💕 प्रेम की निशानी💕
✍️ मिले वो जो हमसे सनम , प्रेम हमसे भी दूजा रहा। सात वचनों में बंधकर चल दिया , प्रथम राष्ट्रहित में समय बहल गया वो प्रेम की निशानी मुझे दे गया, गहरे समंदर में कही खो गया । वीर बनाना तुम मेरे अक्ष को , मां भारती को वचन दे गया। आंसुओ का दरिया वही सुख गया मातृभूमि चरणों में मन बंध गया । प्रेम की निशानी दिल संभल गया , इतनी दुनियादारी मन सहम गया। सर्वप्रथम राष्ट्र अर्चना हो स्वयं , देशहित में रश्मि सा मन सवर गया चाहतों के पुष्प चढ़ाते रहें , राष्ट्र वंदना गीत गाते रहे। अपनी रश्मि..... स्वरचित मौलिक १४ जी रश्मि गुप्ता रिंकी (जिला खरगोन मध्य प्रदेश)