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Showing posts with the label Diya Jethawani

रिश्तों की डोऱ

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भाभी कहाँ हो आप.... भाभी...। अरे कहाँ चलीं गई...।  आई भईया.... क्या हुआ.. आज आप इतनी जल्दी ... सब ठीक तो हैं..!  अरे भाभी आप भी ना... कबसे आवाज लगा रहा हूँ...।  वो मैं.... मैं...  अरे अभी वो सब छोड़ो... इधर आओ जल्दी..।  भाभी ये देखो कैसी हैं...! (एक पोलीबैग से शर्ट निकालकर दिखाते हुए)  वाह..... बहुत प्यारी हैं भईया ....। आप पर बहुत जंचेगी...।  लो कर दी ना खोटी बात...अरे ये मैं भाई के लिए लाया हूँ...।  इनके लिए...!!  हाँ भाभी... अच्छा चलो अभी जल्दी से अपनी आंखें बंद करो..।  क्या हुआ....!!  आप करो तो सही....।  लो बाबा कर दी...।  अब हाथ आगे बढ़ाओ...।  हम्म्... ये लो..।  अब आंखे खोलो और बताओ ये कैसी हैं...। (हाथों में एक नीले रंग की ड्रेस रखते हुए)  वाओ.... सुपरब... बहुत खूबसूरत हैं ये...।  आपको पसंद आई ना भाभी... आपका फेवरेट कलर हैं ना....।  हाँ भईया.....। लेकिन यह तो बताओ आज ये सब किस लिए..!  भाभी ....भूल गए ना...अरे.....मुझे आज पहली तनख्वाह मिली हैं...।  अरे हाँ.... मैं तो भूल ही ग...

गरीब कौन...!

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सेठ :- ए... लड़के ये स्कूटर कितने में दिया..?  बच्चा :- बीस रुपया साहब...।  सेठ :- बीस रुपये... लूट मचा रखी हैं तुम लोगों ने तो..। मेले में मौके का फायदा उठाते हैं तुम जैसे लोग...। सही सही बोल... वरना ओर भी लोग हैं यहाँ बेचने वाले..।  बच्चा:- साहब अठारह रुपये दे दिजिएगा... बोनी करवा दो साहब... मेहरबानी करो साहब..।  सेठ :- दस रुपये में देनी हैं तो बोल...।  बच्चा :- क्या साहब पन्द्रह रुपये तो खरीद हैं हमारी..।  सेठ :-चल छोड़ फिर... नहीं चाहिए..।  बच्चा :- साहब सत्रह रुपये दे दिजिएगा...। दो रुपया कमाएंगे तो रात का खाना खा पाएंगे...।  सेठ :- अरे छोड़ो ये तुम लोगो का फिल्मी डायलॉग...। साले तुम जैसे लोगो की असलियत अच्छे से जानता हूँ मैं...। हम जैसे लोगो को लूटकर रात को चरस गांजा पीते हो... शराब पीते हो..। हमारा देश... हमारा समाज तुम जैसे हरामियों की वजह से पीछे होता जा रहा हैं...।  बच्चा :- साहब गाली काहे दे रहे हो..।  सेठ :- अरे तुम जैसे लोग इसी लायक हो...। अभी आखरी बार बोलता हूँ दस रुपये में देना हैं या नहीं..!  बच्चा :- नहीं सा...

प्रेम की निशानी...

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राजीव :- साक्षी कहा खोई हुई हो... और ये तुम्हारे हाथ में क्या हैं..!  साक्षी :-ये... याद हैं राजीव मैने तुम्हें अभय के बारे में बताया था..। राजीव :- हां... याद हैं..।  साक्षी :- ये उसी की एक निशानी हैं..।  राजीव :- निशानी...?  साक्षी :- हां... प्यार की निशानी..। ये लोकेट और एक लेटर उसने मुझे दिया था..।  राजीव :- ओहह...। वो लेटर कहाँ हैं..!  साक्षी मुस्कुराते हुए :- तुम्हें पता हैं राजीव उस लेटर में उसने क्या लिखा था..।  राजीव:- क्या..!  साक्षी :- सिर्फ दो लाइन लिखी थी..। डियर साक्षी मुझे नहीं पता मैं तुमसे कब से और कितना प्यार करता हूँ बस इतना जानता हूँ.. यू कंपलीट मी..।  राजीव :- वाह... क्या बात हैं.. दो लाइन में ही सब कुछ बोल दिया..।  साक्षी :- पता हैं राजीव.. इतने साल हम साथ पढ़े.. साथ खेले.. साथ बढ़े हुए... पर मुझे कभी भी नहीं लगा की वो मुझे इतना प्यार करता हैं..। ना ही कभी उसने जताया और ना ही कभी मुझे महसूस हुआ..।  राजीव :- तुम बहुत मिस कर रहीं हो ना उसको..!  साक्षी :- हां राजीव... । जानते हो क्यूँ..!  राजीव :...

आयुर्वेद

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हमारा भारत देश प्राचीन काल से ही औषधियों पर जोर देता रहा हैं..। रामायण काल में भी लक्ष्मण जी के मुर्छित होने पर संजीवनी बुटी का इस्तेमाल किया गया था..। आयुर्वेद और औषधि की खान हैं हमारे देश में..।  नीम .. बबुल .. अश्वगंधा ... हल्दी .. मुल्तानी ..ब्रंगराज..रीठा...आंवला...ना जाने कितनी ही ऐसी जड़ी बुटियां हैं जो हमारे शरीर के लिए  बहुत फायदेमंद हैं..।  प्राचीन काल में हकीम और वैध ही हर बड़ी से बड़ी बिमारी का इलाज इन जड़ी बुटियों से करते आए हैं..।  लेकिन आधुनिक समय में हमने पाश्चात्य संस्कृति को अपना लिया हैं..। हमने हमारे वैधो के महत्व को दरकिनार कर दिया हैं..। हम इन जड़ी बुटियों की महत्वता को भूला चुके हैं..।  आज हम बाहरी अंग्रेजी दवाईयों पर ज्यादा भरोसा करते हैं..। हम इन दवाईयों के आदि हो चुके हैं..। एक दिन दवाई ना ले तो हमारा बी.पी . हाई हो जाता हैं.. शुगर बढ़ जाता है ... । ये दवाइयाँ सिर्फ हमें क्षणिक राहत देते हैं.. जबकि आयुर्वेदिक दवाइयाँ और जड़ी बुटियां बिमारी की जड़ को खत्म करने की क्षमता रखते हैं..। उनका असर थोड़ा धीमी गति से जरूर होता हैं.. पर को...

अनुभव...

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नरेश :- पापा अब इस विनय को आप ही समझा सकते हैं.. हर बात पर हर किसी को देखकर उसका मखौल उड़ाना सही नहीं हैं..।  कैलाशनाथ :- हां बेटा मैं खुद भी बहुत दिनों से देख रहा हूँ..। लेकिन बेटा उसे डांटकर या मारकर समझाया नही जा सकता.. अभी वो बच्चा हैं..। तुम परेशान मत हो मैं अपने तरीके से बात करता हूँ उससे..।  उसी शाम कैलाशनाथ रोज की तरह बगीचे मे टहलने जा रहे थे आज उन्होंने अपने पोते विनय को भी आइसक्रीम की लालच देकर तैयार कर लिया अपने साथ चलने के लिए..।  कैलाशनाथ और विनय रास्ते से गुजर रहें थे तो उन्होंने नजदीक ही मकान बनाने का काम चल रहा था.. विनय तुरंत बोला :- दादाजी... कितना छोटा छोटा काम करते हैं ये सब लोग..इसमें से कितना कमा लेंगे ये लोग..।  कैलाशनाथ :- बेटा मकान बनाने का काम बहुत मेहनत का काम हैं.. काम काम होता है छोटा बड़ा नहीं होता..।  विनय :- मेहनत.. हम्म्... इसमें कैसी मेहनत.. ईंट पर ईंट रखने में कैसी मेहनत.. ये मजदूर लोग पागल बनाते हैं सबको..।  कैलाशनाथ मुस्कुराए और आगे चल दिए..। थोड़ी देर में वो बगीचे मे पहुंचे..।  बगीचे के बाहर दरवाजे पर गार्ड...

बेरोजगारी

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हमारे देश में रोजगार की कोई कमी नहीं हैं... लेकिन फिर भी सबसे ज्यादा बेरोजगारी हमारे देश में हैं...। आप जानते हैं क्यूँ...?  इसके बहुत से कारण हैं... और सबसे बड़ा कारण जो हमारे देश के युवाओं में हैं वो हैं जल्दी से जल्दी बहुत सारा पैसा कमाना... मेहनत कम.... कमाई ज्यादा...।  हमारे देश के युवाओं में मेहनत का अभाव नहीं हैं... वो मेहनत करना जानते हैं... लेकिन वो इसका इस्तेमाल हमारे समाज... हमारे देश में करने की बजाय... विदेशों में जाकर करना ज्यादा सही समझते हैं... क्यूँ.... क्योंकि वहाँ पैसा ज्यादा मिलता हैं...। हम आज इसलिए ही पिछड़े हुए देशों में आते हैं... क्योंकि हमारे देश का युवा वर्ग किसी और देश को अपना सौ प्रतिशत दे रहा हैं...और जो लोग बाहर नहीं जा पाते हैं... वो यहाँ जल्दी पैसे कमाने के अलग ही नुस्खे आजमाता हैं.... जिसमें से सबसे ऊपर आता हैं सट्टा बाजार....। उसके बाद ड्रग्स की सप्लाई.... जूआ खेलना... और वो हर काम जो गलत और अमानवीय हैं.. .।  वजह क्या.... हमारे यहाँ रोजगार नहीं हैं..!  जी नहीं.... वजह हैं.... कम मेहनत.... ज्यादा मुनाफा...।  इन सब बातों ...

भूखमरी...।

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एक बार अपने परिवार के साथ एक पारिवारिक समारोह में गया हुआ था..। सब तरफ़ चकाचौंध... सुंदर सजावट... स्टेज के चारों ओर फूलों की लड़ियाँ... रंग बिंरगी लाइटें... बड़े बड़े स्पीकर.. उन पर बजता तेज़ संगीत...। लेकिन मेरा ध्यान सीधे एक जगह पर गया..।  जहाँ पर खाने पीने का इंतजाम था... मैने देखा की खाना खाने के बाद एक शख्स ने अपनी थाली में आधे से ज्यादा खाना प्लेट में ही छोड़ दिया था..और उसने वो थाली टैंट के पास ही रख दी थी..। लोगों की अच्छी खासी भीड़ थीं... किसी का भी ध्यान नही था उस पर...। लेकिन मैने देखा... अगले ही पल एक हाथ टैंट के नीचे से आया और उसने बड़ी सफाई से वो थाली... दूसरी  तरफ़ खसका ली..।  मैं समझ नहीं पाया ये सब कैसे और कौन कर रहा हैं...। मैं भाग कर टैंट की दूसरी ओर गया तो देखा... जिस आदमी ने थाली वहाँ छोड़ी थीं वो वहीं खड़ा था..। मैं पूरा माजरा समझने के लिए उनके करीब गया तो देखा.. दो छोटे बच्चे अधमरी हालत में उस खाने को खाने में इतने मशगूल थे की उन्हें मेरे आने का भी आभास नहीं हुआ...। मैंने उस शख्स से पूछा :- ये कौन हैं...?  उस शख्स ने कहा :- बेचारे चार द...

अहमियत...

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आज के चित्र को देखकर दो बातें दिल में उतर गई हैं..।  पहली तो हमारी प्यारी गौरैया... जो विलुप्त होने की कगार पर हैं..। मोबाइल रेडिएशन का सबसे बड़ा भुगतान इन मासूम सी दिखने वाली प्यारी गौरैया को ही करना पड़ा हैं..। हमारे यहाँ के एरिया में तो ये लगभग खत्म ही हो गई हैं..। एक समय था जब सुबह की शुरुआत ही इनकी चीं चीं की आवाज से होतीं थी.. पर आज देखने को भी नहीं मिलती..। सच में ये पक्षी और जानवर हम इंसानों की हर जरूरत को पूरा करने के लिए कितना कुछ करते हैं.. लेकिन हम अपने स्वार्थ में इनको सिर्फ तकलीफ ही देते हैं..।  दूसरी बात जो इस चित्र में दिखाई देतीं हैं... वो हैं एक बुंद पानी की अहमियत..।  ये बात हम नहीं समझ सकते... क्योंकि हमें तो आदत हैं हर चीज़ का अपव्यय करने की..।  पानी की किमत इन मासूम पक्षियों से सीखनी चाहिए... जो एक एक टपकती बुंद से अपनी प्यास बुझा रहें हैं..।  रेगिस्तान में रहने वाले... गाँव में रहने वाले.. कच्ची बस्तियों में रहने वाले... उन सभी लोगों से पुछनी चाहिए जो एक वक्त के पानी के लिए कितनी जद्दोजहद करते हैं..।  लेकिन हम बहुत बार इन सब ब...

मिट्टी की मूरत

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.  सपना :- कुसुम.... जल्दी कर आरती का समय होने वाला हैं..। हमें मंदिर पहुंचना हैं..।  कुसुम :- हां.... मेमसाब बस खीर पैक कर दूं..।  सपना :- तू जल्दी से सब पैक करके बाहर ले आ.. तब तक मैं साहब से कहकर गाड़ी निकलवा देतीं हूँ..।  अर्जुन.....अर्जुन.... कितना टाइम लगाते हैं आप... जल्दी किजिए...। आप जल्दी से गाड़ी निकालिए मैं... कुसुम के साथ सब सामान लेकर आतीं हूँ..।  अर्जुन :- हां.. हां.... बस दो मिनट..।  कुसुम :- मेमसाब... सब पैक कर दिया हैं..। मेमसाब वो मांजी... का समय हो गया हैं... आप बोलो तो उनको दे दूं थोड़ा..।  सपना :- तेरा दिमाग खराब हो गया हैं क्या कुसुम..! माता जी को झूठा भोग लगांएंगे क्या..। एक दिन देर से खाएगी तो मर नहीं जाएगी.. और तुझे ज्यादा खुशामद करने की जरूरत नहीं हैं समझी..। चल जा सामान रखवा..।  कुसुम बिना कुछ बोले गाड़ी में मंदिर में भोग लगाने का सारा सामान रखवाने लगी..।  अर्जुन, कुसुम और सपना सभी शहर के बाहर स्थित दुर्गा मां के मंदिर में भोग लगाने निकल गए..।  आज अष्टमी थी... सपना हर साल अष्टमी और नवमी को माता के मंदि...

आपबीती..

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एक छोटा सा किस्सा सुना रहीं हूँ.... ।  बात आज से कुछ वर्षों पहले की हैं....। मेरी छोटी बेटी कुछ साल भर की थीं...। हम सभी सपरिवार एक शादी के संगीत समारोह में गए हुए थे...।  समारोह एक बहुत ही बड़े हॉल में रखा गया था... बेहद करीबी रिश्ता होने की वजह से हम सभी समय से बहुत पहले पहुँच गए थे...।  संगीत समारोह के बाद ही खाने पीने का प्रोग्राम था..।  शादी एक बहुत ही रहीस पार्टी के घर में थीं....।  मैं अपनी शादी के बाद पहली बार उनके परिवार से मिल रहीं थी..।  हम अपने घर से भी बहुत पहले निकले थे...।  अब हुआ यूँ की घर से निकलकर और वहाँ पहुंचने के दरमियान फिर वहाँ सबसे मिलना जुलना.... संगीत समारोह की शुरुआत.....इन सभी में तकरीबन दो से तीन घंटे बित चुके थे...।  बच्ची छोटी थी और इस दौरान अब वो भूख से बेहाल हो चुकी थी...। हमने अपनी सासु जी को कहा... लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया....। पतिदेव जी और घर के बाकी सभी सदस्य नाच गाने में व्यस्त थे...। बच्ची की भूख बढ़ती गई और उसने रोना शुरू कर दिया...। हमने वहाँ मौजूद घर के सदस्यों से कोई एंकात जगह के बारे में पुछ...

नन्ही गौरैया...।

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विश्व गौरैया दिवस.....  एक समय था जब हम छोटे थे... हर छत पर... हर मुंडेर पर गौरैया का घोंसला होता ही था...। लेकिन आज ये छोटा सा पक्षी विलुप्त होने की कगार पर हैं..। साल 2010 से हर साल  20 मार्च को गौरैया  दिवस मनाया जाता हैं... सिर्फ इसलिए की लोग इस तरफ़ थोड़े जागरूक हो और इस नन्हें से पक्षी को विलुप्त होने से बचाएं...।  हमें कुछ ज्यादा नहीं करना हैं बस .... घरों में एक स्थान ऐसा बनाए जहाँ गौरैया अपना घोंसला बना सकें... कोई झरोखा या मुंडेर...।  घर की छतों पर अनाज के दाने डालें....। मिट्टी के बर्तनों में पानी भरकर रखें...।  आंगन और छतों पर पौधें लगाएं...। हमारी एक छोटी सी पहल से इस पक्षी की प्रजाति फिर से चहक सकतीं हैं...।   मुझे गौरैया बहुत पसंद हैं... और आज उसके विलुप्त होने में हमारा बहुत बड़ा हाथ हैं...। मोबाइल टावर के रेडिएशन से  और बढ़ते प्रदुषण से सबसे ज्यादा खतरा इस पक्षी को ही हुआ हैं..और फिर सुबह सुबह इस पक्षी के चहकने से मेरी कितनी ही सुबह महकी हैं...। एक छोटा सा पक्षी कितना कुछ सिखाता हैं हमें..।उस नन्ही गौरैया के नाम चंद प...

बुरा ना मानो होली हैं.....।

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सेजल.....अरे बेटा... सुन तो ले....।  सेजल:- अरे माँ डोंट वैरी.... मुझे पता हैं आप क्या कहना चाहते हैं..। ज्यादा दूर मत जाना, पके रंग मत लगाना, जल्दी वापस आना.....।  आशा:- और लड़कों से दूर ही रहना..! समझी..।  सेजल:- ओके माँ... बाय... ।  थोड़ी दूरी पर....  सेजल:- पूनम.... पूनम...।  पूनम:- अरे सेजल तु अभी जा रही हैं... मुझे लगा सिर्फ मुझे ही देर हो गई हैं..। स्वाति के घर ही जा रही हैं ना...।  सेजल:- हां यार उसको साथ लेकर फिर सब साथ में होली खेलेंगे... बहुत मजा आएगा... देख मैं ये वाले रंग लेकर आई हूँ.... तु कौन कौन से रंग लाई हैं....!  दोनों सहेलियों आपस में बातें करते हुए सड़क के किनारे से स्वाति के घर की ओर चल रहीं थी.... अभी कुछ कदम ही चलीं होगी की... दो बाईक सवार उनके पास से गुजरे और उन दोनों ने सेजल और पूनम पर रंगों से भरी हुई थैली में से एक एक पैकेट निकाला और उन पर ये कहते हुए डालना शुरू कर दिया:- बुरा ना मानो होली हैं....। फिर हंसते हंसते वहाँ से चले गए...।  ये सब इतना जल्दी हुआ की सेजल और पूनम को कुछ समझ ही नहीं आया...।  ना ह...

किस्मत

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कहते हैं किस्मत का लिखा कोई नहीं मिटा सकता.... चाहे आप कितना ही जोर लगा लो...।  लेकिन कुछ लोग किस्मत से आगे सोचते हैं और उस पर विश्वास नहीं करते हैं... उनका कहना हैं..... मेहनत और अच्छाई से किस्मत का लिखा भी बदला जा सकता हैं...।  हर व्यक्ति का अपना अलग नजरिया होता हैं...।  कई लोग तो ऐसे भी होतें हैं जो किस्मत बदलने के लिए तरह तरह के उपाय खोजते रहते हैं...। कोई गृह नक्षत्रों को बदल कर अपनी किस्मत चमकाता हैं तो कोई जादू टोने की मदद लेता हैं...।  किस्मत बदलने की चाह को लेकर लोग कई बार ऐसे जूर्म भी कर देते हैं.... जिसकी भरपाई करने में उम्र निकल जाती हैं...।  कई लोग सिर्फ अपनी किस्मत आजमाने के लिए ही लाटरी.... सट्टा और जुए का सहारा लेतें हैं...।  लेकिन क्या सच में किस्मत का लिखा बदलता हैं...?  क्या सच में हमारी किस्मत पैदा होते ही लिख दी जाती हैं..?  क्या सच में हमें विधाता का लिखा हुआ ही मिलता हैं...?  ये वो चंद सवाल हैं जिसका जवाब मानव ना जाने कितने वर्षों से खोज रहा हैं...।  हर कोई अपने हिसाब से तर्क वितर्क रखता हैं...।  मैनें...

रोबोट मेरी माँ

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रोबोट एक ऐसी मशीन का निर्माण जो हमारे इशारे पर काम करें..। इंसान के हर काम को सरल और बेहतर तरीके से करने वाली मशीन..। हम इंसानों ने अपनी सहुलियत के लिए रोबोट का निर्माण किया हैं..। मैने मानव निर्मित इस रोबोट को सिर्फ किताबों में पढ़ा हैं और टेलीविजन में देखा हैं...।  मानव निर्मित ये रोबोट एक मशीन की तरह काम करता हैं.... बिना थके... 24 घंटे लगातार... हर तरह का..... तरह तरह का काम...।  लेकिन मेरी जिंदगी में एक ऐसा शख्स था जो रोबोट  से कम नहीं था...।  मेरी माँ.....  किसी रोबोट से कम नहीं थी....। तीस लोगों के परिवार में रहते हुए... सभी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए... हर वक़्त..... हर समय एक के बाद एक काम....।  सवेरे चार - पांच बजे से उठकर..... सभी को उनकी जरूरत के हिसाब से खाना..... नाश्ता...... चाय..... दूध..... सब मुहैया करवाना..।  उसके अलावा घर की साफ सफाई.... कपड़े धोना..... बर्तन मांजना..... बच्चों की देखभाल... घर के बड़ों की संभाल....।  हर काम वक़्त पर...।  सच में वो किसी रोबोट से कम नहीं थी...। शायद ये सब हर माँ करतीं होगी..। ल...

इंसानियत

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हमारा देश भारत एक धर्म निरपेक्ष देश हैं..। यहाँ सभी धर्म के लोग रहते हैं..। हर शहर में.. हर गली में आपको हर तरह के लोग मिल जाएंगे..। हर धर्म के लोग अपने अपने धर्म और मजहब का पालन करते हुए बड़े ही प्यार और भाईचारे के साथ यहाँ रहते हैं..।  हिन्दू, मुस्लिम, सिख , ईसाई..... हम सब हैं भाई भाई..। बचपन ये पंक्ति सुनते आ रहें हैं और यह सत्य भी हैं...। किसान हो  , डाक्टर हो, इंजीनियर हो या कोई भी काम .... आपको हर कार्य में हर धर्म का व्यक्ति मिल जाएगा....।  धर्म और मजहब की बात निकलीं हैं तो एक वाक्या आप सबके समक्ष रखतें हैं....।  बात आज से बहुत सालों पहले की हैं...। हम अपनी चचेरी बहन के साथ उनकी होने वाली शादी की तैयारी के लिए बाजार गए थे खरीदारी करने के लिए....। कुछ जरूरी सामान लेने के बाद..... हम दोनों जूते खरीदने के लिए एक जूते की दुकान पर गए...। लेकिन वहाँ काम करने वाले लोग उस वक्त खाना खा रहे थे...। हमें कुछ देर बैठने को कहा...। हम दोनों वहाँ रखी बैंच पर बैठ गई और लिये हुए सामान का हिसाब किताब करने लगीं...। गर्मी का मौसम था तो मैंने मेरी बहन को पास ही मौजूद गन्ने...

धरती का स्वर्ग

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कहते हैं धरती पर अगर कही स्वर्ग हैं तो वो कश्मीर में हैं..।  कभी देखा तो नहीं पर सुना बहुत कुछ हैं..।  लेकिन हर इंसान का देखने का नजरिया अपना अपना होता हैं..।  किसी के लिए उसका घर स्वर्ग समान होता हैं.. तो कोई मंदिर और मस्जिद को स्वर्ग जैसा मानते हैं..।  पर असल में स्वर्ग होता क्या हैं वो आयद ही किसी ने देखा हो या समझा हो..।  कहा जाता है की इंसान के मरने के बाद उसके कर्मो अनुसार उसे स्वर्ग और नर्क दिया जाता हैं..। लेकिन मरने के बाद ऐसा कौन सा शख्स हैं जिसने बताया की असल में स्वर्ग ऐसा होता हैं..।  सच तो ये हैं की धरती पर अगर कहीं स्वर्ग हैं तो वो आपके भीतर हैं... ऐसी जगह जहाँ आप खुश होते हो... जहाँ आपको सुकून मिलता हो.. जहाँ आपको आनन्द मिलता हो..।  अगर आपको परिवार के साथ बैठने में खुशी मिलती है तो वो ही आपके लिए स्वर्ग हैं..।  अगर आपको किसी की मदद करके सुकून मिलता हैं तो वो भी आपके लिए स्वर्ग ही हैं..।  पुजा पाठ से आनन्द मिलता हैं तो वो आपके लिए स्वर्ग हैं..।  स्वर्ग बनाने के लिए हीरे, मोती, सोना ,चांदी.. की जरूरत नहीं होती...। ऊ...

दीवारों के कान.....

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कहने को ये सिर्फ एक कहावत हैं की दिवारों के भी कान होते हैं..। लेकिन असल में ये बात उन निर्जीव दिवारों के लिए नहीं बल्कि हम सजीव इंसानों के लिए कही गई हैं..।  बहुत से लोगों की ये एक आदत हो चुकी हैं.... दीवार की ओट में छिपकर दूसरे लोगों की बातें सुनना..।  सुनी सुनाई बातों में आकर घर में या फिर घर के बाहर चुगली करना.... लोगों के व्यक्तिगत जीवन में जहर घोलना... रिश्तों में फूट डालना..। बहुत से लोगों का नीजी काम हो चुका हैं..।  वो कहते हैं ना करे कोई भरे कोई....  बात सिर्फ़ ये ही हैं करते हैं इंसान और बदनाम होती हैं दीवारें..।  दीवारें सिर्फ घर की रखवाली करने के लिए... बनाई जाती हैं..।  घर को घर बनाने के लिए के लिए खड़ी की जाती हैं..। ताकि इंसान उस घर में रह सकें सुकून से.... चैन से.....।  लेकिन हम इंसान बाज नहीं आते हैं.... हमारी ये आदत हो चुकी हैं....। मौका ढुंढते हैं एक दूसरे की जिंदगी में जहर घोलना.... एक दूसरे को नीचे गिराना... एक दूसरे की सफलता को देखकर जलना...कोई कुछ अच्छा करें तो उसके भीतर खामियां निकाल कर नीचे धकेलना...कामयाबी की राह में र...

रोटी कपड़ा और मकान....

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हर शख्स इन तीन चीजों के लिए जिंदगी भर जद्दोजहद करता रहता हैं..।  ये कहानी है ऐसे ही एक शख्स अनिल की..।  अनिल.... माँ बाप की इकलौती संतान..। दिखने में बेहद चार्मिंग..। उसके पापा एक बिजनेस मैन थे..। पैसा भी खुब था..। इसलिए उसने कभी कुछ सिरीयस लिया ही नहीं था अपनी जिंदगी में..।  कालेज की पढ़ाई पुरी करके सारा दिन यार दोस्तों के साथ कभी एक शहर तो कभी दूसरे शहर घुमता रहता था..। उसके पिता ने भी कभी उस पर कोई जिम्मेदारी डाली ही नहीं थीं..।  उसकी माँ हालांकि बार बार उसको टोकती रहतीं थीं की कभी तो जिम्मेदारी समझ जा... पर उनकी दाल नही घलती थीं..।  जिंदगी को अपने ही अंदाज में जीता था..। ऐसा कोई शौक नही होगा जो उसका पुरा नहीं हुआ हो..। बचपन से ही जिस चीज़ पर हाथ रख दे या किसी चीज की फरमाइश कर दे.. उसके पिता तुरंत वो पुरी कर देते थे..। गरीबी और पैसे की अहमियत क्या होती हैं वो जानता ही नहीं था..। लेकिन कहते हैं ना वक्त कब क्या करवट बदल ले कोई नहीं जानता....।  एक समय की बात हैं... अनिल अपने दोस्तों के साथ देश के बाहर घुमने गया हुआ था..। उसके पिताजी को बिजनेस में बह...

एक लेखक का सपना

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एक लेखक का सपना होता हैं  की उसके मरने के बाद भी अपनी लिखीं हुई रचनाओं से.... पाठकों के दिलों में जिंदा रहें..।  एक लेखक मर जाता हैं... लेकिन अपने लेख से..... अपनी रचनाओं से.... अपनी कविताओं से... अपने साहित्य से.... हमेशा याद किया जाता हैं...।  एक लेखक हर पल बस ये ही कोशिश करता हैं की  वो अपने लेख से किसी को तकलीफ ना दे... किसी की भावनाओं को आहत ना करे..।  जागते  वक़्त..... सोते वक़्त... खाते वक़्त.... पीते वक्त..... परिवार के साथ हो या दोस्तों के साथ.... हर क्षण वो एक सोच अपने भीतर लेकर चलता हैं....। क्या लिखना हैं.... कैसा लिखना हैं.... कौनसी बात सही रहेगी... कौनसी गलत...।  एक लेखक की जिंदगी कोई आसान नहीं रहतीं... वो अपने काम को हर पल शत प्रतिशत देने की भरपूर कोशिश करता हैं...।  सिर्फ इसलिए की उसके प्रशंसक.....उसके पाठक....उसके चाहने वालों की उम्मीदों पर वो खड़ा उतरे..।  आसान शब्दों में कहूँ तो ये ही लेखक का सपना होता हैं...।  हर काम अपने आप में महत्व रखता हैं... कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता... । जैसे हर कोई हर काम नहीं कर स...

अन्नदाता.....

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एक परिवार का अन्नदाता होता हैं.... घर का मुखिया जो परिवार के सभी लोगों को अन्न मुहैया करवाने के लिए दिन रात मेहनत करता हैं...।  एक समाज का अन्नदाता होता हैं एक किसान....।  अगर वो अन्न भोएगा ही नहीं तो हमारी पुर्ति कैसे हो पाएगी...।  और इस पुरे संसार का अन्नदाता अगर कोई हैं तो वो हैं... ईश्वर...।  उसके बिना किसी भी चीज़ का कोई औचित्य ही नहीं हैं..।  इसलिए हमें अपने जीवन में इन तीनों को सम्मान.... आदर और महत्व देना चाहिए..।  एक परिवार का भरणपोषण करने वाला पिता या जो भी व्यक्ति आजीविका करता हैं वो... परिवार के लिए बहुत परिश्रम करता हैं... कभी उनका अपमान नहीं करना चाहिए..।  एक किसान....दिन रात मेहनत करता है ताकि हमारे घरों में अनाज की कोई कमी ना हो...। हमारे देश के विकास में किसान बहुत ही सहायक शख्स होता हैं.... इसलिए उनके परिश्रम को हमेशा महत्व देना चाहिए..।  और इन पुरे संसार को.... अगर कोई चला रहा हैं तो वो हैं.... भगवान....ईश्वर....अल्लाह.... खुदा.... इसलिए हर पल अन्न ग्रहण करते वक्त उनका शुक्रिया जरूर अदा करना चाहिए... की उन्होंने आपको ये ...