Posts

Showing posts with the label मनीषा ठाकुर

अग्निवीर"(आखिर कब तक)

Image
             आजादी को 75 साल पूरे होने वाले हैं। सरकार ने कई सपने बुने कुछ पूरे हुए,कुछ अधूरे और कई सपने तो सपने ही रह गए।आख़िर क्यों??? कथनी और करनी सदैव एक सी नहीं होती। जब सरकार युवाहित के भविष्य के लिए कुछ योजनाओं का आगाज करती है तो उसके शुरू होने के पहले ही कहीं कोई छोटी सी चिंगारी, आग भड़काने को तैयार रहती है।एक विनाशकारी ज्वालामुखी की तरह सब तहस-नहस करने के लिए। आखिर कब तक हमारे देश में नवयुवकों को दिग्भ्रमित किया जाएगा। जो जोश व उत्साह अपने मातृभूमि के प्रति समर्पण व अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए होना चाहिए। वही युवावर्ग हिंसात्मक घटना में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं। किसने भड़काया , किसने चिंगारी सुलगाई इन युवाओं के जेहन में????? इन सबसे परे,  सिर्फ़ हमें अब यही सोचना है कि हम सब सर्वप्रथम भारतीय हैं, जो हमारे हित में है, उसे हम सब मिलकर आगे बढ़ायेंगे , व कामयाब होने की कोशिश करेंगे। तू, तेरा और मैं, मेरा से नहीं......... यह संस्कारों, एकता ,सद्भभावों की भारत भूमि है। यहां सिर्फ और सिर्फ "हम और हमारा" ही होना चाहिए। तभी हमारा भा...

"भीड़ से अलग"

Image
हां चलना है तुझे इस भीड़ से अलग ख्वाहिश रख  तेरी पहचान हो अलग ।। फिर क्यूं चले, तू इस भीड़  के साथ जब कोई नहीं है संग, अब तेरे साथ ।। सोच रख सकारात्मक, सत्य जो तेरे संग चला भीड़ की क्या बिसात ,बिगाड़ सके जो तेरा भला ।। संस्कारों का ले खज़ाना, फर्जो को चल तू निभाते रहे सदा जीवन भी तेरा,सिर्फ़ हंसते खिलखिलाते ।। दुनिया की भीड़ में ,छोटी सी हो पहचान खुद से अब न रहना , यूं तुम अनजान ।। अकेले चलने की जब, मन में हो निडरता साहस का प्रकाश तब, चहूंओर बिखरता ।। मेहनत, सच्ची लगन लक्ष्य तुम्हें दिलवायेगी माता-पिता का आशीर्वाद भी यूं रंग लायेगी ।। हौसला रख "ओजस्व", चल भीड़ से जुदा तेरी राह में चलता है , संग तेरा ही खुदा  ।।      ✍️मनीषा ठाकुर( कर्नाटक)

छोटी सी आशा

Image
              छोटी सी आशा             रखो जिंदगी में जो                 उदास न हो                 निराशा से तो              सिर्फ़ दुख मिलता                  ढूंढ़ लो हल                 आशा सदा हो                 जीवन में अगर                  संग हो ख़ुशी                 छोटी सी आशा                 सुकून पहुंचाती                  जोश दिलाती                    प्राप्त हो लक्ष्य                 उनको जिंदगी में      ...

चौदहवीं की चांद सी

Image
चौदहवीं की चांद सी सुंदर पृथ्वी हमारी , संपूर्ण ब्रह्मांड में लगती है, कितनी प्यारी ।। नीलवर्ण समुद्र से ढकी हरे -भरे पेड़ों से आच्छादित, जीवनदायिनी है पृथ्वी सृष्टि को करती आलोकित ।। आओ प्रण ले हम मिलकर धरती माता का फर्ज निभाएंगे, अपनी लालसा के खातिर तुझको न कष्ट पहुंचाएंगे ।। चौदहवीं की चांद सी सुंदर पृथ्वी हमारी , जगत जननी विश्व की तुम ही मैय्या हमारी ।। निजी जरूरतों के खातिर न देंगे तुझे उजाड़ने, निकलेंगे संकल्प ले अब सिर्फ, तुम्हें सवांरने ।। सुंदर रहे हमारी पृथ्वी बात हमने हैं ठानी स्वच्छता से पूर्ण हो धरती रहे खुशहाल जिंदगानी ।। चौदहवीं की चांद सी सुंदर पृथ्वी हमारी  संपूर्ण ब्रह्मांड में लगती है, कितनी प्यारी ।।        ✍️मनीषा ठाकुर(कर्नाटक)

"प्रेम की निशानी"

Image
जब मिलते हैं "दो दिल" खो जाते हैं एक दूजे में  नजरों में होते इज़हार बातें होती इशारों में ।। प्यार का कर इज़हार कबूल करते इश्क को कसमें वादे बातें होती सब कुछ समझते इश्क को ।। डूबे दो दिल इश्क में देते प्रेम की निशानियां प्यार भरे उपहारों में बुनते प्रेम की कहानियां ।। प्रेम जब सच्चा होता  कुदरत भी देता साथ संग हो जाते दो दिल  लिए एक - दूजे का हाथ ।। याद करते अल्हड़ इश्क को बन गए दो दिल "हमसफर" संजोए "प्रेम की निशानी" संग चले जो जीवनभर ।।               मनीषा ठाकुर (कर्नाटक)

"बीता हुआ कल"

Image
बीता हुआ वो कल याद बहुत है आते खट्टी-मीठी, अच्छे-बुरे वो यादें, हमे सताते   ।। काश लौट जाऊं उस पल ,फिर से मैं मीठी यादों के संग उस पल को जीयू मैं ।। कुछ कड़वी यादें टीस भी दे जाती उन पलों को यादकर आंखे भर है आती ।। बीता हुआ वो कल गुजर ही तो गया फिर नए उमंग के साथ  नया दिवस जो आया ।। भूले -बिसरे यादों के संग जिंदगी जीना, है हमें कड़वे पलो से, सीख ले जीवनपथ पे ,चलना है हमें ।।          मनीषा ठाकुर (कर्नाटक)

" रक्तदान "

Image
रक्तदान है महादान संकल्प आज लिजिए यदि समर्थ है शरीर से तो रक्तदान अवश्य कीजिए ।। रक्तदान है महादान करते जो ,यह नेक काम जान बचाते, वो किसी के खुशी से भरी, जिंदगी के नाम ।। रक्तदान है महादान एक -एक बूंद रक्त से दे खुशियां,एक अजनबी को भरे नयन , जिनके अश्रु से ।। "रक्तदान" है महादान ऐसा पुण्य है महान धन्य जीवन कीजिए दे किसी को "जीवनदान" ।। रक्तदान है महादान जागरूकता लोगों में आये छोटी सी ,हमारी मदद से बुझती जिंदगी खिलखिलाये ।। रक्तदान है महादान संकल्प आज लिजिए यदि समर्थ है शरीर से तो रक्तदान अवश्य कीजिए ।।                              मनीषा ठाकुर (कर्नाटक)

"बेरोजगारी"

Image
                बेरोजगारी               युवा वर्ग के लिए                  है महामारी                  समाधान है                मिलकर ढूंढना                   हम सबको                  ग्रसित न हो                इस संक्रमण से                   ये युवापीढ़ी                 आशावादी हो                मानसिकता ऐसी                    युक्ति ढूंढेंगे                  बेरोजगारी              ...

"अभिमान"

Image
करता है नादान इंसा ,क्यूं तू अभिमान  फिर न सह पाता ,स्वयं का अपमान ।। समस्त जनों में, श्रेष्ठ स्वयं को समझता ओहदे,धन के सिवा उसे कुछ न दिखता ।। न परिवार , न रिश्ते - नाते महत्व रखते ऐसे स्वार्थी इंसा को ही अभिमानी कहते ।। न अपनो के सुख -दुख को वह महसूस करता स्वयं की पद - प्रतिष्ठा में ही वह मग्न रहता ।। वाह रे वाह निष्ठुर अभिमानी मानव इस धरा का तू, जैसे हो एक दानव ।। पद - प्रतिष्ठा, पैसों का तेरा अभिमान क्या यही है तेरा , सब कुछ सम्मान ।। गर दुखियों की ,कुछ सेवा तू कर लेगा अनजाने में ही , तुझे प्रभु कृपा मिलेगा ।। दुख जो दूर, किसी की कर पायेगा तेरा जीवन ही, धन्य हो जायेगा ।। कर्म रहेगा तेरे संग, अभिमान यहीं छूट जाएगा अंत में आखिर तू तो इंसा,मिट्टी में ही मिल जाएगा ।।             मनीषा ठाकुर(कर्नाटक)

भागदौड़ की जिंदगी

Image
                जिंदगी एक             दौड़ है ,इंसानों की                 भागते जाना                  न रुकना है               न हिम्मत हारना                  बढ़ते जाना                  गिर भी गए                गर तुम, उठके                   संभलना है                  उमंग भरी             आशा से ,तुमको है                  आगे बढ़ना                  सफल होंगे               इस दौड़ में, तभी          ...

"भारतीय परिधान"

Image
सारी दुनिया में अनोखा, भारतीय परिधान हम भारतीयों के संस्कृति की यही पहिचान  ।। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में ,अलग परिधान का पहनावा भारतीय संस्कृति ,लगती हो इक सुंदर छलावा  ।। उत्तर से लेकर दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक सुंदर परिधानों से सुसज्जित,देश के हर कोने तक ।। परिलक्षित होता , हमारा भारतीय परिधान पवित्र धरा में युगों-युगों से रहा यही विधान  ।। भिन्न-भिन्न संस्कृति का भारत देश हमारा सारी दुनिया में अपना वतन है ये प्यारा  ।। "अनेकता में एकता " का नाम है भारत हर भाषा में अंकित , देश की  इबारत  ।। सारी दुनिया में अनोखा ,भारतीय परिधान हम भारतीयों के संस्कृति की यही पहिचान  ।।                    मनीषा ठाकुर (कर्नाटक)

"विरह की बेला"

Image
जब होती अपनों से विरह की बेला आंखे भी अपनी बोली कह जाता दूर जाने के ख्याल से बेबस मन चाहते हुये भी कुछ कह न पाता दिलासा देता  नाजुक दिल भी  सहमा-सहमा सा सिर्फ रह जाता भविष्य के संजोय सपनो के लिए  जब अपना कोई दूर होता अनचाहे ख्यालों से ,फिर जाने क्यूं? मन भी जार-जार घबराता अरमानों के सच्चे रास्ते चल निरंतर आगे बढ़े, वही मंजिल को पाता जिंदगी में बिन त्याग ,समर्पण के इंसा को कुछ भी नहीं मिल पाता जीवन में आता जब विरह की बेला मन के संघर्ष को हमसे मिलवाता कठिन परिस्थितियों से जो जीत गया वही मुकद्दर का सिकंदर कहलाता जीवन का भाव है मिलना , बिछुड़ना समझ लिया जिसने ,वही मंजिल को पाता                           मनीषा भुआर्य ठाकुर (कर्नाटक)

"प्रायश्चित"

Image
इंसान को जब अपने  अनजाने भूल का खेद हुआ अंतर्मन  से क्षमा मांग उसका हृदय जो व्यथित हुआ  न चाहता था दुख देना  अहम में अपने चूर हुआ भूल पर भूल वो करता गया उसे कभी न संताप हुआ आया फिर एक दिन ऐसा दुख दूसरो का सहन न हुआ कर्म का पहिया घूमे ऐसे हृदय को जो महसूस हुआ अहम के छलावे से जो किया वह आज ग्लानि से पूर्ण हुआ फिर मन में संकल्प लिया  इंसान को  तब प्रायश्चित हुआ.............                            मनीषा ठाकुर (कर्नाटक)

"राम नवमी"

Image
                                                         रामनवमी                           दिवस है पावन                               हिंदू पर्व का                             जन्मोत्सव है                            सातवें अवतार                             श्री राम का                             रघुकुल के                           हैं वीर शिरोमणि...

"करुणा"

Image
                     🍂🍂🍂🍂🍂🍂                             करुणा भाव                          की अनुभूति रखें                             करुणामयी                             द्रवित मन                       व्यथा सुन, जो हुआ                             परजन की                            करुणा तब                           हृदय में उनके                 ...

"नवरात्रि"

Image
नवरात्रि के , नौ दिन है पावन लगा लिये मां ने ,सुंदर आसन ।। पूजा निशदिन होगी , मंदिर हो या घर लेकर मनौती आयेंगे , माता हम तेरे दर  ।। माता को अर्पित करु, प्रसाद उन्हें जो भाये कृपा करो हमपे माता,खड़े हैं शीश झुकाये ।। प्रथम दिन शैलपुत्री ,द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी शूल धारण करने वाली, तुम हो मां शूलधारिणी ।। तृतीय दिन चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन कुष्मांडा चंड-मुंड का नाश करे, तुम हो मां चामुंडा ।। पंचम दिन स्कंदमाता , षष्ठम दिन कात्यायनी सम्यक रूपिणी ब्रह्मांड की ,तुम हो मां भवमोचनी ।। सप्तमी दिन कालरात्रि,अष्टमी दिन महागौरी सुंदरता की देवी पूजे, तुम हो मां कौमारी ।। नवमीं दिन उपासना करे भक्त, माता सिद्धिदात्री कल्याण करने वाली मैय्या ,तुम हो मां जगद्धात्री ।। जय हो नवदुर्गा मैय्या, कृपा करो हमपे मैय्या रक्षा तुम ही करने वाली, तुम हो दयानिधि मैय्या ।।          🙏💐🌹जय दुर्गा मां🌹💐🙏 (मातारानी आप सभी की मनोकामना पूर्ण करे)                                       ...

हास्य.......शायद कही खो गया है??

Image
हास्य मतलब हंसना हमारे जीवन में बहुत आवश्यक है। वर्तमान में इंसान शायद हंसना ही भूल गया है। दिनभर की भागदौड़,जीवन की व्यस्तता और आधुनिक जीवन शैली ने जैसे मनुष्य के होंठो की हंसी ही छीन ली हो। इंसान करे भी क्या?? इस आधुनिक जीवन में एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ ही ऐसी है। जो उसे मशीन बनाते जा रही है। और इन सबमें वो खुद के लिए ही जीना भूल गया है। बीते समय में लोग कितना खुश रहते थे कम साधन में भी एकजुट होकर जीवन यापन करते और आवश्यकता पड़ने पर निस्वार्थ हो एक- दूसरे की मदद भी करते थे। इसके विपरीत वर्तमान में लोगों को किसी की परवाह ही नहीं उनके पास वक्त ही नहीं है दूसरो के लिए।बहुत विरले लोग ही हैं जो दूसरों की खुशी में खुश होते हैं व दुख में साथ देते हैं।                             जिंदगी के उतार-चढ़ाव में हमें हर पल को निभाना है। कभी रोना तो कभी हंसना है, मुस्कुराता हुआ चेहरा हमें जीवन जीने की कला सिखाता है ,हिम्मत देता है ,हमारे जीवन को एक नई ताजगी से भर देता है। इसलिए हास्य से परिपूर्ण जीवन भी बहुत जरूरी है।अप...

"अभिमान"

Image
मत कर इंसा , तू इतना अभिमान सत्यता कुछ और है ,इसे तू पहचान ।। मानवजन्म  मिला है ,ईश्वर की कृपा से अंहकार में क्यूं लीन रहे, स्वयं की मूर्खता से ।। इस जीवन में जो हमे ,भौतिक सुख मिला रह जाता सिर्फ़ ढेर , जैसे हो रेत का टीला ।। निस्वार्थ सेवा ,कर्म,त्याग व कुशल व्यवहार वास्तव में जीवन का है, यह अनमोल उपहार ।। खाली हाथ आए हैं, खाली हाथ ही है जाना कर्मों का पिटारा ही ,जिंदगी का  है खजाना ।। सेवा, प्रेम, प्रभुभक्ति से जीवनसुख है पाना निभाकर स्वयं के कर्तव्य ,भवसागर तर है जाना मत कर इंसा , तू इतना अभिमान सत्यता कुछ और है, इसे तू पहचान ।।                                  ✍️मनीषा भुआर्य ठाकुर (कर्नाटक)

"समुद्र तट"

Image
                              समुद्र तट                            चंचल लहरों से                              रीझता मन                              नीला अंबर                           प्रतिबिंब है देखें                              सिंधु में जब                                   मनभावन                          दृश्य परिलक्षित                      ...

"दादी के किस्से"

Image
दादी के किस्से ,हमें बहुत है भाते उनकी कहानियों में ,हम ऐसे खो जाते  कभी रुलाते तो, कभी हमको हसाते  सुनहरी यादों की, बचपन की वो बाते ।। दादी ,कहानियों को ऐसे कहती सुनने की जिज्ञासा, हमारी भी बढ़ती रोचकता से भरी, उनकी किस्से जो होती  मीठी वो यादें ,मुझे आज भी भली लगती ।। दादी, नाना-नानी से, किस्से खूब सुनें बचपन की प्यारी यादें,जैसे कहानियों में बुने दादी का आशीर्वाद ,सदा हम पर रहे बैठेंगे दादी संग, उन किस्सों को फिर से सुनने ।। 💖बहुत याद आती है बचपन की वो प्यारी यादें..........                                                      मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)