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Showing posts with the label Sangita Singh

अवसाद

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शोहरत की चकाचौंध रातों रात काजल स्टार बन गई,मायानगरी में उसकी किस्मत पहली फिल्म के हिट होते ही बुलंदी को छूने लगी। कैमरा ,लाइट ,विज्ञापन कंपनियों,फिल्म प्रोड्यूसरों की लाइन उसके घर तक लगने लगी ।हर कोई उसके साथ काम करने को लालायित था। छोटे शहर इंदौर की मिस इंदौर काजल का सपना था ,बॉलीवुड ।अंदर से स्याह बॉलीवुड की दुनिया युवाओं का सपना होती है । काजल एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती थी ,उसे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कोई रोक टोंक नहीं थी।आखिर मिस इंदौर के बाद उसने मायानगरी का रुख किया। और किस्मत ने साथ दिया ,बड़े डायरेक्टर को अपनी नई फिल्म के लिए  नए चेहरे की तलाश थी ,काजल ने इंटरव्यू दिया और वो चुन ली गई। फिल्म ने  थिएटर में  रिलीज होते ही ,पहले दिन ही रिकॉर्ड तोड कमाई की। पैसे ,शोहरत की अब कमी नहीं थी ,धीरे धीरे सफलता सर चढ़ कर बोलने लगी,ड्रग्स,और गलत संगति ने काजल को अंधेरे गर्त की ओर धकेल दिया। रात भर पार्टी ,और सुबह दिन चढ़े तक सोना ।जिससे निर्माता ,निर्देशक कन्नी काटने लगे।काम की कमी से कर्ज का बोझ बढ़ने लगा। दोस्त दूर होते गए,लेनदारों की धमकियां , गाली ...

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

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           कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है ,जैसे चींटी दीवार पर चढ़ती है गिरती है ,फिर भी नई उम्मीद साहस से लक्ष्य की ओर बढ़ती है। पैर न हो सपने और इरादे  हों एवरेस्ट फतह करने को तो यह सुन कर ही असंभव लगता है ,क्या ऐसा हो सकता है! अरुणिमा सिन्हा एक ऐसी लड़की जिसके साथ नियति ने भद्दा मजाक किया था ,उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया था  ,रात भर तड़पती रही और फिर अचेत हो गई ,चूहे उसके पैरों को नोचते रहे। जब होश में आई तो उसका एक पैर कट चुका था ,एक पैर में रॉड पड़ी थी ,वो दैनिक क्रिया तक करने में अक्षम थी ,एक समय की बॉलीबॉल खिलाड़ी को सहानुभूति चुभती थी ,शारीरिक अक्षमता उसके हौसलों को पस्त नहीं कर सकी। उसने इसी हालात में एवरेस्ट फतह करने का सपना देख डाला ,कृत्रिम पैर लगवा पहुंच गई जमशेदपुर एवरेस्ट फतह करने वाली महिला बछेंद्री पाल से मिलने,दुनिया ने तो  उसे मानसिक रूप से बीमार तक कह दिया ,लेकिन बछेंद्री पाल ने अरुणिमा के जज्बे को देख कहा तुमने अपने जज्बे से एवरेस्ट फतह कर लिया अब सिर्फ शरीर से फतह कर दिखाना है। तमाम अड़चने आईं ,...

भूख

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      मालकिन ,आज मां बीमार हैं,काम पर नहीं आयेगी_नन्ही सरला हाथ जोड़ मालकिन से कह रही थी। तुम्हारी मां का तो रोज का बहाना है ,कभी पूरे महीने काम नहीं करती ,कभी तुम्हारी नानी ,कभी दादी बीमार रहती है , रोज रोज के बहाने से मैं तो थक गई हूं ,अब तो मुझे पैसे काटने होंगे_मिसेज नंदा बोली  ,वो यहीं नहीं रुकी उन्होंने नन्ही सरला से कहा , "तुम क्यों खड़ी हो,जाकर बर्तन धुलो"। सरला ने कहा ,पर मालकिन मुझे मां के लिए दवाई लानी है , जितने पैसे बनते हैं एडवांस दे दो न आप? अच्छा!यहां तो पैसे के पेड़ लगे हैं बस आओ और हिला कर पैसे ले जाओ,जल्दी जाकर बर्तन धुलो,फिर रेनो को घुमा कर लाओ उसके बाद देखती हूं क्या करना है _आंख मटकाते मिसेज नंदा ने कहा। नन्ही सरला ने कोई रास्ता न देख घर में प्रवेश किया ,रसोई में रात के जूठे  बर्तन मुंह पसारे इंतजार कर रहे थे कि कब कोई हाथ लगा कर उन्हें साफ करे। लगता है रात को पार्टी हुई थी ,बहुत बर्तन थे।धीरे धीरे कर सरला बेचारी बर्तन धो रही थी ,तभी मिसेज नंदा का बेटा कांच का ग्लास जोर से पटक कर चला गया जिससे वह चटक गया। सरला ने किसी तरह बर्तन धुले...

निशीडाक

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प्रणव  ....... रात के अंधियारे में गूंजती आवाज। प्रणव बाबू की नींद खुली,घड़ी देखी रात के 12.30 बज रहे थे।अभी पहली ही नींद थी ,झुंझलाहट हुई।आवाज फिर से आई ,प्रणव ओ प्रणव । बगल में महुआ अपने बच्चे के साथ बेसुध दो रही थी। हवेली में सुदीपा से झगड़ा हुआ,और वे आज ही  महुआ और अपने बच्चे को लेकर गांव के अपने फार्म हाउस आ गए थे। कल तक दो चार नौकर भी हवेली से उनके पास रहने को आने वाले थे। अमावस की अंधियारी रात थी ,सन्नाटा चरम पर था ,कुत्ते रह रह कर भौंक रहे थे। ऐसे में कौन महिला इतने समय आकर मेरा नाम पुकार रही है। कहीं सुदीपा तो नही।मुझसे गुस्सा थी ,हो सके वही गलती का अहसास कर आई होगी बड़बड़ाते हुए वे उठे और  दरवाजा खोल दिया। सामने देखा तो_ लाल साड़ी पहने,बाल चेहरे पर बिखेरे  एक युवती वहां दरवाजे पर खड़ी थी। तुमि के,.....? कि होलो(तुम कौन हो,और तुम्हे क्या हुआ है)_प्रणव दा ने कहा। वह युवती पीछे मुड़ी ,और बिना बोले रोते सुनसान सड़क पर दौड़ पड़ी। प्रणव दा को लगा शायद वह मदद के लिए आई हो?और कहीं ले जाना चाहती हो। उन्होंने उसका पीछा किया , दाडा, दाडा (रुको)। बहुत दूर सुनसा...

मेरी दुनिया थी तू भाग_5

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     रितु ,सुयश के साथ कार में बैठ गई ।सुयश ने  उसी कॉफी शॉप के सामने कार रोकी। रितु ने जैसे देखा उसका दिमाग गरम हो गया,उसने कहा प्लीज डॉक्टर सुयश अगर आपको यहीं चलना है, तो आप मुझे घर पर ही ड्रॉप कर दीजिए और कॉफी मैं बहुत अच्छा बनाती हूं ,आप मेरे घर पर ही अपनी बात  कह भी सकते हैं। सुयश समझ गए कि इस कॉफी शॉप से शायद रितु की कोई गहरी याद जुड़ी है,उन्होंने कार आगे बढ़ाया और दूसरे कैफे में पहुंचे। बिना लाग लपेटे कॉफी की चुस्की लेते हुए डॉक्टर सुयश ने कहा_रितु मैम,आप ज्यादातर गुमशुम रहती हैं,केवल बच्चों के बीच ही खुश रहती हैं। रितु ने कहा _हां ,मुझे बच्चे पसंद हैं। मैने सुना आपकी एक बेटी थी _,सुयश ने बात को आगे बढ़ाया। जी सही सुना,मेरी एक छोटी बेटी थी ,जो अब इस दुनिया में नहीं है 10 साल हो गए ,उसे मुझसे बिछड़े हुए। आपने दूसरी शादी का नहीं सोचा ,आपको अकेलेपन से डर नहीं लगता _डॉक्टर सुयश ने कहा। कहां है अकेलापन ,रितु हंसी।मुझे तो लगता है 24 घंटे भी कम हैं मेरे लिए,क्लास,और फिर बच्चों के बीच कैसे समय निकल जाता है ,पता ही नहीं चलता। और आप मुझसे जो पूछ रहे हैं,अब ...

मेरी दुनिया थी तू भाग_4

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      रिया ओ रिया _वह चिल्ला रही थी।राधा भी खाना छोड़ दौड़ती हुई कमरे की ओर भागी।दोनों ने हिलाया डुलाया लेकिन कोई हरकत नहीं ।राधा ने कहा _अब रिया बेबी नहीं रही मैडम। रितु बुत बनी हुई थी।राधा ने उसकी खुली आंखों को बंद किया ,और नमित को फोन मिलाया। नमित शहर से दूर ग़ज़ल के साथ पार्टी कर रहा था। बहुत मुश्किल से कई बार फोन करने के बाद उसका फोन उठा तो,राधा ने रोते हुए बताया रिया बेबी अब नहीं रहीं आप आजायिए साहब,मैडम भी गुमशुम हो गई हैं। नमित ने कहा वो  सुबह से पहले  नहीं आ पाएगा ,वैसे तो सभी रस्में सुबह ही होंगी कह कर फोन काट दिया। राधा अवाक रह गई ,उसे आश्चर्य हो रहा था कि क्या बड़े  लोगों में जज्बात भी खत्म हो जाते हैं। मैं रिया की कुछ नहीं थी,लेकिन उसकी भोली मुस्कुराहट,उसका प्यार दिखाना सबकुछ कितना चुम्बकीय था,एक अनजान आदमी भी उस प्यारी बच्ची से प्यार कर बैठता ,और उसके अपने पिता को  उसकी मृत्यु पर भी कोई दुख नहीं। आस पास के लोग ,दूर के रिश्तेदार भी खबर सुन पहुंच गए। सुबह देर से नमित पहुंचा तो सभी रिश्तेदारों ने पूरी तैयारी कर ली थी उसे दफनाने की।आत...

मेरी दुनिया थी तू भाग_3

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       शाम को मानस घर आया,रिया की हालत देख उसे रितु से सहानुभूति हो रही थी । उसने बताया कि नमित ने तुम्हारे बारे में झूठी खबर  फैलाई थी कि, तुम किसी को भी देखकर अपना आपा खो देती हो,हिंसक हो जाती हो।और  ये सब सुना उसने ऑफिस के स्टाफ में अपने लिए सहानुभूति बटोरी हुई है, मैं भी इसी कारण कभी घर नहीं आया _मानस कह रहा था। रितु कुछ न बोली। मानस ने आगे कहा_ नमित ने करीब दो साल पहले पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट का विज्ञापन दिया था ,जिसमें कई लड़कियां इंटरव्यू देने आईं थीं,उसमें गजल नाम की भी लड़की थी ,जो बुद्धि और खूबसूरती में बेमिसाल थी ,उसका चयन हुआ,और उसके बाद  से नमित का झुकाव ग़ज़ल की तरफ होता गया।आज भी नमित उसी के साथ गया है।बिजनेस मीटिंग तो एक बहाना होता है जो महज 2,3 घंटों में खत्म हो जाता है ,और 2,3 दिन ये लोग सैर सपाटा करेंगे। रितु उन बातों को सुन अंदर ही अंदर  हिल गई ,उसके पांव तले से जैसे किसी ने जमीन ही सरका दी हो।उसके बाद मानस ने क्या कहा क्या नहीं ,उसे कुछ सुनाई नहीं दिया। थोड़ी देर बाद मानस ये कहता हुआ उठ खड़ा हुआ , रितु ये बात तुम नमि...

मेरी दुनिया थी तू भाग_2

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         रितु की सारी उम्मीद टूट चुकी थी,अकेली हो गई थी,कोई भी रिश्तेदार कितने दिन आपकी मदद कर सकता है, नमित को अब उसकी और बिटिया की कोई फिक्र ही नहीं थी,व्यवसाय चल निकला था,वह उसी में व्यस्त रहता। रितु कुछ कहती भी,तो जवाब होता तुम पढ़ी लिखी हो,ड्राइव कर सकती हो,पैसा है जाकर रिया को दिखाओ, मैं काम करूं कि, तुम्हारी राम कहानी सुनूं,मेरे पास समय नहीं है। रितु आहत होती ,जाकर भगवान के पास रोती,फिर सारी ऊर्जा इकट्ठी कर , उस मासूम का मुंह देखती और उसकी परवरिश में लग जाती। रिया बड़ी हो रही थी ,लेकिन वह ठीक से न बोल पाती ,न चल पाती और दैनिक क्रिया का भी कोई समय नहीं था ,इसलिए रितु को उसके बस चेहरे के भाव देख कर ही अंदाज लगाना होता था। उसने फिजियोथैरेपिस्ट की सहायता ली।पैर ,हाथ की मालिश करती, उसकी मांसपेशियां कड़ी रहती जिससे उठाने बैठाने में दिक्कत होती।स्पीचथेरेपिस्ट के पास गई लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ । जब रितु थोड़ी देर के लिए रिया को आया के सुपुर्द कर कहीं चली जाती  तो उसके आते ही रिया उसके सीने से चिपक जाती।अगाध प्रेम था मासूम रिया का रितु के लिए । रितु ...

मेरी दुनिया थी तू भाग_1

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      वक्त ,एक बहुत छोटा शब्द ,लेकिन  इसके वृहद मायने,वक्त कभी किसी के लिए रुकता नहीं, न ही पीछे मुड़ने का मौका ही देता है। जो वक्त का दामन पकड़ कर नहीं चलते वे पीछे रह जाते हैं। सब कुछ था उनकी ज़िंदगी में, लेकिन धीरे धीरे करके समय बदलता गया। वो लम्हा जब प्यार था ,पता नहीं प्यार किस आंधी में उड़ गया । परसों उसकी शादी है दूसरी ,25सालों का दम घोटू सफर सालों पहले खत्म हुआ था।लेकिन वो खुश नहीं थी भी और नहीं भी ,बीते दिनों की यादें नश्तर चुभो रही थी। अनमनी सी वो यादों के भंवर में खो गई। कॉलेज का प्यार था नमित,दोनों की खुशनुमा शाम कॉलेज के कैंटीन में गुजरती ।सभी उनके प्यार को देख रश्क करते ,लेकिन उन प्यार के पंक्षियों को किसी की परवाह नहीं थी।वे कॉफी के साथ भविष्य के सपने बुना करते। बी कॉम के बाद दोनों ने कैट (CAT) की परीक्षा दी।दोनों का ही दाखिला आईआईएम बैंगलोर में हुआ। एमबीए की पढ़ाई करते करते उन्हें देशी विदेशी कंपनियों में नौकरी के ऑफर मिलने लगे। रितु और नमित ने फैसला किया था ,अपना खुद का व्यवसाय करने की, लेकिन बिना पूंजी के  कारोबार सोचना ही असम्भव था। इस...

विधवा पुनर्विवाह

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आज  जब हम  इतिहास के पन्ने पलटते हैं तो पाते हैं कि पहले के समाज में कई कुरीतियां व्याप्त थीं ,बाल विवाह,सती प्रथा, पर्दा प्रथा ,सारे कायदे कानून महिलाओं को घर की देहरी में रखने को बने थे। स्त्रियों की स्थिति बद से बदतर थी ,उन्हें अनपढ़ ही रखा जाता था और बचपन में ही उनका विवाह  किसी प्रौढ़ या उम्र में 10,12 साल बड़े व्यक्ति से कर दिया जाता था । बीमारी ,बड़ी उम्र के कारण पति की मृत्यु जब हो जाती थी तो उनकी विधवाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध सती होने के लिए विवश किया जाता।इस सामाजिक कुरीति को हटाने का कार्य राजा राम मोहन राय ने किया उन्होंने इस प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई , समाज को जागरुक करने के लिए हिंदी ,बंगला ,और अंग्रेजी में पुस्तक लिख कर बंटवाई ,उनके सतत प्रयास का नतीजा हुआ कि 4 दिसंबर 1829 को इस प्रथा को रोकने के विलियम बेंटिक की अगुआई में कानून बना। सती प्रथा तो किसी तरह रुकी,शिक्षा के कारण लोगों की सोच बदली ,परंतु आज भी कही कहीं कुछ छिट पुट घटनाएं सुनाई दे ही जाती हैं,इसमें सबसे चर्चित कैस था रूपकुंवर का । सती प्रथा रूक तो गई परंतु सफेद कपड़े में लिपटी इन रंगह...

विवाह या लिव इन रिलेशन

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हमारे यहां हर एक रीति रिवाज एक संस्कार की श्रेणी में आते हैं,हिंदू धर्म में जन्म से मृत्यु तक 16 संस्कार माने गए हैं।जिसमें विवाह को बहुत पवित्र माना गया है । कहते हैं जोड़ियां स्वर्ग से बन कर आती हैं,सात वचन से अग्नि के सामने वर वधू आजीवन एक दूसरे का साथ निभाने का वचन देते हैं,और इस कारण दोनों एक दूसरे की कमियों को स्वीकार कर दांपत्य के अपने कर्तव्य का पालन कर अन्य दायित्यो का निर्वहन करने में गुरेज नहीं करते  आज जमाना बदल गया है,सामाजिक मूल्य खत्म हो चुके ,घरों को जोड़ने वाली दादी,नानी,अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। चाचा चाची, ताऊ, ताई वाला संयुक्त परिवार अब टुकड़े टुकड़े में बंट संवेदनहीन हो चुका,अब आंगन में मां,दादी के बाल नहीं झाड़ती,चाचा चाची के पास बच्चे मां से डांट के बाद बच्चों को अपने आंचल में नहीं छुपाते। अब बच्चे आया ,और शहरी बच्चों को संभालने वाली तथाकथित नैनी के पास पलते हैं।माता पिता  का पैसों के पीछे दौड़,सामाजिक दिखावा,और तनाव से आपस में लड़ना ,चीखना चिल्लाना ,बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव छोड़ रहा है ,जिसका परिणाम उनकी शादी जैसे पवित्र बं...

पोस्टर बॉय

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डॉक्टर प्लीज मेरे बेटे को बचा लीजिए,_ गिड़गिड़ाते हुए ये शब्द  एक बेबस पिता के ये शब्द थे। पर हम जो कर सकते थे हमने किया, अब तो सब ईश्वर के हाथ है।आप सिर्फ प्रार्थना कर सकते हो_कह कर डॉक्टर कमरे से निकल गए। बेटे की आंखें देख पिता का कलेजा दहल उठता,जैसे वो कह रहा हो ,पिता जी किसी भी तरह मुझे बचा लीजिए ,मैं और जीना चाहता हूं,दुनिया देखना चाहता हूं। इंसान पूरा जीवन पैसे के पीछे भागता रहता है,विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ईश्वर को भी चुनौती दे दी है ,लेकिन एक जगह आ कर सभी बेबस हो जाते हैं वो है मौत। सुर साम्राज्ञी लता जी ने कहा था ,तीन चीज़ों पर अपना बस नही है,वो सब ईश्वर के हाथों में है_ 1)हम जन्म कहां लेंगे इसे इंसान कहां जान पाया है,किस मां के भ्रूण में उसका भरण पोषण होगा। 2)विवाह  3)मृत्यु वह किशोर जिसकी उम्र 14 साल की थी,उसका वजन घटते घटते सिर्फ 30 किलोग्राम रह गया था।मधुमेह के कारण वह लड़का धीरे धीरे कोमा की ओर बढ़ रहा था,बाप बेटे की बैचेनी बढ़ रही थी।पिता दौड़े दौड़े डॉक्टर के पास पहुंचे _डॉक्टर कोई तो दवा होगी? मैं अपने बच्चे को बचाने के लिए कहीं भी जाने और कुछ भी करने...

मुसाफिर हूं यारों

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यात्रा ईशा योग केंद्र , कोयंबटूर एक ऐसे संत जो सोशल मीडिया,पर काफी सक्रिय और चर्चित रहते  हैं,।ऊर्जावान  ,सामाजिक कार्यों में अग्रणी(कावेरी बचाओ अभियान ) ,कभी मोटरसाइकिल पर रेस लगाते हुए,तो कभी माउंटेन ट्रैकिंग करते दिखते हैं,और जब साधना या वक्तव्य देते हैं ,तो चेहरे पर दैवीय चमक ।बहुत सुना था सदगुरु के बारे में जिन्हें लोग जग्गी वासुदेव के नाम से भी जानते हैं। सदगुरु से मिलने की इच्छा मुझे ईशा योग केंद्र खींच रही थी | हैदराबाद से कोयंबटूर  40 km की दूरी पर  स्थित है। और कोयंबटूर से लगभग 30_ 35 किलोमीटर अंदर सदगुरु द्वारा स्थापित ईशा योग केंद्र है। कोयंबटूर   से  हमने टैक्सी ली ,ओर  कोयंबटूर  की भीड़ वाली सड़को से गुजरते सुपारी और नारियल के वृक्षों को निहारते हम पश्चिम की  ओर  बढ़ते है, जहां  से दक्षिण   भारत का ग्रामीण  इलाका शुरू होता है तभी हमें  वैलयांगिरी   की पहाड़ियां  दिखाई देती है चारो ओर ख़ामोशी ही खामोशी । आख़िरकार टैक्सी में तमिल गानो और प्रकृति का लुफ्त उठाते हम अपनी मंज़िल पहुँच...

मृत्यु भोज

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जगन,हरिया,सुधा ,पूनम देख तेरे बापू को क्या हो गया। हाय री मेरी किस्मत,मुझे अकेला छोड़ गए_जोर जोर से कमला चिल्ला रही थी ।आसपास  गांव के लोग जमा हो गए,लड़के बहू दौड़े दौड़े आ गए। कमला अपना सर जोर जोर से जग्गू के सीने में पटक रही थी। गांव के लोग सलाह मशविरा करने लगे ,हरिया के कोई और भी सगे संबंधी हों तो उन्हें खबर कर दी जाए। महिलाएं बैठ कर कमला को दिलासा देने लगीं,अरे बहना मौत पर किसका जोर चला है ,बहुत दिनों से बिस्तर पर थे ,बेचारे झेल रहे थे ,अच्छा ही हुआ भगवान ने मुक्ति दे दी। जगदीश काफी दिनों से बीमार चल रहा था।आखिर आज उसने अंतिम सांस ले ही ली। कोई सगा संबंधी बाहर था  नहीं इसलिए ,क्रिया कर्म का इंतजाम शुरू हो गया।बड़े बेटे  जगन ने मुखाग्नि दी । हिंदू धर्म में मुखाग्नि देने वाले को घर के  बाहर ही सोना होता है। कमला ,जगदीश की दूसरी पत्नी थी।पहली पत्नी एक बच्चे को जन्म देकर मर गई थी।नन्ही जान की देख भाल के लिए गांव वालों के जोर देने पर उसने कमला से दूसरी शादी कर ली। समय बीत रहा था ,सबकुछ ठीक से चल रहा था,इस बीच कमला दो बच्चे की मां बन गई थी,लेकिन पहली पत्नी के ब...

कोरोना योद्धाओं का आह्वान

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   सुन भैया ,सुन बहना      हमारा है ये कहना। कोरोना को भगाना है तो,घर में रहें सुरक्षित रहें।बेवजह घूमने फिरने पर लगाम लगाए,जरूरी हो तभी बाहर निकलें।भीड़भाड़ वाली जगहों से जाने से बचें।शादी,पार्टी, जिम, मॉल जैसी भीड़ भाड़ में कहीं कोरोना रूपी राक्षस आपका इंतजार तो नहीं कर रहा ,इसलिए सतर्क रहें। आपस की गलबहियां वाली दोस्ती से बेहतर है की दूर से नमस्कार करें ,2 गज की दूरी और मास्क है जरूरी। बाहर से आकर अपने हाथ साबुन से अवश्य धोएं। बुखार तीन दिन से ज्यादा हो तो डॉक्टर को दिखाएं ,और पृथकवास करें। टीकाकरण अवश्य कराएं ,शत प्रतिशत टीकाकरण होने से कोरोना जैसी महामारी के चेन को तोड़ने में हम सफल हो सकते हैं।

सोने की चिड़िया

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       सुन सोने की चिड़िया है ,जरा अपना व्यवहार सही से रख_शांति अपने बेटे राहुल को डांटती हुई बोलीं। पर मां मुझे उसके पास जाने में ही अच्छा नहीं लगता उसको देखते मेरे तन बदन में आग लग जाती है_राहुल ने गुस्से से हाथ मलते हुए कहा। समझदारी से काम ले बेटा,मुझे भी तो सभी रिश्तेदार ताने देते हैं कि कहां से उठा लाई काली कलूटी बहु,लेकिन दुधारू गाय,और सोने की चिड़िया के हर नाज़ नखरे सहने पड़ते हैं। राहुल कुछ बोला नहीं ,और अपने कमरे में चला गया,सुधा कमरे में लैपटॉप पर अपना काम कर रही थी,राहुल को देख मुस्कुराई और लैपटॉप बंद कर सोने के लिए बिस्तर पर आ गई। राहुल अपना तकिया और चादर उठा ,सोफे पर जाकर लेट गया। सुधा आहत हो गई ,उसके  स्वाभिमान को जैसे किसी ने पैरों तले रौंद दिया हो,लेकिन ये रोज का ही नियम हो गया था।आज उससे रहा नहीं गया ,वह बिस्तर से उठी और राहुल के समीप जाकर खड़ी हो गई ।उसने राहुल से कहा _तुम आज मेरी बात का जवाब दोगे? राहुल चादर में मुंह ढंके ढके ही बोला मुझे नींद आ रही ,सुबह बात होगी। घायल शेरनी की तरह सुधा गुर्राती हुईं,बिस्तर पर लेट गई,उसकी आंखों से नीं...

डायन और जादुई आईना

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       मंगल की पत्नी की प्रसव के बाद ही मौत हो गई थी,रिश्तेदारों और गांव के शुभचिंतकों ने सलाह दी कि दुधमुहें बच्चे को एक मां की जरूरत है ,तुम्हें दूसरी शादी कर लेनी चाहिए। लखन एक गरीब किसान था,घर में बेटी जवान हो चुकी थी ,लेकिन ब्याह के लिए पैसे नहीं थे। किसी ने बताया कि दूसरे गांव में मंगल नाम के व्यक्ति की जोरू एक दुधमुहे बच्चे को छोड़ चल बसी है ,तुम चाहो तो अपनी बेटी के लिए उससे बात कर लो। उसे भी बच्चे की देखभाल के लिए मां की जरूरत है ,तुम्हारी बेटी का घर भी बस जाएगा ,और मंगल खाता कमाता और खुश दिल इंसान है तुम्हारी बेटी का ध्यान भी रखेगा। यह बात लखन को पसंद आ गई।उसने निश्चय किया कि वह मंगल से मिलने उसके गांव जाएगा। मंगल के घर पहुंच कर उसने देखा आस पड़ोस की महिलाएं एक नन्ही सी बच्ची की देखभाल कर रही थीं। बिन मां की बच्ची को देख उसका दिल भर आया। उसने मंगल से अपनी बेटी की शादी की बात की,मंगल से पहले वो पुरनिया चाची ही कहने लगी ,_अरे भैया मंगल अब हां कह दो,सोचो मत।बच्ची की देखभाल अकेले तुम्हारे बस की बात नहीं,हम भी हमेशा तो नहीं देख सकती बच्ची को।फूल सी बिटिय...

शहीद दिवस

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   बापू,जिन्हें भारतीय राष्ट्रपिता के नाम से पुकारते हैं,30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या नाथूराम गोडसे ने कर दी थी ,तब से लेकर आज तक उनकी शहादत को देश नम आंखों से याद करता है और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने हेतु  30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में पोरबंदर के कुलीन परिवार में हुआ था।गांधी जी ने अपनी वकालत की पढ़ाई खत्म कर जब दक्षिण अफ्रीका में अपनी प्रैक्टिस शुरू की ,तो उन्हें रंगभेद की बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा।भारत समेत दक्षिण अफ्रीका में भी अंगेजों का शासन था , वे अश्वेतों के साथ बुरा व्यवहार करते थे। गांधी जी ने इसका विरोध किया ,उन्होंने ओज पूर्ण लेख लिखना शुरू किया ,लोगों को जागृत करने के लिए समाचार पत्रों का सहारा लिया। लोग जागरूक होने लगे। भारत लौट कर गांधीजी ने चंपारण में किसानों के लिए  आंदोलन में भाग लिया। उस समय क्रांतिकारी विचारधारा भी जोरों पर थी ,गांधी जी ने सत्य और अहिंसा को अपना मार्ग चुना। उन्होंने देश में स्वराज्य ,असहयोग आंदोलन,खेड़ा आंदोलन ,और बहुत सारे अन्य आंदोलन में अ...

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव में बच्चे

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पीहू,पीहू क्या कर रही हो बेटा? बुआ आई हैं।रचना ने आवाज लगाई। दो तीन बार आवाज देने के बाद भी पीहू नहीं आई तो रचना पीहू के कमरे में गई ,पीहू किसी से वीडियो कॉल कर बात कर रही थी,रचना को देखते ही उसने फोन बंद कर दिया । रचना बहुत बार अमित से पीहू की शिकायत कर चुकी थी । ऑनलाइन क्लास के समय वह किसी से चैटिंग करती रहती।इंस्टाग्राम में भी अपना मुंह आड़ा तिरछा बना फोटो भेजती। आखिर उम्र ही क्या थी महज 12 साल की, पीहू का बड़ों की तरह बातें करना ,रचना को अच्छा नहीं लगता । जब रचना पीहू की सोशल मीडिया के प्रति दीवानगी की अमित से शिकायत करती तो ,पीहू पापा की अच्छी बच्ची बन जाती और अमित उसी का पक्ष लेता। आज रचना को पीहू की हरकत नागवार लगी ,उसने पीहू से फोन छीन लिया और जाकर ननद के पास बैठ गई।  फोन लेते ही पीहू जोर जोर से चीखने लगी लगी और जोर से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। दो घंटे बाद जब उसकी ननद गई तो रचना ने सोचा ,अब उसे फोन दे दूं।वह कमरे का दरवाजा खटखटाने लगी ,अंदर से कोई आवाज नहीं आई ,करीब आधा घंटे बीत गए ,दरवाजा नहीं खुला तब रचना ने पड़ोसियों को बुलाया ,और अमित को ऑफिस में फोन किया। दरव...

बिरजू महाराज

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बिरजू महाराज _कुछ अनछुए पहलू मैं न मानूंगी तोरी बरजोरी...,जाने दे मैयका,सुनो सजनवा..., जैसी बंदिशों पर कभी तबले पर थाप देते ,तो कभी सुर साधते और कभी घुंघरूओं संग ताल मिलाते। कत्थक जिसका मजहब था , छंद जिसका ईमान ,रविवार रात उस छंद के पुलिंदे बिखर गए,ताल और लय का रिश्ता टूट गया,एक गहरी खामोशी के साथ थिरकते पैर सदा के लिए खामोश हो गए ।कला जगत गमगीन हो गया अपने इस अनमोल रत्न बिरजू महाराज को खो कर। हर कोई इस बहुप्रतिभा के धनी व्यक्तित्व  की असामयिक मृत्यु से स्तब्ध है,अपने परिवार और शिष्यों के साथ खेलते खेलते आपने 83 साल की उम्र में अंतिम श्वास ली। आप किसी परिचय के मोहताज तो नहीं लेकिन लोगों को आपकी प्रतिभा ,अनछुए पहलू से परिचय कराना मेरे लिए आपके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। आपका जन्म 4 फरवरी 1938 में  लखनऊ के कालिका बिंदादीन घराने में हुआ था। आपके नामकरण को लेकर भी बड़ी दिलचस्प बातें कही जाती है ,कहा गया कि जिस दिन अस्पताल में आपने जन्म लिया उस दिन उस वार्ड में  सभी लड़कियों का ही  जन्म हुआ था इसीलिए सबने कहा बृज का मोहन आया है  ,और आपका नाम बृजमोहन मिश्र हो...