कूड़े का बादल
एक गांव में मिनी नाम की लड़की अपनी दादी के साथ रहती थी ।मिनी को इधर-उधर कूड़ा फैलाने की गंदी आदत थी। उसकी दादी उसको बात-बात पर समझाती थी। बेटा केले का छिलका यहां मत डालो कोई फिसल जाएगा। बेटा बिस्किट का रेपर मत फेंको ,घर गंदा हो रहा है। खाली पन्नी इधर उधर मत डालो ,परंतु मिनी पर किसी बात का असर नहीं होता था। वह दादी के कहने पर हंसती रहती। एक दिन उसकी दादी को बहुत गुस्सा आया। मिनी ने अपनी चारों ओर आम की गुठलीयाँ, केले के छिलके, तरबूज की फांके फैला रखी थी। जिससे उन पर मक्खियां भिन्न-भिन्ना रही थी और घर भी बहुत गंदा हो गया था। उन्होंने मिनी से कहा बेटा यह साफ कर दो मिनी जोर जोर से हंसने लगी दादी ने गुस्से में कहा अब यह कूड़ा तुम्हारे साथ ही रहेगा। अगले दिन जब सुबह मिनी सो कर उठी तो उसके सिर पर कूड़े का बादल मंडरा रहा था। वह बहुत परेशान हो गई ,उसने उस कूड़े के बादल को डस्टबिन में डालने की कोशिश की । ...