मेरे पापा
बेटियां सदैव अपने पिता की दुलारी होती हैं।मेरी जिंदगी में पिता का स्थान मां से ज्यादा था।मुझे लगता मां भाई को ज्यादा प्यार करती है,लेकिन एक मां बनने के बाद ये अहसास हुआ की माता पिता अपने सभी बच्चों को समान ही प्यार करते हैं,लेकिन हम इस भावना को समझ नहीं पाते। पापा से जुड़ी बहुत सी यादें हैं ,जो उनके जिक्र के साथ अनायास ही जेहन में उभर आती हैं। पापा मम्मी के झगड़े का कारण मैं होती थी,मां काम करने कहती, मैं किताबे लिए बैठी रहती,अभी मुझे पढ़ना है ,ऐसा कहती, पापा भी मेरा ही पक्ष लेते। मां गुस्सा होती ,क्या बेटी के घर भी जाकर काम करोगे ,जो इसको कुछ करने नहीं देते। पापा हंसते और कहते _और क्या? एक बार की तो बात है ,मेरे इम्तहान चल रहे थे ,उस समय मैं कक्षा 2 में पढ़ती थी,मां को किसी काम से गांव जाना पड़ा ,जाना जरूरी था ,और पापा ,मैं ही घर में थे। ,भाई भी मां के साथ गया था। पापा ने ऑफिस से छुट्टी ले ली,वो खाना बनाते ,मुझे तैयार करके स्कूल भेजते ,मुझे मां की कमी खलने नही दी। इम्तहान का अंतिम दिन था ,स्कूल का फरमान था , कि सभी बच्चे कुछ न कुछ घर से बनवा कर लाएं,उसपर भी नं...