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एक पल

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       समय का महत्व हर किसी के लिए अलग अलग हो सकता है।इसी समय का सबसे छोटा हिस्सा है "पल"।कहने सुनने और करने अथवा महत्व देने में अधिकांशतः हम लापरवाही में ,भ्रमवश भले ही एक पल को अधिक भाव नहीं देते,परंतु हम सबको कभी न कभी इस एक पल के प्रति अगंभीरता, लापरवाही अथवा अनजानी भूल की भारी कीमत चुकानी पड़ जाती है। बहुत बिर मात्र एक पल के साथ कुछ ऐसा हो जाता है कि उसका विस्मरण असंभव सा होता है। वह अच्छा और खुशी देने वाला भी हो सकता है और टीस देता रहता ग़म भी।      उदाहरण के लिए एक पल की देरी से ट्रेन छूट जाती है, एक पल की लापरवाही या मानवीय भूल बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती है, धावक विजयी हो जाता है और नहीं भी होता। एक पल में लिए निर्णय से जीवन की दशा और दिशा बदल जाता ।बहुत बार एक पल के आगे या पीछे के निर्णय अविस्मरणीय खुशी या ग़म तक दे जाते हैं। एक पल में ही दो अनजान शख्स जीवन के अटूट बंधन में बंधकर पति पत्नी बन जीवन भर निभाते जिंदगी गुजार देते हैं। एक पल में ही रिश्ते बनते भर ही नहीं हैं बहुत बार बिखर भी जाते है। सबसे अहम तो यह है कि जीवन की ड़ोर भी तो एक मात्र ...

समय तो आयेगा ही

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       कहते हैं समय कभी ठहरता नहीं है,बस चलता रहता है।इसी पर मैंने कभी लिखा था कि -"समय समय के साथ यूँ भी चला जायेगा, समय ठहर कर भला क्या पायेगा?"      जीवन और समय का तारतम्य कुछ ऐसा है कि जन्म के उपरांत हम सब भले ही जन्मोत्सव / जन्मदिन मनाने में हर्ष का अनुभव करते हों, उल्लास मनाते हों ,परंतु वास्तविक तथ्य तो यह है कि हमनें अपनी जिंदगी के उतने दिन बिता लिए। हर पल हम अपने ही अंत की ओर गतिशील हैं यानी समय तो आएगा ही जब हम अपने जीवन के अंत समय का दीदार कर इस संसार को अलविदा कह देंगें,न चाहते हुए भी कहना ही पड़ेगा अर्थात समय आयेगा और हमें इस संसार के बंधनों से मुक्त करा ही देगा।       इसी तरह सुख, दुख, यश, अपयश, जन्म मृत्यु सभी कुछ समय के इशारों पर नाचने को विवश हैं। कहावत भी है कि घूर के दिन भी फिरते हैं। कुछ भी स्थाई नहीं है। मान, सम्मान ,पद, प्रतिष्ठा ,अमीरी, गरीबी सब कुछ समय के फेर में है। बस केवल समय समय की बात है। कठिन और दुष्कर समय भी समय की प्रतीक्षा करते करते आखिर समय मिलन के साथ चले ही जाते हैं। समय को रोकना ईश्वर के वश में भी नहीं...

संकल्प जरूरी है

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जब हम आप सब जिम्मेदार नागरिक हैं, तो जिम्मेदार बनकर भी दिखाइए अपने नागरिक कर्तव्य भी तो निभाइए। जल, जंगल, जमीन  संरक्षित कीजिए, ऊर्जा संरक्षण कीजिए, बिजली चोरी न कीजिए, कुँए, तालाब, नदी,नालों  झील,झरनों पर अतिक्रमण न कीजिए। एक पेड़ काटने से पहले  दस लगाइये भी। धरती माँ को न खोखला कीजिए। जंगलों का विनाश रोकिए कंक्रीट के जंगलों का अब जाल न फैलाइए। गंदगी और प्रदूषण न फैलाइए रास्तों, नालियों ,गलियों, सड़कों को  न ही अवरुद्ध कीजिए। सरकारी सम्पत्तियों का कभी न दुरुपयोग कीजिए, न चोरी ही कीजिए, सरकारी सुविधाओं का सौदा भी न कीजिए, जिसे वास्तव में जरूरत हो उसे ही पाने दीजिए सरकारी सुविधा दिलाने के लिए दलाली कभी मत कीजिए। नारियों का उत्पीड़न न कीजिए नारियों पर होते अनाचार,  अत्याचार ,दुर्व्यवहार देख न ही मुंह मोड़िये। जात पात भाषा क्षेत्र धर्म के नाम पर न जहर घोलिए, समाज में वैमनस्यता के न बीज रोपिए, नफरतों की आग न जलाइए, राजनीति की आड़ में भाई से भाई को न लड़ाइए, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई में न भेद कराइए , समाज में समरसता सद्भाव जगाइए एक दूसरे के भी काम आइए एकता भाईचारा की मिसा...

पथिक

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पथ कैसा भी हो कठिन हो या सरल हो चलना आसान नहीं होता है, फिर भी चलना ही होता है आगे बढ़ना ही होता है, सावधान भी रहना ही पड़ता है। आसान पथ समझ लापरवाह नहीं हो सकते, मुश्किलों भरा पथ हो तो भी डरकर रुक नहीं सकते। जीवनपथ हो या यात्रा पथ हरहाल में चलना ही पड़ता है, पथिक हैं हम सब  पथिक को पथ तो निरंतर तय करना ही पड़ता है आगे बढ़ना ही पड़ता है। ◆ सुधीर श्रीवास्तव       गोण्डा, उ.प्र.     

मेरा हीरा

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■■■■■  आज वर्षों बाद मेरी बेटी मुस्कराई थी।उसकी मुस्कराहट देख मैं अपना दर्द भूल गया।        पिछले वर्ष से जबसे मैंनें बीमारी से चारपाई पकड़ी  है,मेरी बेटी सीमा ने बहुत हिम्मत  से सब कुछ बहुत अच्छे से सँभाला है।मेरी बीमारी से जहाँ आय का कोई रास्ता न बचा था,तब सीमा ने पढाई के साथ साथ टयूशन भी शुरु कर दिया था। अपनी माँ को घर पर ही सिलाई का काम शुरु कराया ,हालांकि सिलाई से घर का खर्च नहीं निकलता था,फिर भी कुछ आय तो हो ही जाती थी।दूसरे उसकी माँ भी व्यस्तता के कारण उलझनों से कुछ न कुछ बची ही रहती थी।         बेटी की हिम्मत और अथक मेहनत से शायद भगवान को हम सब पर दया आ गई।सीमा को स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर नौकरी मिल गयी।ये ईश्वर की ही कृपा थी कि बिना किसी सिफारिश या रिश्वत के उसे ये अवसर मिला।         आज जब वो ट्यूशन से लौटी तो मेरे गले लगकर रो पड़ी ,अचानक उसके इस तरह के रूदन से मैं किसी अनहोनी की आशंका से काँप गया,उसकी माँ बेटी के आँसू देख पागल सी हो उठी।    मैनें उसके सिर पर हाथ फेरा और रोने का कारण पूछा तो ...