ए पिता ! तुम खुदा से बडे हो।
मैं हारा ही कंहा हूं तुम हारने कब देते हो मेरी हार और जीत के दरमियां तुम खडे हो......! ए पिता ! तुम खुदा से बडे हो।। बचपन से लेकर अब तक हर बार संभाला है तुमने, जब मैं गिरा, बहका, भटका हर बार उठाया है तुमने। मेरे सपनों की खातिर तेरे नयनों ने रैना जागी, मेरे सही गलत संघर्षों में तुम ही तो प्रतिभागी। हर कठिन परिस्थिति में ढाल बन तुम अडे हो......! ए पिता ! तुम खुदा से बडे हो।। जब भी मैं गिरने को हुआ तुमने अपनी उंगली पकडा दी, तेरे हाथ रहे सदा मेरे सर पर जब किसीने मुश्किल बरसा दी। जब लगा कभी मैं छोटा हूं कांधों पे बैठा कर बड़ा किया। इस सांसारिक महाभारत में, खुद गिर कर मुझको खडा किया। मेरी खुशियों की खातिर तुम हर बार जंग लडे हो...! ए पिता ! तुम खुदा से बडे हो।। आज तुम हमारे बीच नहींं एहसास तेरा फिर भी रहता, हर कठिन परिस्थिति में तेरा ही चेहरा है दिखता। उम्मीद की भी उम्मीद हो तुम विश्वास का भी विश्वास तुम्ही, मेरे मन में हर लम्हा रहते मेरी हरेक श्वास की आस तुम्ही। मुझसे तेरा रिश्ता ऐसा जैसे तुम अंनता से जुडे हों, ए पिता ! तुम खुदा से बडे हो।। अंनत, विशा...