नाराज हो गई तो !  रविश मुस्कुराते हुए - स्वाति वो एक मां हैं और सभी मांओं की तरह अपने बच्चे का अच्छा ही सोचती हैं । खुशी चाहती है । मेरी मां भी वैसे ही है । तुम फ़िक्र मत करो अगर मैं नाराज हुई तो मैं उन्हें मना लूंगा । तुम परेशान मत हो । अब आप जाइये और कपड़े बदल कर आइये । मैं थोड़ी देर में आता हूं । ये कहकर रविश अपनी मां के कमरे की तरफ जाते है । रविश , सरला जी के कमरें में जाकर ... रविश - मां आप अभी तक सोई नहीं ।  सरला जी - रविश आओ बेटा  । रविश सरला जी के पास बैठ जाते हैं ‌।  पता है बेटा इंसान को दो सुरतों में नींद नहीं आती । पहला त...

पुनर्विवाह - प्यार की एक नई शुरुआत भाग - २१

Image
 स्वाति की मां स्वाति के गले लगकर - बेटा मैं बहुत खुश हूं , कि तुम्हें रविश जैसा जीवनसाथी मिला है । जिसने तुम्हारे अतीत को जानते हुए भी तुम्हें दिल से अपनाया है ।  बेटा बस मैं यही चाहती हूं कि तू भी अपने अतीत को भूल कर एक नयी शुरुआत कर । स्वाति से दूर होते हुए स्वाति की मां कहती हैं । रविश की ओर मुड़ कर - बेटा , अगर स्वाति से कोई भूल हो जाय । तो उसे माफ कर देना । उसने पिछले कुछ सालों से बहुत दुःख झेले हैं । तुम्हारा साथ उसे सारे दुखों को भुलाने में मदद करेगा । लेकिन अगर स्वाति कभी डगमगा जाये तो तुम उसका साथ कभी मत छोड़ना ।  रविश - मां , मैं भी आपका बेटा हूं । आपको कभी निराश नहीं करूंगा ‌और रही बात स्वाति की तो परिस्थिति चाहे जैसे भी हो । मैं स्वाति का साथ कभी नहीं छोडूंगा । स्वाति की मां - सदा खुश रहो बेटा तुम ...।  उधर प्रशांत और पीहू , रविश का कमरा सजा रहे थे । लाल गुलाब से सजा कमरा बहुत ही सुन्दर लग रहा था । पीहू - यहां तो सारी सजावट हो गई । अब चलें बहुत देर हो चुकी है सब हमें ढूंढ रहे होंगे । पीहू और प्रशांत दोनों रिसेप्शन में चले जाते हैं । उनके जाते ही ...

पुनर्विवाह भाग २० (प्यार की एक नयी शुरूआत)

Image
रचना - रविश,  रानी को इशारे से सामने से हटने के लिए कह रहा था । लेकिन  रानी ने कोई ध्यान नहीं दिया।      तो रविश चुपचाप मुस्कराते हुए बात करने लगे।  तभी सरोज जी ने आकर रविश को अपने पास बुलाया।  सरोज जी - रविश , यहां आओ बेटा ।  रविश - जी मां ।  सरोज जी - बेटा स्वाति का हाथ अपने हाथ में लो और स्टेज पर जाओ । रविश - जी मां ।  रविश ने सामने देखा तो रानी अभी भी सामने खड़ी थी। रविश रानी  के पास जाकर धीरे से कहा - अगर तुम्हें अपना गिफ्ट चाहिए तो,  मुझे   मेरी बीवी को ले जाने दो । नहीं  तो अपना गिफ्ट भूल जाओ । रानी - पहले मेरा गिफ्ट दो,  फिर भाभी को ले जा सकते हो । आप कल से  मुझे बेवकूफ बना रहे हो भैया   । रविश अपने  कोट से एक चाबी निकाल कर देते हुए - ये रहा तेरा गिफ्ट जो मैंने तेरे लिए  मंगवाई है ।घर के बाहर ही रखी हैं  तेरी फेवरेट कार।  रानी - थैंक्यू भैया... थैंक्यू सो मच । रानी खुश  होकर रविश के गले लग जाती हैं । स्वाति,  रविश और रानी  की नोकझोंक देखकर मुस...

पुनर्विवाह - प्यार की एक नयी शुरूआत भाग - १९

Image
पीहू फूल लाये हुए लोगों से फूलों  की टोकरी चुपचाप लेकर रविश के कमरे में छुपा देती हैं और  पीहू , स्वाति और रानी को लेकर  पालर्र चली जाती हैं । रात 8 बजे जहाँ  सब घर वाले महाराजा पैलेस आ जाते हैं । मेहमानों का आना अभी  शुरू ही हुआ है ।  सरोज जी  - कहाँ हैं ये तीनों , अभी तक नहीं आईं हैं ।अब तो मेहमानों का आना भी  शुरू हो गया है । प्रशांत जरा फोन तो करो पीहू को , कब से गई हैं  ये लड़कियां । सरोज जी परेशान होते हुए  प्रशांत से कह रही थी । प्रशांत - जी मां  मैं अभी पूछता हूं ।  रविश - प्रशांत  तुम रुको मैं  रानी को फोन कर के पूछता हूं । रविश,  रानी को फोन करते हैं  । उधर रानी और  पीहू तैयार होकर स्वाति को देखते हैं  । जो हल्के पीच कलर के जोड़े में बहुत सुंदर लग रही हैं । अपने लंबे बालों की चोटी बनवाई हैं । और  उसमें जूही के फूलों का गजरा लगा हैं।  जो स्वाति के  दोनों  कंधो पर आये हुये है । साथ में  मांग टीका और  मैचिंग के गहने हैं । जिसमें स्वाति और  भी सुंदर ...

पुनर्विवाह - प्यार की एक नयी शुरूआत भाग १८

Image
रविश का छोटा भाई और बाकी सब कैटर्स को फोन करते हैं हुए खाने की पूरी चीजें और  स्टेज की सजावट वगैरह को तय कर लेते हैं और  वहां जाकर सब काम अपनी आँखों के सामने करवा रहे होते है । लड़कियां पार्टी में क्या पहने और क्या नहीं ये सोच रही होती हैं । सरोज अपनी जेठानी से - दीदी देखो ना , तीन बज रहे हैं । कितना काम है करने को  और ये लड़कियां भी ना हाथ धरे बैठी रहती हैं । रानी जा बेटा , भाभी को अपने कमरे में ले जा । वहां वो थोड़ा आराम कर लेगी । उसके  बाद तुम मेरे कमरे में आना । मेहमानों को देने के लिए उपहार की पैकिंग करना है समझी । " जी मां " रानी ने कहा । सरोज के कमरे में उसकी  जेठानी और छोटी बहू बैठे है । सरोज - दीदी , आज रविश  की जिंदगी में उसकी खुशियों ने कदम रखा है । मैं चाहता हूं कि उसे जिंदगी में वो हर खुशी मिले जिसके वो काबिल हैं । पीहू - मां , आप फिक्र मत करिए । भैया के साथ  सब अच्छा होगा।  पीहू , प्रशांत को फोन करती हैं । उधर प्रशांत रिसेप्शन में स्टेज पर सजावट के लिए आये लोगों को समझा रहा था कि  स्टेज पूरी लाल गुलाब के फूलों से  स...

पुनर्विवाह भाग - १७

Image
रविश - आपके लिए ये लेने गया था । आपको पसंद हैं ना ! स्वाति रविश को   आश्चर्य से देखने लगती है ।  स्वाति - आपको कैसे पता की मुझे करेले की सब्जी और मीठा अचार पसंद है और आपको ये सब मिले कहां ! रविश - पता कर लिया और रही बात इनकी तो यह सब घर में बनी हुई है । (रविश धीरे से ) हमारे घर में किसी को भी करेला पसंद नहीं है , वो तो बड़े पापा शुगर के मरीज हैं । इसलिए हफ़्ते में एक , दो बार करेले की सब्जी बनती है । स्वाति - और मीठे अचार ?  " वो मुझे भी बहुत पसंद हैं " मां मेरे लिए अलग से मीठे अचार बनाती है " रविश ने मुस्कुराते हुए कहा ।  रानी , रविश को खाना परोसते देखकर उसे छेड़ती है   - क्या बात है भैया , आज तो बड़ा आप खाना परोस रहे हो ! आज से तो हमें कभी हमें नहीं परोसा ....देख लो मम्मी आपका बेटा बिगड़ गया । ये कह कर रानी वहां से भाग जाती है ।  रविश - रूक रानी की बच्ची अभी बताता हूं तुझे । रविश , रानी को पकड़ लेता है और उसके कान खिंचते हुए - बोल क्या बोल रही थी अभी !  रानी झूठा गुस्सा दिखाते हुए - कुछ नहीं भाई , माफ़ कर दो प्लीज़ , आगे से ऐसा मजाक...

पुनर्विवाह भाग - १६

Image
रविश ने मुस्कुराते हुए अंगूठी पहनाई । फिर सब खाने की तैयारी करने चले गए । क्योंकि शादी के घर में मेहमान ज्यादा थे , तो रविश के बड़े पापा ने सबको पंगत में बैठकर खाना खाने के लिए कहा । एक तरफ घर के सब पुरूष और बच्चे बैठ गये । बाकि घर की महिलाएं सबको खाना परोसने लगी । रविश के बड़े पापा खुश होते हुए बोले - आज कई सालों बाद ऐसे पंगत में बैठकर खाने का अपना अलग ही मजा है । हां भैया , भैया आपको याद है जब गांव में ऐसे ही सब पुरूष बैठकर खाते थे ‌और महिलाएं खाना परोसती थी । रविश के पापा ने कहा ! उसके बाद जब महिलाएं खाने बैठती तो बाबूजी और बाकि सारे पुरुष सभी महिलाओं को खाना परोसते थे । कितने प्यार से बाबूजी , मां को खाना परोसते थे और मां सर पर पल्लू लिए शर्माती रहती थी । चलो फिर तय रहा । हम सब खाने के बाद सभी महिलाओं को खाना परोसेंगे । जी भैया ... रविश के पापा ने कहा । सरोज जी - क्या आप भी , हम सब है ना हम अपना खाना खुद ही परोस लेंगी । क्यूं जीजी ! हां सरोज , ठीक कह रही है । रानी - नहीं बड़ी मां , बड़े पापा और पापा सही कह रहे हैं । आज ये सब खाना परोसेंगे और हम रानी कुमारी सबका विडियो बनाये...

पुनर्विवाह भाग १५

Image
स्वाति रोने लगी । रविश की मां ने कहा - अब चुप हो जा । तुझे रुलाने का अधिकार सिर्फ मेरा है और मैं  अपना अधिकार किसी को नहीं दूंगी ...समझी ! स्वाति ने जब उन्हें देखा तो सभी घर वाले हंस रहे थे । उन्हें देखकर स्वाति भी मुस्कुराने लगी । बस बेटा आप ऐसे ही मुस्कुराते हुए अच्छी लगती हो । रविश के पापा ने कहा । उधर स्वाति की सास ने देखा कि  । अभी भी स्वाति का पल्लू खींचकर शिवांश पूछ रहा था कि आप लोग ऐसे क्यों बैठे हो ! स्वाति को चुप देखकर सरोज जी ने कहा - बेटा आप हमारे पास आओ हम बताते हैं । यहां क्या हो रहा है । सरोज जी ने शिवांश को अपनी गोद में लेते हुए बताया । बेटा यहां पर एक गेम खेला जाएगा । जिसे सिर्फ आपके मम्मी और पापा ही खेल सकते हैं । शिवांश ने उत्सुक होकर पूछा - कैसे खेलते हैं इस गेम को ? सरोज  जी ने रविश और स्वाति को बैठने का इशारा करते हुए कहा - इस बड़े से परात में दूध डालकर रखा है । अब इसमें मैं सात कौड़ी और एक अंगूठी उन्होंने अंगूठी दिखाते हुए कहा । ये सोने की अंगूठी इस परात में डाल दी जायेगी । इस खेल में तीन मौके आप दोनों को मिलेंगे । जो एक से ज्यादा बार इस अंग...

पुनर्विवाह भाग १४

Image
रुको वहीं ....पहले आरती तो करने दो । फिर आना अंदर । रविश की बड़ी मां ने कहा ! ऐसे कैसे अंदर आ जायेंगे बड़ी मां । मैं तो बिना नेग के भैया - भाभी को अंदर आने नहीं दूंगी । रविश की छोटी बहन ने कहा ! अरे तुम अपना नेग बाद में लेना । पहले हमें आरती तो करने दो । रविश की बड़ी मां ने कहा और आरती करने लगी । घर के बड़े आरती करने के बाद स्वाति को अंदर ले जाने लगे । तभी रानी फिर से नेग मांगने लगी और साथ में स्वाति की मौसेरी बहन को भी साथ में मिला लिया । रविश ने मुस्कुराते हुए अपने पर्स से पैसे निकालते हुए कहा ‌। अभी मेरे पास इतने ही है । कल पक्का तुझे तेरा गिफ्ट मिल जायेगा । मुंह बनाते हुए रानी ने पैसे ले लिए इस शर्त पर की कल उसे अपना गिफ्ट मिल जाना चाहिए । सुबह होने वाली थी , और शादी के कार्यक्रम में सब थक गये थे । इसलिए सब अपने अपने कमरें में आराम करने के लिए चले गए । कुछ घंटों के आराम के बाद   घर के युवा जहां तरोताजा महसूस कर रहे थे और सत्यनारायण कथा की तैयारी कर रहे थे । वहीं घर के बड़ों को अभी भी थकान लग रही थी। घर की महिलाओं ने मिलकर प्रसाद और खाने की तैयारियां करने लगी । पूजा...

पुनर्विवाह भाग - १३

Image
विदाई के समय स्वाति के पापा ने स्वाति से कहा - बेटा , रविश एक अच्छा और सुलझा हुआ इंसान हैं । वो शिवांश और तुम्हारा अच्छे से ख्याल रखेंगे । तुम भी अपनी कड़वी यादों को पीछे छोड़ कर जिंदगी की एक नई शुरुआत करना । स्वाति अपने पापा के गले लगकर रोने लगी तो स्वाति की मां ने कहा - आप मां - बेटी का रोना हो गया हो तो । मैं भी मिल लूं । स्वाति की मां की बातें सुनकर सब हंसने लगे । माहौल थोड़ा हल्का हुआ और स्वाति की विदाई हो गई । रविश के घर वालों ने  सबसे पहले बारातियों को घर पहुंचाने की व्यवस्था की । उसके बाद रविश , स्वाति , सौरभ और शिवांश वो सब एक खुबसूरत सी सजी हुई कार हुई कार से रवाना हो गए । सुबह के ४ बज रहे थे । शिवांश स्वाति की गोद में सो रहा था । स्वाति भी कुछ सोचते हुए सो गई । जाग रहे थे तो सिर्फ सौरभ , रविश और ड्राइवर । सौरभ ड्राइवर के साथ बात कर रहा था । तो वहीं रविश सोती हुई स्वाति और शिवांश को देख रहा था ।  कि अचानक नींद में  स्वाति ने अपना सिर रविश के कंधे पर रख दिया । रविश , स्वाति को देखते हुए कब सो गया । उसे भी पता नहीं चला । इधर सौरभ ने अपना मोबाइल निकाला और उ...