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Showing posts with the label मधु अरोड़ा

कूड़े का बादल

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        एक गांव में मिनी नाम की लड़की अपनी दादी के साथ रहती थी ।मिनी को इधर-उधर कूड़ा फैलाने की गंदी आदत थी। उसकी दादी उसको बात-बात पर समझाती थी। बेटा केले का छिलका यहां मत डालो कोई फिसल जाएगा। बेटा बिस्किट का रेपर मत फेंको ,घर गंदा हो रहा है। खाली पन्नी इधर उधर मत डालो ,परंतु  मिनी पर किसी बात का असर नहीं होता था।          वह दादी के कहने पर हंसती रहती।         एक दिन उसकी दादी को बहुत गुस्सा आया। मिनी ने अपनी चारों ओर आम की गुठलीयाँ, केले के छिलके, तरबूज की फांके फैला रखी थी। जिससे उन पर मक्खियां भिन्न-भिन्ना रही थी और घर भी बहुत गंदा हो गया था।         उन्होंने मिनी से कहा बेटा यह साफ कर दो मिनी जोर जोर से हंसने लगी दादी ने गुस्से में कहा अब यह कूड़ा तुम्हारे साथ ही रहेगा।         अगले दिन जब सुबह मिनी सो कर उठी तो उसके सिर पर कूड़े का बादल मंडरा रहा था।         वह बहुत परेशान हो गई ,उसने उस कूड़े के बादल को डस्टबिन में डालने की कोशिश की ।   ...

पापा

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     मात-पिता से जीवन मिलता,      उनके लहू से शरीर है बनता ।      पिता है जीवन का सार ,      माता है ममता का आधार ।       पिता बिना घर में न माया,       पिता बिना न साज ओ श्रृंगार ,       मां भी दिखती है बेजान।       पिता दिखताअति कठोर ,       तरुवर के घने वृक्ष सा होता ।       छाया देता बच्चों को संभालता,        परवरिश में सब कुछ भूल जाता ।        ध्यान रखता सब बच्चों का ,        जरूरतें करता घर भर की पूरी ।       अपना ना‌ वह ध्यान रखता ,        बच्चों को कई जोड़े कपड़े बनाता ,         खुद 2 जोड़ी में काम चलाता ।         पिता है हमारी उम्मीद ,         हमें डांट लगाता ,         अनुशासन का पाठ पढ़ाता ।          मुसीबत कितनी ही हो, ...

योग

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   योग का अर्थ होता है जोड़ना ।    योग मन को जोड़ता है ।जैसे हमारा मन इधर-उधर भटकता है ,कभी एक वस्तु के लिए ,वह मिल जाने के बाद दूसरी वस्तुओं के लिए कुछ सोचता है ।इससे पहले मन की गति और तेज हो जाती है ।    योग उस मन की गति को संयमित करता है। योग हमारे मन के भटकाव को रोकने में सहायक है।     जैसे मैं एक उदाहरण देकर समझाना चाहती हूं मान लीजिए ,आपके कमरे में आंधी तूफान की वजह से खिड़की का शीशा टूट गया , औ कांच इधर-उधर बिखर गया आप झाड़ू लेकर बिना देखे ।दूसरे कमरे में चले गए तो क्या सफाई कर पाएंगे !नहीं ना पहले ,आपको यह देखना होगा की कांच कहा दिख रहा है।तभी तो आप सफाई करवाएंगे और दूसरे चौखट भी बिना शीशे की हो गई।     तो अब आपको दो काम करने होंगे प्रथम तो यह कि आपको कांच साफ करना है और दूसरा खाली चौखट का इंतजाम करना है।          इसी तरह हमें पहले अपने मन के जो भी विकार  हैं उनको जानना होगा। और उनको दूर करने का प्रयास करना होगा     इन सब में योग बहुत सहायक है ।मन की चंचलता को कम करता है, दिमाग में ...

पिता का प्यार

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    प्यार पिता का इतना है ,     कुछ न कह पाऊं मैं।     उनका रोम-रोम है ,     ऋणी यह कैसे भूल पाऊं मैं।     कदम कदम पर राह दिखाता,     भले बुरे का ज्ञान कराता ।      दुनियादारी हमें सिखाता ,      ऊपर से कठोर है दिखता।      तरुवर की छाया सा होता ।      अंदर से मन का कोमल,      बेटे के लिए जान है ।      बेटी का अभिमान है,      बच्चों की पूंजी है ताकत ,      प्यार भरी छत का भान है,      परिवार का ठोस आधार है।      घर को एक बनाकर रखता,       उसका त्याग  किसी को  न दिखता ।        मां की ममता तो दिख जाती,        पिता का प्यार समझ नहीं आता।       मां ममता, तो पिता प्यार भरा छाता है।        दुख सुख की छांव से वहीं तो बचाता है।        खुद दुख सह कर,     ...

नादान

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   इतने भी नादान नहीं हो,    इतने भी मासूम नहीं हो ।    उम्र के इस दौर पर ,    खिलखिलातीरहे जिंदगी ।     मुस्कुराते रहे आप,     तारीफ करें क्या हम।     दिल में समा गए है  आप,     बातें आपकी मीठी मीठी।     प्यार से समझाना हर बार ,     ना कोई तकरार कहीं भी।      हर समय बस ,प्यार की फुआर।      जपते हो तुम मेरा नाम,       क्या सुबह क्या शाम ।       प्रीत लगाओ घनश्याम से ,       करेंगे बेड़ा पार।।                दिल की कलम से                     मधु अरोड़ा                    

विद्यालय

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       भारत नया बनाना है।       जन-जन में शिक्षा का,        संचार जगाना है ।        गांव गांव और गली गली में,        एक विद्यालय बनाना है।       अनपढ़ ना कोई रहे यहां,       ये मुहिम चलाना है।        भारत नया बनाना है।        शिक्षित भारत के बच्चे होंगे,        आसमान पर परचम फहराना है।        हर क्षेत्र में उन्नत भारत होगा,        भारत नया बनाना है।         विद्यालय तुम अब बनवाओ ,        अनपढ़ को शिक्षित करवाओ।         देश में एक जागरूकता लाओ ,         यह मुहिम चलाना है ।        भारत नया बनाना है।।                दिल की कलम से                मधु अरोड़ा       ...

कागज के फूल

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      क्यों बिताता अपना जीवन ,    तू व्यर्थ ए मानव यहां।     सीख ले कुछ सीख ले,     कागज के फूल से यहां।     माना के कागज के फूलों से,     खुशबू कोई नहीं आती है।      कागज बना छाल वृक्ष से,      फूल की बनावट भाती है।      मेहनत लगनसे भरपूर बना,      रंग बिरंगे कागज से।       रोजी का साधन है बनता,       घर चला देता किसी का।       तुझको भाया ,घर में सजाया,       सिंगार तेरे घर का बढ़ाया।       ड्रॉइंग रूम में वह रहता,       आने वाले की नजर को भाता।       अपनी तारीफ खुद करवाता ,       सीख ले मानव तू सीख ले ,       जीवन में हंसना,मुस्काना।        दीन दुखी की सेवा करले,        गुलदस्ते सा हृदय में बस जा।        ऐसी सुंदर कर्म तू कर ले,        कागज के...

एक पीली शाम

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         शाम तो रोज पीली होती है     आओ बात करें पीली शाम की       दो दोस्तों के प्यार की      मनुहार की      कसम खा रहे थे       पार्क में बैठे      जुदा ना होंगे      तेरी कसम       सारी उम्र रहेंगे साथ हम      प्यार की वह मीठी कसमें       मिलन की वह बातें        लग रही थी  हसीन        बुन रहे थे मीठे ख्वाब        एक पीली शाम आई        जिंदगी में ऐसी        दोस्तो की दोस्ती से         हो गए जुदा         पत्ता टूटा साख से         ले गई पवन उड़ा         दो दोस्त फिर ना मिले          एक ना हो पाए          एक को ले गई         ...

दुल्हन

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     लाल जोड़े में सजी दुल्हन चली,  अपने बाबुल का घर-द्वार छोड़ चली ।   भाई- बहन सखियों की यादों के साथ ,   मां की ममता पिता का दुलार  साथ ले चली।    लाल जोड़े में सजी दुल्हन चली।   यादों की गठरी साथ ले चली,   सुनहरा बचपन  साथ ले चली।   बसा दिल में प्यार भरी यादें चली,    लाल जोड़े में सजी दुल्हन चली।    प्रियतम के देखो द्वार चली,    नैनों में सपने हजार ले चली।    नई दुनिया रचाने बसाने चली,    नए लोग हैं नई रीत है,    नया हमसफर नई प्रीत है।    हमसफर के साथ गीत गाने चली,    प्यार की दुनिया बसाने चली।    लाल जोड़े में सजी दुल्हन चली।    कल तक थी जो रौब चलाती,    बात अपनी सबसे मनवाती।    आज वही सब की, बात मानने चली,    लाल जोड़े में सजी दुल्हन चली।    भूल अपने आप को,    प्रियतम के रंग में रंगने चली।     देखो अपना घर वह बसाने चली,      लाल जोड़े म...

मां तेरे सा स्वाद कहां

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       मां स्वाद तेरे खाने सा कहां,     ढूंढ  मैं यहां वहां?     मिठास थी,जो  में खाने की ,     मुझ में है वह बात कहां     परछाई तो तेरी हूं ,      पर तुझ सी  वह बात कहां ?      प्यार से बिठाना, सब को खिलाना      खाना बनाना, वह मेहमान नवाजी,      कहां से लाऊं ,स्वाद बता मां        स्वाद तेरे खाने सा कहां,       ढूंढू मैं यहां वहां।       याद आता है, वह मीठा बनाना       भीनी -भीनी खुशबू ,       प्लेट लेकर हमारा आना ,       बनाती तो सब कुछ मैं भी हूं ,       पर बच्चों में खाने की ललक कहां?        मां स्वाद तेरे खाने से कहां,        पेट तो भरे पर मन ना  भरा ,       एक रोटी प्यार से ज्यादा खिलाना,       अब भी ‌लाड़‌ जताती‌ मां,        जबरदस्ती कुछ न...

छुट्टियां

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मोबाइल का दौर ना था , लूडो कैरम का जोर था । गर्मियों की छुट्टी के खेल प्यारे , बड़े निराले ,खुशी से भर देने वाले । सब मिलकर खेलते लूडो , बहन भाई संग लगतीबाजी।  गोटियों के लिए होती छीना झपटी ,  मेरी लाल तेरी नीली हरी ,पीली संग।   मार चौकड़ी जाते बैठ,   जीतने वाला शान से उठता।    सब पर अपना रौब जमाता।    घंटो तक हम खेल खेलते ,    समय पंख लगा कर उड़ जाता।     कभी शर्त लगा खेलते लूडो     अब भी हम बहन भाई     मामा -भांजा भांजी शर्त लगाते  खाने की     आज कौन बनाएगा खाना       नए नए व्यंजन बनवाते      हारने वाले की रेल बनाते ।      जोड़ी में यह कट ना पाए       घंटो अपना रंग जमाए।       सब मिलकर आनंद उठाते।       धमाचौकड़ी खूब मचाते।       हारने पर कभी-कभी        लूडो लूडो पलट हम भाग जाते।       लूडो का खेल हमें सिखाता ,      ...

नाराज़

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  मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़ ,   तो एक दूजे को मनाए कौन ?    आज बात छोटी है,    बात बढ़ी तो गांठ पडे,    इस गांठ कोअब खुलाएं कौन ?    मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़ ।    छोटी -छोटी बात दिल में लगाना ,    फिर प्यार दिल में जगाए कौन ?    मैं भी नाराज तुम भी नाराज़ !    चुप्पी चुप्पी में बात बढे ,     उस चुप्पी को अब तोड़े कौन?     परेशान सा में घूमूं ,      चिंता मग्न सी तुम बैठी।      मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़,      तेरी याद हर समय आती है मुझको।      याद तुझे भी आती होगी,      इस झूठे अहम को तोड़ के आजा,      सारे बंधन तोड़ के आजा ।      मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़       सुनो! वक्त गुजर जाएगा?      बात अब यू ना बढ़ाओ तुम ।       कुछ तुम बढ़ जाओ,       कुछ हम‌ बढ जाएं।       इन बातों को भूल ...

पेट दर्द

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   सुन सखी सुन ना,     अरे क्या बताऊं सखी ?    पेट में दर्द हुआ भारी ,    किससे कहूं कोई सुने ना .    मेरे दिल की बात?    साजन तो सो गए,    करवट बदल के आज।     पेट में दर्द हुआ भारी।     सुन सखी सुन ना,     सारी रात करवट बदलूं।   अपने दिल की बात किसे बतलाऊं ?     पेट में गड़बड़ हो रही भारी,     बात पचे ना मुझसे,      अब तो किसे बताऊं?      सुन सखी सुन ना।      सोच रही तुझको बतला कर ,      पेट दर्द में कम कर लूं।      पर तू आगे मत कहना किसी से,      यह वचन में तुझसे भरवालूं ।      सुन सखी सुनना।     तुझ से कह रही बात सखी,      तू है मेरी प्यारी सखी।।                        दिल की कलम से                        मध...

समय का चक्र

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चक्र समय का चलता है , रोज इतिहास बदलता है । आंधी तूफान बरसता है , कहींआदमी सिसकता है  चक्र समय का चलता है ।, कठिनाइयों क दौर आज है , मन ,आकुल ,बेचैन बड़ा है। वक्त पर ना कोई जोर है , इसकी गति का ना कोई छोर है । चक्र समय का चलता है । रुकने से नहीं रुकता है , अबाध गति से चलता है। इसका तुम सम्मान करो, इसको ना बर्बाद करो।  जिसने इसको पहचाना है,   इस की कद्र को जाना है ।   नाम किया जग में रोशन ,   उनको लोगों ने पहचाना ,    चक्र समय का चलता है ।    ना किसी के रोके रुकता है।।                  दिल की कलम से                  मधु अरोड़ा                  

जग में रहना सिखा दिया

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अपना बनाके श्याम ने , नहमें जग में रहना सिखा दिया । जैसकमल रहता है जल में , इस तरह तुम भी रहो । आए दुख सुख चाहे जितने , सब को सहना सिखा दिया।  जितने भी प्राणी है जगत के,   सबके अंदर मैं ही हूं ।  श्याम ने हमें जग में सबसे ,  प्रेम करना सिखा दिया।    काम कर दुनिया के सारे,     मन में मुझको याद कर।     फल की इच्छा ना कर कभी ,     यह हमें बतला दिया।      जो आया इस जगत में ,      एक दिन उसको जाना है।       आत्मा की अमरता का सार ,       हमको  समझा दिया।        जो शरण आता है मेरी ,        मुझको अपना मान कर ।        मैं हूं उसका वह है मेरा ,        यह हमें बदला दिया ।        सच्चे मन से शांत मन से ,        आओ इन प्रभु की शरण ।        बातों ही बातों में जिसने ,        रूप अपना दिखला दिया।     ...

प्रकृति प्रेम

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प्रकृति से प्रेम करो तुम, देखो कितनी सुंदर प्रकृति।  मनमोहन कितनी प्रकृति,   सबके मन को सुख देती ।   सुबह-सुबह रवि है आता ,   अपनी सुंदर आभा फैलाता ।   होले होले तुम्हें जगाता ,    प्रकृति से प्रेम करो तुम।।   पक्षी मधुर कलरव है करते ,   अपने गान से मन मोह लेते।    देखो वृक्ष कितने है सुंदर ,    चारों ओर हरियाली होती ।    जीवन के यह पालक हैं ,    सबका पेट यह भरते हैं।    भांति-भांति की औषधि देते ,    बीमारियों को दूर है करते ।     प्रकृति से प्रेम करो तुम।।    ऊंचे विशाल पर्वत को देखो ,    आच्छादित धरती गगन है करते।     मानो अंबर से मिलते हैं ,     उसका है आलिंगन करते।     प्रकृति से प्रेम करो।।    निकले इससे सुंदर नदिया,     कल-कल करके बहतीरहती।     हर जन कि वह प्यास बुझाती ,     समुंद्र में जाकर वह मिल जाती ।।     लहरे किलोल करती हैं ,     प्रेम प्यार से व...

रोटी

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हां मैं रोटी हूं   गोल ,तिकोनी ,मोटी ,पतली   आटा, पानी मिलकर बनी  हां मैं रोटी हूं।     तवे पर जा सिंक जाती हूं   आंच में जा पक जाती हूं ,   घी लगाकर रोनक आती    खाने का स्वाद बढ़ाती हूं    हां मैं रोटी हूं ।        भक्त लोग श्रद्धा से बनाते     ठाकुर जी का भोग लगाते ,    दर्शन ठाकुर जी के कर    स्पर्श ठाकुर जी का पा प्रसाद बन जाती हूं।    मैं खुश हो जाती हूं      संगत सारी हाथ जोड़ती ।     मस्तक से वो मुझे लगाती।     मैं अमृत बन जाती हूं ।     हां मैं रोटी हूं।           भक्त जब मुझे खाते       तब मैं औषधि बन जाती हूं।      हां मैं रोटी हूं,       असाध्य रोग शांत कर जाती।        हां मैं रोटी हूं ।                चिकित्सा तो ठाकुर जी करते ।        सि...

गुबार

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भावों की महिमा है न्यारी , भांति-भांति की इसकी कहानी।  प्रेम उद्गार प्यार बरसाता,  प्रेम गुबार मन को खिलाता ।  भावों की है महिमा न्यारी ।। स्नेह भाव जब इसमें आता , सबको वह सिक्त कर जाता। स्नेह लुटा दे जग भर में,  गुबार इसका कम ना हो पाता ।  तेरी मेरी बातें सुन,   मन का गुबार बढ़ता जाता ।    सुनकर जो इन बातों को ,    दिल पर ना लेता ।    मानव वह बहुत बड़ा,     क्रोध ना उसका कुछ कर पाता ।     क्रोध बड़ा घातक गुबार ,     इससे बचना ना आसान ।     क्रोधाग्नि में खुद भी जलता ,     शब्दों से ज्वाला धधकाता ।     बनती बात बिगाड़े जाता ,     इस गुब्बार से बच कर रहना ।     कर देता मानव का नाश,      दिल में भरा बहुत गुबार।।                     दिल की कलम सेे                     मधु अरोड़ा               ...

विश्व तंबाकू निषेध दिवस

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पावन पवित्र शरीर तुम्हारा , क्यों नशे की आदत पालते हो । सिगरेट बीड़ी का धुआं उड़ा , अपनी शान बखारते  हो । पावन पवित्र शरीर तुम्हारा।। कहते हो चिंता ने घेरा , खुश हूं आज जन्मदिन तुम्हारा । मौसम है सुहाना, चलो गाय कोई तराना,  चलो आओ दो पैग लगा लेते हैं ।  मिल जाए कोई बहाना ।  पावन पवित्र शरीर तुम्हारा  गुटखा ,जर्दा ,पान मसाला खाते हो ,  कैंसर जैसी बीमारी लाते हो ।  गाल गलाते ,गुटखा खाकर ,  दारू पीकर करते लीवर ,किडनी खराब ।  जागो ए मानव तुम जागो ,  क्यों करते अत्याचार अपने साथ।  पावन पवित्र शरीर तुम्हारा , क्य इसमें तुम जहर घोलते ।  घरवाले जब हो जाए परेशान,   जां पर जब आ जाए बात ।   छोड़ो बीड़ी ,तंबाकू ,शराब,    गांजा ,सुल्फा, गुटका यार ।    तुम हो ईश्वरीय संतान ,    क्या इनका काम तुम्हारे पास।।                    दिल की कलम से                    मधु अरोड़ा         ...

लफ्ज़ आईना है

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तेरे मेरे मन की बात बताते , कभी खुशी कभी गम दर्शाते।।  खुशी से भावविभोर चेहरा,  लफ्जों में खुशी दर्शाता चेहरा ।।  लफ्ज़ हैं आईना।।  दुख में आंखों के आंसू ,  मन की व्यथा बताते आंसू ।  लफ्ज़ तुम्हारा भाव दिखाते,   लफ्ज़ हैं आईना ।।   गुस्सातिरेक से बात    तुम्हारी बदल जाती,    मनोदशा तुम्हारी दिखलाते ।    लफ्ज़ हैं आईना ।।    कितना प्यार तुम्हारे दिल में,     प्यार को परिभाषित करते ।     प्यार का अतिरेक है बनते ,     लफ्ज़ है आईना।।      लफ्जों की क्या बात करो तुम ,      लफ्जों से शुरू बात है ।      लफ्ज़ परवरिश छलकाते ,      चरित्र का आईना बन जाते ।      लफ्जों की महिमा भारी       इनसे चलती दुनिया सारी ।      लफ्ज़ है आईना।।                  दिल की कलम से                  मधु...