फूल बने जहर
"जहर का असर फूलों में इस कदर हुआ है ..
जिंदगी से रुबरू मासूम दो चार हुआ है ..!!"
पुजारी जी ने बड़े अरमानों से पुत्री को पढ़ाया ..पूरा एम. एस.सी. एम.एड.करवाया था ..!
विवाह की तैयारियों में कोई कसर ना रहने दी ..! पुत्री के सुख के लिए जो पिता कर सकता था उससे अधिक ही किया ..!
विवाह के कुछ समय तक सब कुछ ठीक ठाक रहा .. परंतु एक वर्ष के पश्चात नवनी और सोम के मन में छोटी-छोटी बातों में मतभेद उभरने लगे ..!
कभी सोम नवनी मायके के बारे में कुछ कहता तो कभी नवनी सोम के घरवालों के बारे में भी कह देती .तो सोम गुस्से से तमतमा जाता ..!
वह कहता ,'--तुम्हारे मैके में तो कभी इज्जत ही ना हुई मेरी ..ना अलग कमरा ही मिला चाचा जी की लड़की की बरात में और ना ही सोने खाने को पूछा ही ..!"
नवनी कहती ,"--सोम क्या कह रहे हो ,अब तो आप दामाद बाबू हो गए हो घर के ,एक सम्बन्ध बन गया है , मेहमान तो नहीं ना ..! कहीं भी जाकर सो सकते हो..!"
--"यही तो प्रोब्लम है आप सब की ..बड़ी बड़ी बातें और कुछ नहीं ..! खोखले ..!'
आधा ही कह पाया था नवनी चीखने लगी थी ..!,"---बस करो बस .. तुम्हारे घर में क्या था ..जब से मैं आई हूं तब से ....!"
तड़ाक् से एक थप्पड़ सोम ने नवनी की गाल में जमा दिया वह गुस्से से तमतमा रहा था दांतों को भींच रहा था ..! कभी प्रतियोगिताओं में नारी सशक्तिकरण मुद्दों पर बड़े-बड़े भाषणों में गंभीर तथ्यों को उजागर करने वाली नवनी को जीवन की हकीकत समझ आ रही थी ..!
नवनी और सोम के सम्बन्ध में कड़वाहट घुलने लगी थी ..!
दो वर्ष बाद एक बच्चे का आगमन हुआ ..! नन्हे की किलकारियों से आंगन गूंज उठा ..सम्बधों में कटुता जारी रही ..!
इस बीच जिंदगी में बच्चों का आना हुआ ..!
सोम उसे वैसे ही तंग करता रहा , कभी हाथापाई करता ..! नवनी के पिता सोचा कि, नवनी का परिवार बढ़ने से उसका जीवन सम्भल जाएगा लेकिन ,ऐसा हो ना सका । उसे मजबूरी में ट्यूशन पढ़ाने को मजबूर किया गया ..! विवाह के समय नवनी के पिता के घर से आए सभी गहने सोम ने बेच दिए ..!
सोम को नवनी से नफ़रत हो रही थी ..! वह हर हाल में तालाक चाहता था..! उसने नवनी से तालाक के पन्नों पर दस्तख़त मांगें ..!
इस बीच वह एक बार वह फिर मां बन गई ..! दो फूल खिलने के बाद भी सोम का व्यवहार ना बदला .!
समय बदल रहा था परंतु, भाग्य ना बदला ..! उसे पता था भाग्य को कोसने से कुछ ना होने वाला है..!
अब पति ने उसे और भी अधिक तंग करना शुरू कर दिया था । वह मायके चली आई ..! मां ने रिश्तों का हवाला देकर समझाने की प्रयत्न किया ..! परंतु वह अब उस जगह जाने को तैयार ना हुई ..!
मां -पिता को अपना मान की चिंता थी ..! उसकी किसी को नहीं .! जिन पिता के कंधों ने उसके नखरे उठाए थे वही वक्त के साथ थक गए थे ..!
उसके मां- बाबू जी उसके प्रति बदल गए थे ..!
फूलों में जहर चढ़ रहा था....!
उसकी जिंदगी में बदलाव तो नहीं आ सके.. परन्तु मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया ..इस बीच पिता की मृत्यु हो गई ..!
उसे वापस सोम के पास जाना पड़ा ..! अब नवनी का जीवन बदल रहा था ,वह बच्चों की खातिर समझौता करती रहती ..! ट्यूशन पढ़ाती और जो पैसा हाथ आता उसे भी सोम छीन लेता...अब तो वह इन बातों की अभ्यस्त हो चुकी थी...!
कभी मन के घाव और भी हरे हो जाते जब सहपाठियों के साथ अपने जीवन की तुलना करने लगती ..!
कुछ दिन बाद ...
पति ने उसे घर से निकाल दिया, उसे बच्चे भी नहीं दिये, ना उनसे मिलने ही दिया ..!न्यायालय में तलाक की अर्जी डाल दी ..! उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि 'बच्चे छुट्टियों में मां के पास रहेंगे । 'क्योंकि अभी नवनी को गुजारा भत्ता नहीं मिल रहा था..! सोम ने सख्त आदेशों की भी अवहेलना की, बच्चों को कभी मां के पास भी ना भेजा ..!
बच्चों की मां नवनी पर चरित्रहीन का आरोप भी लगाया गया..! सोम धीरे -धीरे बच्चों के दिल और दिमाग से खेल रहा था वह उनके मन में नफरत का बीज बो रहा था..! फूलों में जहर चढ़ रहा था ..! आखिरकार ,तालाक हो गया ..! बच्चे नीरा से बहुत नफरत करने लगे ..! धीरे धीरे बच्चों का फोन आना समाप्त हो गया ..! यदि वह फोन करती भी तो भी वे उठाते नहीं थे.. !
उसकी किसी को जरुरत नहीं लग रही थी ..!
एक दिन नवनी को काफी दिनों बाद खबर मिली कि, सोम की हृदय गति रुकने से मौत हो गई है...!
बच्चे नवनी के पास नहीं जाना चाहते थे..!
वे अपने रिश्तेदारों के पास खुश थे फिर भी नीरा उनको मान मनौव्वल कर अपने पास ले आई ..! आज भले ही बच्चे बड़े हो गए हैं, परंतु, मां के प्रति जहर जो हृदय में पिता ने भरा है वह आज भी जस का तस हृदय में भरा हुआ है ..!
वे फूल जहर बन गए हैं ..! क्या कोई था जो इन फूलों को जहर बनने से रोक सकता था ,नवनी ,सोम,नवनी के रिश्तेदार ,सोम के रिश्तेदार , न्यायालय ,समाज या कानून ??!!
"फूल बने जहर ..!"
सुनंदा ☺️
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