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Showing posts with the label सुनंदा असवाल

अग्निवीर को समर्पित

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प्रजंडता के शिखर पर, हिम नदी बहा रहा ... धधक रही लौ मशाल वो जला रहा ...। नायक ,अग्निवीर का ऋतुराज आव्हान कर रहा .. बासंतिक, सौंदर्य का वसन पीत हरा- भरा..! पंछियों का कलरव दिशा को चहका रहा .. जाति -धर्म से परे बिगुल गुंजन कर रहा..। देश की माटी का श्रृंगार चंदन नित सजा रहा .. प्रात: ,तेज़ से तन कुंदन -कुंदन निखर रहा ..! प्रज्वलित ,लगन का गीत -गीत गा रहा .. नौनिहाल ,ध्वजा को शौर्य से लहरा रहा..! घट ले ,नभ से आस की बौछार भिगा रहा.. सर्वोपरि ,देश हित शीर्ष पर रख रहा ..! ये, अग्निवीर का चक्र अग्निपथ पर चल रहा.. लाखों ,युवकों का कौशल बिंदु चमक रहा ..! पाताल,धरा,जल ,अग्नि ,वायु अस्त्र का जल जला .. देश की रक्षा करने का प्रण बना रहा ..! अम्बर, पर गण सुदूर टिमटिमा रहा ... कर्मयोग, के चक्षुओं से धर्म निभा रहा ..! काल आया जो बैरी ज्वाला बुझा रहा.. भयभीत बैठ वो अब थर- थर कांप रहा ..! सौगंध मातृभूमि की प्राणों से निभा रहा.. सुप्त भाग्य की विडंबना को जगा रहा ..! (✍️स्वरचित काव्य) दिनांक: ३०/६/२०२२ समय : ३ (शाम) शहर : लखनऊ  सुनंदा असवाल

आरक्षण की बैसाखी

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आरक्षण का जिन्न बोतल से बाहर क्या निकला कि ,इसने अपनी मन मानी चाल से क‌ई नस्लों को बर्बाद कर गया ...।  जिन्होंने आरक्षण की सौगात देश को दी थी उन्होंने सोचा भी नहीं था कि, ऐसा दिन भी आएगा प्रतिभाएं दमन की राह पकड़ लेगीं ,इन प्रतिभाशालियों युवकों का पलायन  अपने ही देश से हो जाएगा ..। उस समय कमजोर ,पिछड़े वर्ग की दशा सोचनीय थी ..। इस बिल को संशोधित कर केवल कुछ समय अवधि के लिए लाया जाना स्वीकार्य किया गया था .. क्योंकि, सामाजवाद दृष्टि कोण से हमारा राष्ट्र समाज वाद का पक्षधर रहा है सभी को बराबरी का अधिकार है ,वर्ण व्यवस्था होने से दलित वर्ग के पास सुअवसर नहीं थे । इसलिए,इस नीति को उनके उत्थान के लिए पेश किया गया था ..।   लेकिन, इतने समयकाल से चल रहा आरक्षण हमारे देश विकास की राह पर आरक्षण ही सबसे बड़ा रोड़ा है ..।  यदि, हम समान नागरिक समान अधिकार  की बात करते हैं तो जातियों और धर्म को पूछते क्यों हैं..? कोई स्कूल या प्रतियोगिता का फॉर्म भरते समय जाति और धर्म के नाम का बंटवारा क्यों हो जाता है ..?  क्या यह हमारी शिक्षा की त्रासदी नहीं कि उसे इस दानव...

तलाशती रहीं जल की बूंदें

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तलाशती रहीं जल की बूंदें, भटक रहीं  निगाहें राहों में ..! आहें भरती ,झोली खाली, ना पुष्प ना सुरभी कहीं डाली -डाली..! सूखे पोखर सूखी बहती नदियां , तालाब भी सूना बिन मच्छलियां..!  रुखी -रुखी आस टूटी ,सूखी -रोटी , नहीं अन्न -धन उगे, खरी कसौटी ..! जब,पिछला सावन बरसा था, बूंद- बूंद मन हर्षित मौसम था ..! अब,लू आग दहका रही तन में,   तपी ,धूप अंगार बनी दिवस में..! सदियों से धरा निर्झर मगन बहती , झरने ,नदियां, पोखर अंक में ले समाती..! आये कौन पथिक ये ..? प्यासे कंठ अतृप्त नैन जल से, ज्यों ,टपक पड़ी कुछ आस स्रोत से ..! चहचहा उठा संगीत बजता  , चींचीं के शोर मधुर कलोल करता ..! जल मधुरस छूकर प्राणी तृप्त हुए, एक बूंद प्यार की, एक बूंद राग लिए..!  सुनंदा ☺️

पर्यावरण मेरा प्रेम..!

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जीवन का आधार तत्व ज्ञान, हे ..! मानव पर्यावरण तू जान ..!! भौगोलिक ,इकाई पर्वत ,पठार, मैदान, अंक में लिए मां धरा सर्वश्रेष्ठ महान ..! सजो के रखोगे जो धन सम्पदा, आएगी ना फिर कोई विपदा.!! अन्न धन से पृथ्वी हुई सम्पन्न, बचालो इसे तब मिलेंगे रत्न ..!! इस ब्रह्माण्ड में धरा एक वरदान, मानव का जगत में हुआ कल्याण ..!!" हजारों एकड़ में फैली हमारी पृथ्वी कितनी खूबसूरत सुंदर है । कहीं तराई में निकलती कल कल नदियां कहीं हिमालय में सौंदर्य ,कहीं पठार ,कहीं मैदान । सैकड़ों वर्षों से निरंतर अपना अनुपम प्रेम उड़ेल रही है निस्वार्थ भाव से । यों तो हमारे इर्द-गिर्द सैकड़ों जंतुओं और जानवरों के स्पीशीज हैं ,उन सबको पाल रही हमारी पृथ्वी कितनी कर्तव्य परायण है निस्संदेह ही । हम कितने तथ्य जानते हैं इस धरती और प्रर्यावरण के बारे में । शायद ,दोनों ही एक दूसरे के पूरक हों ।  कभी प्रर्यावरण  पेड़ में बसता है तो कभी हरी पत्तियों में .. सूर्य से रौशनी लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड और जड़ों से अवशोषित जल और महत्वपूर्ण खनिज लवण या तत्व की सहायता से भरे पेड़ों का भोजन बनाने में सहायक होता है । जिस प्र...

साइंस फिक्शन:🚀🛫🔭

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एस्ट्रौनोमर्स स्पेस प्रयोगशाला...! वैज्ञानिक तैयारी कर रहें हैं नए प्रोग्राम की...उसके लिए उन्होंने विशेष पौधशाला और कृतिम उपकरण तैयार कर रहे थे..! उस मिशन में कुछ रोमांचक होने वाला था..! कुछ कमियों को टीम दूर करना चाहती थी जो ,विगत मिशन में चूकें हुई थीं वे दोहराई ना जाऐं इस बात का ध्यान रखा जा रहा। था ...! सौफी और जैदी को टीम में मुख्य भूमिका दी गई....! एक काफी बड़े मॉनीटर की स्क्रीन में सौफी टीम को बता रही थी ," ये देखें ..! यहां हमारे इसरो सेंटर से यान उड़ेगा और इसकी गति 40,000कि मी.  / घंटा होगी..! यह अपने समय से एक  से दो हफ्ते अंतरिक्ष कक्ष में पहुंचेगा..! आप लोगों की सारी तैयारी हो गई होगी .!" सभी एक साथ टीम के सदस्य  बोले :जी...!" सौफी  उत्सुकता से बोली --," आप सबको अपने को मेंटली व फिजिकली  तैयार करना है ..पूरे छः महीने ट्रेनिंग में लगेगें ..! This is the month of October. Get ready with your final target.Thanks to all members." अब साइंटिस्ट जैदी बोले-", हम सभी परिवार के सदस्यों की तरह हैं..और सबको अलग अलग विभागों में  बांट दिया है...! Yo...

"एक गरीब बचपन के गुनाहगार"

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ना -ना -ना बाबूजी मुझे भीख नहीं चाहिए , भीख में मिली दया नहीं चाहिए ..! हो सके तो प्यार दो ,एक हंसी उधार दो ..! मुझ गरीब को मेरी तंग तस्वीर नहीं चाहिए, गरीबी का मारा बचपन नहीं चाहिए , हो सके तो वक्त दो,एक पल उधार दो ..! ना, मुझे कानून की किताबें चाहिए, बड़ी -बड़ी बातें के भाषण भी नहीं चाहिए , हो सके तो साथ दो,एक मदद का हाथ दो ..! काली ठुठुरन भरी सर्द रात नहीं चाहिए, धूप की तपिश ,ना तेज़ बारिश की बौछार चाहिए, हो सके तो आसरा दो,एक नजर मुस्करा दो..!   ना ही थपेड़ों में सिसकता बचपन चाहिए,  मां -पिता को गर्दिशों का सरकारी आंकड़ा नहीं चाहिए , हो सके तो संवार दो, मुझे कोई आकार दो ..! सुनंदा ☺️

"बोझा कम ,खिले मासूम"

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पांचवीं कक्षा का चिंदबरम आज परेशान था..!  कमर में असहनीय पीड़ा व रीढ़ की हड्डी में अत्यधिक दर्द था ..! उसका मन विद्यालय जाने का नहीं था ..!   मां ने कीचन से निकलते हुए पिता से कहा ,"--सुनिए ..! चिदंबरम की हालत ठीक नहीं है ..! उसे सुबह से ही चक्कर आ रहें हैं ..! वह स्कूल जाने की हालत में नहीं है .. कृपया छुट्टी ले कर डॉक्टर से जांच करवा दीजिए ..! रात भर सोया नहीं और मैंने बाम भी लगाया किंतु दर्द ज्यों का त्यों बना है असर ही नहीं हुआ ..!"  उधर चिंदबरम के पिता ने उस दिन ऑफिस से छुट्टी ले ली  ..! पिता ने जल्दी तैयार होने के लिए कहा ..! चिदंबरम खुश था कि, उसे आज ही दर्द से राहत मिल जाएगी ..! पिता के साथ वह ऑर्थोपेडिक सर्जन के पास पहुंचे वहां उस जैसे अनेकों बच्चे आए थे जिनको यही समस्या थी ..! डॉक्टर ने जांच और निरीक्षण के बाद निष्कर्ष निकाला और चिदंबरम से प्रश्न किया ,"--बेटा ..! आप जब अपनी कक्षा में जाते हो तो कितना भारी बैग ले जाते हो ..? क्लास कितनी मंजिल तक है ..? बैग टाइम टेबल से ले जाते हो क्या ..? " अब चिदंबरम की बारी थी बोला,"-- डॉक्टर अंकल ..! मैं तो...

'देश का सच्चा सैनिक '

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सत्यमेव जय की राह पर डिगते नहीं हैं दुश्मन पर वार करने से डरते नहीं हैं..!! बैरी की नजर को चीर कर रखते हैं .. सर पे वतन की मिट्टी सजा ताज पहनते हैं.! भारी हथियारों का कांधे पर बीड़ा उठाते हैं .. सरहदों पर गोली का निशाना बनते हैं ..!! बर्फीली चट्टानों पर हौसला रखते हैं .. रंग ऋतुओं के उनपर नहीं चढ़ते हैं ...!! देश की आन के लिए मरते मिटते हैं.. एक सैनिक पूरा  अपना जीवन लगाते हैं .!! झंडे के नीचे शान ,बान लिए चलते हैं .. एक सैनिक  देश के लिए जंग लड़ते हैं..!! देश के अमर सपूत जब भी चलते हैं .. हवा धीमी हो जाती है बादल उड़ा देते हैं ..!! वंदेमातरम् ..🇮🇳 सुनंदा ☺️

एक सैनिक और प्रेम ..!

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  बाहर बारिश थी .. अनवरत झम झमा झम ..! ऊपर टीन की छत पर बारिश का शोर , टपर -टपर की आवाजें होती ..! मन बारिश में  गाना गुनगुनाने लगा और उसने टेबल पर पड़ी डायरी उठा ली ..! नेह भर रहे थे बारिश के साथ ..! वह कुर्सी पर  बैठी और कुछ पढ़ने बैठ गई ..! वह पढ़ने लगी .. सुनो मन..! कितने दिनों से सोचती थी तुम इस बार आओगे ..? इस बार तो मेरे संग समय बिताओगे बहुत लम्बे दिनों तक तुम्हें छुट्टी नहीं मिली ..और जो बेला का पेड़ जो तुम लाए थे ना वह मुरझाने लगा है क्योंकि हमारे प्यार की खुशबू उड़ रही धीरे धीरे .!  मुझे लगता था इस बरस तो आ जाओगे ..! हमेशा की तरह एक सरप्राइज देने की तुम्हारी जो आदत है .. इस बार क्या सरप्राइज देने वाले हो ..? उधर  तुम्हारी मां भी परेशान थी कि,तुम विवाह की तारीख पक्की करके अपने कर्तव्य की खातिर , ड्यूटी तैनाती पर चले गए हो ..!  पता नहीं बरसात का रिश्ता भी ऐसा है जिंदगी से जो भीगा देता है अंदर की अनचाही संवेदना भी हिलोरे मारती हैं.! जब भी वर्षा होती है तुम बालों को पोंछते हुए, मुस्कान चेहरे में लिए दिख जाते हो ..! तुम पुरुष हो ..अपने कर्तव्य ...

मौत की गुत्थी और जासूस नाकाम "

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एक रात... मैं सोया था ...और लोग बोले कहां गया मैं..? बहुत गहरी नींद में सो गया...था मैं..कहता था हमेशा रूसी और अमेरिकी जासूस मुझपर नज़र रखे हैं...!  पर ये सबके लिए आम बात थी...मुझे बहुत सम्मान  मिला हमेशा भारत में..!  मेरी पत्नी मृणालिनी मेरा इंतजार कर रही थी क्योंकि हम परिवार के साथ केरला की खूबसूरती में फर्स्ट ऑफ जनवरी मनाना चाहते थे..!  केरला के कोवलम शहर में रूका मैं..मुझे एक विशेष रिसोर्ट्स पसंद था..उसके बाहर खिड़कियों से झांकता था तो सारी थकान मिट जाती थी..! बहुत काम किया परमाणु रिसर्च और अंतरिक्ष परीक्षण केंद्र में..! मैं पारसी साहित्य का ज्ञाता अन्य कलाओं में भी  हाथ अजमाता रहता लोग मुझसे प्रभावित रहते थे..!व्यवाहरिक ज्ञान मुझे मां से मिला पत्नी भी सरल स्वभाव की थी..! जब अणु से ऊर्जा का विकीरण होता है  तो..इलेक्ट्रोन्स में गति  होती है..!  बहुत सारे विषयों में अनुसंधान किए ... जैसे वस्त्र और प्रबंध कई क्षेत्रों में काम किया था मैंने..! हज 52 वर्ष की आयु थी सन् 1971 की बात थी केरल में कोवलम गया..उसी रिसोर्ट्स में...!  पहले केरल क...

साधना

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इतिहास गवाह है-- समाज की धारा के विपरीत यदि स्त्री चलती है तो उसे अभिशाप मिलता है..! कहानी मेवाड़ की किले की है..। सुंदर नक्काशी  से बने चबूतरे में एकांत में राजा सूरज सेन थे । राजा  सूरज सेन ब्रह्म साधना में लीन अपनी ध्यान मुद्रा  में थे । रानी चित्रा कहीं बाहर गई हुई थी। रानी के गांव से एक रिश्तेदार सूर्य बाला नाम की लड़की  आई थी , वह अत्यंत खूबसूरत  थी ,राजा को देख  उनपर मोहित हो गई ।  जब रानी लौटी अपनी रिश्तेदार सूर्य बाला को क्रोध में श्राप दे डाला," जाओ तुम बारह साल तक बूढ़ी हो जाओगी !" यह देख सूर्यबाला घबरा गी क्षमा म़ागने लगी ," क्षमा..मुझे क्षमा ऐसा मत करो मैं अभी तो बहुत खूबसूरत और जवान हूं ..अभी शादी नहीं हुई है ..ऐसा मत करो रानी मेरे माता पिता मर जाएंगे ...।" पैरों में पड़ गिड़गिड़ाने लगी । रानी के पैरों पर आंसू गिरे व  मोती बन जाते.. ।  जैसे जैसे वह रोती ..! रानी चित्रा ने सोचा ,"यह सत्य लग रहा है । यह सच कह रही है ..!" इसलिए ,उसे क्षमा कर दिया कहा "जाओ..बारह बरस बाद फिर इसी यौवन में लौट आओगी जब राजा महेंद्र प्रताप और उसकी पत्न...

"ईश्वरीय अराधना साकार इंद्रधनुष "

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पावस दिवस जल भर कुंभ , अतृप्त धरा ओढ़ी नव वसन ..!! छवि अंकित नभ में रंग , ओट से गवाक्ष से सारंग ..!! नैसर्गिकता का प्रमाण , अट्ट-होर किए धारण ..!! ग्वाल-बाल संग खेले कृष्णा, राधा-मोहन प्रिय ,मीरा -श्याम आराधना ..!! सतरंग शून्य से उत्सर्जित विकिरण , ज्ञानार्जन से उत्पन्न अवधारण..!! तत्व ज्ञान से इंद्रधनुष परिपूर्ण , चलित हुआ जगत सम्पूर्ण ..!! अराधना शक्ति में ब्रहाण्ड , माना विज्ञान सूक्ष्म ईश्वरीयकण ..!!  सुनंदा ☺️

बुद्धि / ताकत (तुलना )

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एक बार : मानव ने  शेर, चिड़िया , कुत्ता व मुर्गे को एकत्र किया व पूछा ,"--तुम्हारी तुलना में मैं बुद्धि में अधिक हूं .! मेरा सबसे महत्वपूर्ण अंग मेरा मस्तिष्क ही है, जिससे मैं पूरी दुनियां पर राज कर सकता हूं ..! जिसका भार 1400 ग्राम के करीब है । है कोई मुझसे अधिक ..? विद्वान ..?!! बोलो ..?मैंने ये अविष्कार किए ,सभी कुछ अपनी बुद्धि से बनाया ..सभी कुछ ..!" मानव की ऐसी बातें सुनकर शेर गुर्राया व बोला ,"-- तुम जो भी कहो मानव..! मुझे जंगल में देखकर तुमने ही तो बड़े बड़े लेख लिखे थे ,कि मैं जंगल का राजा हूं ..! भला अब तुम कैसे कह सकते हो कि, तुम्हारा मस्तिष्क मुझसे अधिक शक्तिशाली है ..! आजकल जो ताकतवर है वही दुनियां पर राज कर सकता है ..! जैसे मैं ..!" मानव उसका उत्तर सुन असंतुष्ट रहा ..!  फिर : कुत्ते ने बोलना शुरू किया बोला ,"-ऐ मानव ..! तुम ही कहते हो ना अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है तो , मैं अपनी गली में तो पूंछ ऊंचा कर गर्व से रहता हूं । तुम अपनी गली के किसी मकान में चिल्ला सकते हो क्या ? जैसे मैं करता हूं ! दूसरी गली के कुत्ते मेरे सामने फटकने की हि...

"दहलीज "

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स्त्री घर की दहलीज के पार , मर्यादाओं का लेती भार ..!! समाजिक मूल्यांकनों की उंगलियों का , होती रहती हर क्षण शिकार ...!! कुछ द्रोपदी में ,कुछ गिनती में सीता होती , तुच्छ मानसिकता की धार ..!! उसने धारण किया झीना आवरण, समाज के ठेकेदारों ने किया विभत्स हाहाकार ..!! जन्म लिया है , किया उपकार, स्त्री मर्यादाओं की नहीं पुकार ..!! (स्वरचित कविता) सुनंदा ☺️

फूल बने जहर

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"जहर का असर फूलों में इस कदर हुआ है .. जिंदगी से रुबरू मासूम दो चार हुआ है ..!!" पुजारी जी ने बड़े अरमानों से पुत्री को पढ़ाया ..पूरा एम. एस.सी. एम.एड.करवाया था ..!  विवाह की तैयारियों में कोई कसर ना रहने दी ..! पुत्री के सुख के लिए जो पिता कर सकता था उससे अधिक ही किया ..!  विवाह के कुछ समय तक सब कुछ ठीक ठाक रहा .. परंतु एक वर्ष के पश्चात नवनी और सोम के मन में छोटी-छोटी बातों में मतभेद उभरने लगे ..!  कभी सोम नवनी मायके के बारे में कुछ कहता तो कभी नवनी सोम के घरवालों के बारे में भी कह देती .तो सोम गुस्से से तमतमा जाता ..!  वह कहता ,'--तुम्हारे मैके में तो कभी इज्जत ही ना हुई मेरी ..ना अलग कमरा ही मिला चाचा जी की लड़की की बरात में और ना ही सोने खाने को पूछा ही ..!" नवनी कहती ,"--सोम क्या कह रहे हो ,अब तो आप दामाद बाबू हो ग‌ए हो घर के ,एक सम्बन्ध बन गया है , मेहमान तो नहीं ना ..! कहीं भी जाकर सो सकते हो..!" --"यही तो प्रोब्लम है आप सब की ..बड़ी बड़ी बातें और कुछ नहीं ..! खोखले  ..!' आधा ही कह पाया था नवनी चीखने लगी थी ..!,"---बस करो बस .....

एक प्रहरी का 'संकल्प ':

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चहुंदिश के द्युति दीप्त संकल्प , उच्च शिखर वक्ष दृढ़ विकल्प ..!! सीमाओं के अजेय रक्षक प्रहरी , मातृ भूमि के अडिग संतरी..!! लहु क्रीड़ाएं दिवसों - वर्षों से अजेय, बारम्बार चुनौती स्वीकार्य रिपुंजय..!! हिम ,शैल से कन्याकुमारी सागर तट, भारत के रक्षक गूंजे गान जन जागृत..!! मोहताज नहीं मुखर अंत परिचय , जन -जन उद्देश्य उद्घोषित जय -जय ..!! वर्दी- आयुध धारण गर्वित ललाट, बलशाली, शक्ति,वीरयोद्धा हे नायक..!! झंझावात  के महासमर का वक्त , अम्बर से धरा उत्पात हो रहा रक्त..!! देश की आन का गौरवित भारत रक्षक , शान रहा हरित, केसरिया ,श्वेत ध्वज ..!! युग प्रहरी मातृभूमि के जांबाज, मातृ भूमि  झुकती करती  नमन् ..!! रचित शूरवीर गाथाओं के अधिनायक , मृण -स्मित रक्षक, स्वर्णिम ऐतिहासिक.!! सुनंदा ☺️

चाय की केतली

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ये चाय की केतली  ,ये चुस्कियां चाय की, इन लिपटी हुई खुशबुओं में कहानियां महकी.!" दूर एक गांव की जाती हुई सड़क ... बारिश का मौसम..आसमां में घनघोर काली घटा ... चारों ओर पानी -पानी होती जिंदगी ..! शाम का वक्त..! तेज गड़गड़ाहट मूसलाधार , तूफान आने का संकेत दे रही थी ...! पल -पल ,मौसम करवट ले रहा था ..जोरों की हवा सांय -सांय चल रही थी ... तापमान में ठंडक थी ..! आसमां में बिजली भी कहर बरपा रही थी .!  किनारे पर एक चाय की घास -फूस से बनी ..चार -छ:बलल्लियों से खड़ी चाय की दुकान  ..बाहर  छोटे से आंगन में लालटेन टंगी हवा से हिलती..बुझने को तैयार ..! अंदर रंगी- पुती अस्त व्यस्त ,सीलन भरी दीवारों के पीछे एक कंकाल सा चेहरा ..ऐसा लगता था जीवन की अनियमित मार की अनकही दास्तां कह रहा हो ..। कई सावन आए और गए ... भादों आए और गए ..। लेकिन उसके जीवन को कोई हरा ना कर पाए  काले स्याह घेरे ,आंखों के नीचे रह गए..। लगता था ,उस चेहरे में मासुमियत और सुंदरता का निखार सा लिहाफ रहा होगा कभी ..! यौवन के बसंत को उसने भी पार किया होगा .!  वह चारपाई पर उकड़ू  पड़ी थी ...! सांसें...

सतरंगी जमीन को पैरों कुरेद रही थी ..।

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जमींदार बैष्णौ ने सतरंगी को उसके मां -बाप से खरीदा था ,वह बेहद गरीब किसान की बेटी थी । सतरंगी उमर से दुगने साहूकार की पत्नी बनी, घर में अनाज के वास्ते । पीछे दो- दो बहनें थीं यह सोच घर का बोझ कम हो जाएगा । राजस्थान के जैसलमेर में बैष्णौ की अपनी धर्मशाला थी, हजारों हैक्टेयर जमीन और हवेलियां । कोई कमी  ना  थी । एक बार... सतरंगी चूल्हे में रोटी बना रही थी..गर्मा गर्म परोस रही थी..साथ में छांछ मठ्ठा का गिलास ,मक्खन ,चोखा व कचौड़ी ..। सतरंगी सौत को "बीबी"कहती  थी । "बीबी और लेनी है क्या..?" सतरंगी पूछी । "नहीं रे.. सत्तो और नहीं बस ..!" बीरनी बोली...। कत्थई आंखों से सौत सौतियाढाह मन ही मन पी के रह जाती ..। सोचती रहती बीरनी,"बीमार हूं , कौन सेवा करेगा भला..??" याद पड़ता उसे जब वह नई -नई ब्याह कर आई थी-- पूरे राजस्थान में उस जैसी खूबसूरत  क्षत्राणी नहीं थी..। दूर दूर तक मशहूर रही कहानियां उसकी  खूबसूरती की..।  बहुत रिश्ते आए थे परंतु पिता को राजसी ठाठ और ऐशो आराम वाला परिवार पसंद था..उस श्रेणी में सर्वप्रथम  बिष्णौ ही जंचा था..। जब उसकी डोली जैसलम...

🌺फूल🌺अंतिम भाग

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अब किसका इंतज़ार ..?  एक बार फिर फोन की घंटी घनघनाई .... ग्रेसी ने फोन उठाया ,--" हेलो !" ------------🌺----------------🌺-------------🌺-- उधर से एक स्वर ,__"हैलो मैम मैं ..आपकी  बहन के बारे में कुछ जानकारी देना चाहता हूं । यदि आप .....? ग्रेसी की आंखों में यह अंजान शख्स कौंध रहा था .. हिम्मत जोड़ते हुए उसने कहा ,--" क्क्क्कौन ....आप को मेरा नम्बर ... उधर से आवाज आई ,--" मैम... ऑन लाइन के जमाने की बात है ,हर चीज फास्ट होती है ...! मैं आपको सबूत दे सकता हूं ।आपको मेरे दिए पते पर आना होगा ..जल्दी और हां किसी को ना पता चले चुपचाप ... यदि मैं आपको सबूत दूं तो ,मुझे बदले में पैसे देने होंगें ..!" वह उठ नहीं पा रही थी फोन  हाथ से छूट गया था । फोन पर, -- "आवाज हैलो ...मैम हैलो ..!!" नैना ने ग्रेसी  के कंधों को सहलाया और फोन हाथ में ले लिया ...बोली ,--"यस स्पीकिंग ..!! आप कौन ..??" उधर से फोन कट चुका था ..। नैना ने मां को गले से लगाया और आंखों से निकली बूंदों को हाथों से समेट लिया । ग्रेसी के मुंह से निकला,--" इतनी बड़ी हो गई ...ह...

🌺फूल 🌺🌺-भाग -१०

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थाना प्रभारी ने पूरे घर को सीज कर दिया था कदम दर कदम फूंक-फूंक कर चलना था , मिडिया का दबाव भी था ..। जवाब चाहिए सवाल बहुत थे । सबूतों का मिलना जैसे --- १) सोसाइड लेटर का ना मिलना  २) गिट्टू का किसी को फोन ना करना  ३)आस पास किसी को जानकारी ना होना  ४)तबियत खराब पर सूचना ना दे पाना ५)मरने से पहले खाना बनना और खाना  ७)दो ग्लासों का टेबल में होना ८)एक सफ़ेद पाउडर का मिलना कितने पुख्ता थे यह तो छानबीन के बाद ही प्रकाश में आ सकता था ... हकीकत भटक रही थी कातिल आजाद था ..। अटकलों का बाजार चलीं और कई लोग घेरे में भी आने वाले थे ...।वह भी जिनका कुछ लेना देना ना था । बिल्डिंग में दूध वाले ,पेपर वाले , सब्जी वाले और अन्य दुकानों से पूछताछ हुई । कम से कम बिल्डिंग में रहने वाले तीन सौ लोगों के दायरे में खोज- बीन की गई ।  बिल्डिंग के वॉचमैनों से भी पूछताछे की गई क्योंकि ,बीच में ऐसे वॉचमैन्स की कहानियां रूबरू हुई थीं जिसमें, बिल्डिंग में रहने वाली सुंदर- खूबसूरत महिलाओं को वॉचमैन ने ही मारा था ।  तफ्तीश सही दिशा जा रही थी ....डर था । महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ी...