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मैं कवियत्री हूँ

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मैं कवियत्री हूँ श्रृंगार सजाती हूँ 🌹🌹🌹🌹 सभी रस भाव छंद बंध लिखती हूँ प्रेम के सभी अनुबंध लिखती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ श्रृंगार सजाती हूँ 🌹 मै ही ओज हास्य विभत्स और रस सार लिखती हूँ विश्व व्यापक सर्वोच्च अभिसार लिखती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ अंलकार सजाती हूँ 🌹 मण्डन खण्डन अभिनन्दन में ही रचती हूँ कृष्णा माधव केशव सा चितरंजन रचती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ शिवात्व सजाती हूँ 🌹 दैवित् निमित्त उद्धत  ब्रह्मत्व  बुनती हूँ आकाश निमित्त प्राणो के श्वास बुनती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ संसार  सजाती हूँ 🌹 कोमल समता रमता में ही होती हूँ प्राणो से भी प्रिय प्रिया ममता होती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ मातृत्व सजाती हूँ 🌹 रोली अक्षत दीप मोती ज्योती सी जलती हूँ . बागो की ठण्डी छाव हूँ पलको में सोती  हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ अर्चन सजाती हूँ 🌹 लक्ष्मी दुर्गा काली चन्डी शिव को लिखती हूँ  मन के भीगे अहसासो को सत्य मेव लिखती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ सौन्दर्य सजाती हूँ 🌹  ईद दीवाली होली कभी  गुरुवाणी सी खिलती हूँ भावो के भीने पोखर में पंकज कभी जलज सी खिलती हूँ हाँ म...