पुनर्विवाह भाग १५

स्वाति रोने लगी । रविश की मां ने कहा - अब चुप हो जा । तुझे रुलाने का अधिकार सिर्फ मेरा है और मैं  अपना अधिकार किसी को नहीं दूंगी ...समझी ! स्वाति ने जब उन्हें देखा तो सभी घर वाले हंस रहे थे । उन्हें देखकर स्वाति भी मुस्कुराने लगी । बस बेटा आप ऐसे ही मुस्कुराते हुए अच्छी लगती हो । रविश के पापा ने कहा । उधर स्वाति की सास ने देखा कि  । अभी भी स्वाति का पल्लू खींचकर शिवांश पूछ रहा था कि आप लोग ऐसे क्यों बैठे हो ! स्वाति को चुप देखकर सरोज जी ने कहा - बेटा आप हमारे पास आओ हम बताते हैं । यहां क्या हो रहा है । सरोज जी ने शिवांश को अपनी गोद में लेते हुए बताया । बेटा यहां पर एक गेम खेला जाएगा । जिसे सिर्फ आपके मम्मी और पापा ही खेल सकते हैं । शिवांश ने उत्सुक होकर पूछा - कैसे खेलते हैं इस गेम को ? सरोज  जी ने रविश और स्वाति को बैठने का इशारा करते हुए कहा - इस बड़े से परात में दूध डालकर रखा है । अब इसमें मैं सात कौड़ी और एक अंगूठी उन्होंने अंगूठी दिखाते हुए कहा । ये सोने की अंगूठी इस परात में डाल दी जायेगी । इस खेल में तीन मौके आप दोनों को मिलेंगे । जो एक से ज्यादा बार इस अंगूठी को ढूंढ निकालेगा वो ....इस गेम का विनर होगा... शिवांश ने कहा ! हां ...सरोज जी ने कहा ! पर दादी जीतने वाले को क्या मिलेगा और हारने वाले को क्या पनिशमेंट मिलेगी । सरोज जी - हारने वाले को जीतने वाले की बात माननी पड़ेगी । अंगूठी ढूंढने की रस्म शुरू हुई । एक तरफ स्वाति और दूसरी तरफ रविश । सरोज जी ने जैसे रस्म शुरू करवाई ‌। रविश ने मुस्कुराते हुए स्वाति को देखा और जल्दी से अपने दोनों हाथ परात में डालकर अंगूठी ढूंढने लगे । स्वाति ने रविश को देखा और हड़बड़ाहट में वो भी अंगूठी ढूंढने लगी । पहली बार अंगूठी स्वाति को मिली । अंगूठी ढूंढने की खुशी स्वाति के चेहरे पर दिख रही थी । रविश , स्वाति के चेहरे पर खुशी लाने के लिए कितनी बार भी हार सकता था । दूसरी बार जब स्वाति और रवीश अंगूठी ढूंढ रहे थे तो दोनों के हाथ एक दूसरे को छू गए । स्वाति को एक सिहरन सी हुई और उसने अपना हाथ हटा लिया । तीसरी बार जब दोनों अंगूठी ढूंढ रहे थे तो दोनों जानबूझकर अंगूठी को नहीं पकड़ रहे थे । रवीश इसीलिए अंगूठी नहीं पकड़ रहे थे क्योंकि उसे अपनी पत्नी को सबके सामने हारते हुए नहीं देखना चाहते थे । स्वाति के मन में भी ना जाने क्यों लेकिन रवि उसकी वजह से हारे यह साथी को मंजूर नहीं  । बहुत देर तक दोनों अंगूठी ढूंढने का नाटक करते रहे । " आप लोग कब तक अंगूठी ढूंढ लेंगे मुझे बहुत जोरों की भूख लगी है " रवीश की बहन ने कहा ! " मुझे भी बहुत भूख लग रही है मम्मा " शिवांश ने कहा ! रवीश और स्वाति नहीं एक दूसरे को देख कर इशारा किया और अंगूठी को निकाला । दोनों ने साथ में अंगूठी निकाली । इसका मतलब बड़ों में यह निकाला की दोनों अपनी गृहस्थी आपसी साझेदारी और समझदारी से निकाह करेंगे । सरोज जी ने रवीश को अंगूठी स्वाति को पहनाने के लिए कहा । 

क्रमशः 

रचनाकार 

श्वेता सोनी

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