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दूरदर्शन की बात

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दूरदर्शन की बात ही कुछ और थी, सब दिखता था सादा- सादा लेकिन रंग भरी रंगोली थी दूरदर्शन की बात ही कुछ और थी.....। देश दुनिया की खबरें सिर्फ, सुबह शाम मिलती थी दूरदर्शन की बात ही कुछ और थी...। रामायण और कृष्ण कथा , पूरे परिवार के साथ देखती थी दूरदर्शन की बात ही कुछ और थी.....। गिने चुने थे धारावाहिक फिल्मों, का था बस तीन दिन इतने में खुश रहती थी दूरदर्शन की बात ही कुछ और थी.....। वक्त गया है आज बदल , इतने सारे आ गए चैनल परिवार हो गया है एकल टीवी से अच्छी हो गई मोबाइल टीवी भी आज सोच रही दूरदर्शन की बात ही कुछ और थी.....। .......@ऋचा कर्ण ✍️✍️🙏

नारी के किरदार

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मैं नारी गीली मिट्टी सी, तुम बन जाओ कुम्हार जिस रूप में ढालोगे मुझको दिल , से निभाऊंगी वो किरदार........। जो रूप दोगे राधा का प्रीत की रीत निभाऊंगी, आधा होके भी पूरा होता,प्रेम तुम्हें दिखलाऊँगी मैं हर किरदार निभाऊंगी...............। जो रूप दोगे सीता का धर्म कर्म सिखलाउंगी, अग्नि परीक्षा दे के धरती में समा जाऊँगी मैं हर किरदार निभाऊंगी..........। जो रूप दोगे रानी का रणनीति भी दिखाउंगी, ममता को आँचल में बाँध युद्ध करके दिखाउंगी मैं हर किरदार निभाऊंगी..........। जो रूप दोगे क्षत्राणी का राजनीति भी सिखाऊंगी, शत्रु जो डाले बुरी नज़र  जौहर भी करके दिखाउंगी मैं हर किरदार निभाऊंगी...........।                                  ऋचा कर्ण✍✍                           

बचपन का घर

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बचपन का घर अच्छा था घर छोटा था पर अच्छा था रिश्तों की भीड़ लगी रहती थी समय की कोई कमी नहीं थी मस्ती भरी हमजोली थी लगता सब अपना था बचपन का घर अच्छा था सतरंगी आसमान में  तितली बन कर उड़ते थे छोटे सपनों को जीते थे लगता सब सच्चा था बचपन का घर अच्छा था... ऋचा कर्ण ✍️     

मधुमास

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फिजाओं में रंग है ख़ास पीली चूनर ओढ़ी धरा देखो आज फूलों की खुशबू से बावरा हो रहा भंवरा बिखेर रही तितली रानी आसमान में रंग नवयौवन पर चढ़ रहा फागुन धीरे धीरे कृष्ण और राधा का होगा महारास "ऋचा"को भी हो रहा है अब ये आभास प्रकृति का श्रृंगार हुआ आया सुंदर"मधुमास" @ऋचा कर्ण ✍️✍️😊

सीधा सादा दिल

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सीधा सादा दिल मेरा,     भोला भाला मन दिल में बसा हुआ है मेरे     आज भी बचपन......              सीधा सादा दिल मेरा              कितना है निश्छल       बहुत जालिम है ये दुनिया        हर पल होता छल....... ऋचा कर्ण ✍️✍️

एक समय

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एक समय की बात ही कुछ और थी, जब दिल के जज़्बात एक कागज पर लिखकर यादों के संदूक में रखा जाता था दूर हो कर भी अपनो का एहसास कुछ खास था.....। आज छोटे से डिब्बे में सब बंद हैं, पास तो सब है पर एहसास मंद है जज़्बात पढ़ कर भी सब ख़ामोश रहा कहते हैं समय नहीं मिल रहा........।।                 @ऋचा कर्ण ✍️✍️

यदि मैं घड़ी होती

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यदि मैं होती एक घड़ी, चलती अपनी मर्जी से कुछ बीते सुंदर पल में  लौट आती फिर से दुख भरे जो पल आता गति बढ़ाती झट से सुख भरे जो पल आता वक्त लगाती गुजरने से.....।        जो करना होता लक्ष्य को पूरा,         साथ चलना सिखलाती         करना पड़ता इंतजार किसी का         दौड़ मैं लगाती वर्षों से जो है          शिकायत लोगों की उसे दूर कर देती           चलती अपनी मर्जी से यदि मैं घड़ी होती। (स्वरचित मौलिक)@ऋचा कर्ण

मिथिला दर्शन

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कतेक करू मिथिला के बखान, खान पान और परिधान......।             पहिल गुणगान खान पान,             प्रसिद्ध ऐछ माछ मखान               दही चूड़ा मालदह आम               जौं नै भेटल रेहू के तीमन               नीक नै भेल तखन भोजन              बड़ी भात तिलकोरक पात             कि कहूं सुवादक बात              भोजन के अंत में जौं भेटल पान            सम्पूर्ण भेल भोजन के गुणगान........। अब आयल परिधानक बारी, धोती कुर्ता बनारसी साड़ी राम चन्द्र सन पुरूष दिखै सीता सन दिखै हर नारी वैदिही के इ धरती क करै छी हम  प्रणाम ......। सबहक ह्रदय, म बसै कवि विद्यापति महान मिथिला पेंटिंग बढाबे शान    सबसँ अलग अपन पहचान कतेक करूं मिथिला के बखान जय मिथिला जय मैथिल महान 🙏🙏 (स्वरचित मौलिक)@ऋचा कर्ण ✍️✍️

अलविदा २०२१

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2021 कुछ ऐसा रहा, कुछ पाया कुछ खोया कुछ हुआ पूरा कुछ रह गया अधूरा....।                एक वक्त ऐसा भी आया,                 डरा हुआ था मंजर सारा                  अपनों से भी बढ़ गई थी दूरी                   मिल नहीं सकता थी मजबूरी.......। आये ना अब ऐसा साल, जैसे बीते 2 साल 2021 अब अलविदा 2022 में हो सब अच्छा.......।                       खुशियों भरा हो नया सवेरा,                       हरपल हो जीवन में उजियारा                       नई उमंग और नई खुशी                       2022 में रहे सब सुखी                  "  ऋचा" की है यही कामना     ...

सुबह की चाय

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सुबह की शुरुआत एक कप चाय के साथ, और दिन खत्म होता शाम की एक कप चाय के साथ खुशी में भी चाय गम में भी चाय......। हर मर्ज की दवा बन गई है एक कप चाय, कोई आए तो स्वागत में एक कप चाय कोई जाए तो भी चाय.......। मौसम कोई भी हो सुबह ताजगी देती चाय,  ठंड से है गहरा रिश्ता सबको चाहिए एक कप चाय........। @ऋचा कर्ण ✍️

तुलसी

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घर आंगन की शोभा तुलसी सुख समृद्धि मिलती है जब पूजी जाती है तुलसी नानी कहती थी मुझसे औषधी भी होती तुलसी विष्णु प्रिया कहलाती तुलसी हिन्दू धर्म में तुलसी बिना ना होता कोई काम मोक्ष धाम की यात्रा पर भी संग जाती है तुलसी। 🙏 ऋचा कर्ण ✍️✍️

सैनिक को सलाम

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हे, देश के वीर जवान, आपको सलाम हमें महफूज कर देते हो अपनी जान हे, देश के वीर जवान आपको सलाम.......। जिस मां ने आपको जन्म दिया, सीने से लगा कर बड़ा किया कितना बड़ा त्याग किया अपने जिगर के टुकड़े को भारत मां के चरणों में सौंप दिया ऐसी ममता को मैं करती हूं प्रणाम हे देश के वीर जवान आपको सलाम.......। अपने वतन के लिए जब देते हो बलिदान, तिरंगे में लिपट कर दिखाते हो जब शान फट जाता है कलेजा नम होती है आंखे परमवीर चक्र से देश करता है आपको सम्मान हे देश के वीर जवान आपको सलाम.......।       (स्वरचित मौलिक) ऋचा कर्ण ✍️✍️🙏🙏😔

अपना सा अजनबी

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था तो वो अजनबी लेकिन था अपना सा, खून के रिश्ते से भी गहरा रिश्ता था बिन बोले बाते समझता था खुशी में खुश दुख में भी साथ देता था अब तो बस यादें रह गई है आज भी यादों में ताजे फूल की खुशबू सा लगता था तो वो अजनबी लेकिन था अपना सा........।                             ऋचा कर्ण ✍️✍️✍️

बधाइयाँ

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बधाई शब्द सुनते ही चेहरे पे खुशी आ जाती है, कान सुनने को बेचैन रहता है किस बात की बधाई है। जब कुछ अच्छा होता है तो बधाई दी जाती है,               कुछ बधाइयाँ इस प्रकार की भी है,मेरी नज़र से...........लड़का हुआ है बधाई हो, चाहे वो बुढ़ापे का सहारा बने या ना बने........।    ...........लड़की हुई है बधाई हो, चाहे मन खुश हो या  ना हो.......। ............बहु आयी है बधाई हो, चाहे सबका सम्मान करे या ना करे.......। दामाद आये हैं बधाई हो, चाहे वो बेटी को खुश रखे या ना रखे........। मंत्री बन गये बधाई हो, चाहे जनता की सेवा करे या ना करे.........। ये बधाइयाँ तो आमतौर पे दी जाती है........परंतु कुछ बधाइयाँ दिल से निकलती है जिसपे हम गर्व महसूस करते हैं...........। बधाई हो बेटा सेना में भर्ती हुआ है, देश की सेवा करेगा..। बधाई हो  बेटी डॉक्टर बन गयी, आम आदमी की सेवा करेगी........। बधाई हो शिक्षक को, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं......। बधाई हो एक लेखक को, जिसकी रचना पढ़ के लोग सम्मान देते हैं.........।             ...

दहलीज

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बाबुल की दहलीज पार कर बेटी, जब नए जीवन में करती है प्रवेश......। बहते हैं आँखों से आँसू ह्रदय में होता , है गम और खुशी का समावेश..…..। ढल जाती है नए रिश्तों में, होता है ये गुण बेटियों में विशेष.......। बहुत याद आती है बाबुल तेरे आँगन की, चिड़ियों सी चहकती तितली सी रंग बिखेरती थी बाबुल तेरे आँगन में कुछ निशानी है मेरी संभाल के रखना उसे बस यही है मेरी यादों का अवशेष.................। (स्वरचित )   ऋचा कर्ण😊🙏✍✍✍✍✍

झूठी सी मुस्कान

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एक झूठी सी मुस्कान,       आँसुओ को छुपा कर करती है मुझपर एहसान      एक झूठी सी मुस्कान..........। वो नहीं समझते मन को मेरे,      मैं आँखे पढ़ सब लेती जान एक झूठी सी मुस्कान        करती मुझपर एहसान.......। सोचती हूँ बता दूँ उनको,      अपने दिल का हर अरमान डरती हूँ इस बात से कहीं गलत ना बैठे मान    एक झूठी सी मुस्कान    करती मुझपर एहसान........। ऐ,मेरे आँसू दूर हो जा मेरी आँखों से,      बहुत कर लिया मुझे परेशान नहीं चाहिए मुझे तेरा एहसान!!!!!! तेरे एहसान से मैं खो दी अपनी पहचान, अब लाऊंगी मैं एक सच्ची मुस्कान बताऊंगी मैं सबको दिल के अरमान         गलत नहीं हूँ मैं !!! बस मेरा दिल है नादान..............।☺😊                                  ऋचा कर्ण✍

गलती का अहसास

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जीवन में किसी न किसी मोड़ पर एक गलती सबसे होती है। अपनी गलती पे लोग हमेशा जज बन जाते हैं। स्वीकार नहीं करते लेकिन अपनी गलती का अहसास होना उसे स्वीकार करना एक श्रेष्ठ कर्म है। जो हमारे चरित्र की सत्यता को दर्शाता है। गलती मान लेने से कोई छोटा नहीं हो जाता है अपनी गलती का एहसास करना और सच्चे ह्रदय से स्वीकार करने पे हमारे अंदर असीम सकारत्मक शक्ति का निर्माण होता है। वही अगर हम अपनी गलती को नहीं स्वीकारते हैं तो हमारे अंदर एक डर पैदा हो जाती है। क्योंकि की हमारी आत्मा कभी स्वीकार नहीं करेगी हमारी गलती को। अपनी गलती का अहसास करना एक बहुत बड़ा गुण है..............।                                *******ऋचा कर्ण✍✍🙏🙏

संघर्ष भरी जिंदगी

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संघर्ष जीवन का एक हिस्सा है इस दुनिया में आने के लिए उस छोटे से भ्रूण को भी करना पड़ता है संघर्ष तब मिलती है उसे जीवन 9 महीनों का इंतजार  वो सोचता है कितना संघर्ष है जिंदगी में ..........।      फिर संघर्ष के बाद तो सफलता निश्चित है       फिर आता है एक दिन वो बाहर फिर कुछ        दिन बड़े अच्छे गुजरते हैं फिर शुरू होता        है जिंदगी के हर पड़ाव पे एक संघर्ष .........। संघर्ष भरी जिंदगी को पार कर फिर  उम्र के उस मोड़ पे आ जाता है   जहाँ उसे सफलता मिलती है फिर वो हो जाता है कमजोर और लाचार ................।          फिर कुछ दिन जिंदगी और मौत के बीच           चलता है संघर्ष इस संघर्ष में जिंदगी हार        जाती है ये भी एक सफलता है क्योंकि फिर             उस आत्मा को मिलेगी एक नई जिंदगी                फिर जारी होगा संघर्ष का सफर         ...

पिता एक छांव

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          जीवन की शुरुआत है पिता,           परिवार की आयात है पिता........। सीप की तरह बाहर कठोर, अंदर नर्म है पिता...........।              संघर्षमय जीवन की दीवार है पिता,        परेशानियों से हमेशा लड़ने को रहते तैयार पिता...। बच्चों के खुशियों की चाभी का खिलौना है पिता, रात को ह्रदय से लगा के सुलाने वाला बिछौना है पिता...। पिता जिम्मेदारी से लदी गाड़ी है, जिसमें पूरा परिवार करता सवारी है.....। बच्चों के सपने को पूरा करने में होती है इनकी खुशियाँ, माँ और बच्चे के लिये पिता होती है पूरी दुनिया......।         एक विशाल बरगद की छांव है पिता,         जिसके नीचे परिवार चैन से सांस है लेता...। सर्दी में कंबल की गर्माहट है पिता, गर्मी में ठंडी छाँव है पिता, बारिश में जो भींगने ना दे वो छाता है पिता........। मेरे आदर्श है पिता, मेरे सच्चे परामर्श है पिता अनुशासन का दूसरा नाम है पिता.......। हे,  विधाता बस इतनी है प्रार्थना जो है, परिवार के...

दीप जलाएं

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दीप प्रज्वलित हुआ है आज एक दीप जलाये मन में आज दूर हो मन का अंधकार चाहे दीप जला लो हजार  जो ना जले मन में प्रेम  का दीप  हज़ार दीप हो जाये बेकार   आओ मिलकर  जलाये एक ऐसा दीप जिसे बुझा ना पाये कोई आँधी । हर दिन हो दीवाली हर दिन हो खुशहाली (शुभ 🌟🌟दीपावली) ऋचा कर्ण✍✍