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Showing posts with the label रितु शर्मा

दुख और खुशी

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ये वो एहसास है जिसका कोई नाम नही।  देश दुनिया के साथ इस को कौई काम नही। रिश्ता तो बस उस खुदा से है,  और किसी से तो सरोकार नही। मागते है तो हम अपने खुदा से, हम किसी के यहा मोहताज नही। वो ही आएगा मुझे दर्द ओ गम से बचाने के लिए।  किसी और का अब मुझ को इन्तजार नही।  जानता है वो मेरी आदत को, मेरी हालत से बो अनजान नही। सच तो यह है की भरी दुनिया मे, उसके सिवाय किसी की पहचान नही। रितु शर्मा

ये कैसी दिल पर मोहर लगी

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कैसी दिल पर मोहर लगी। मुझे तु ही दिखाई देता है । चाहे कुछ भी कर लु मै अब। बस तु ही दिखाई देता है।   ये कैसी दिल ,,, मेरे दिल की धड़कन कहती है । अब दुर नही मुझे रहना है। मै तुम से महोब्बत करती हु । सारी दुनिया से ये कहना है । ये कैसी दिल,,, अब तु ही मेरी धड़कन हो। अब तुम ही मेरी चाहत हो । मै तुम से महोब्बत करती हु । अब तेरे बिन नही रहना है। ये कैसी दिल,,, रितु शर्मा

झुठा प्यार रहने दो ।

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ये झुठा प्यार, ये वादे । ये  तकरार रहने दो। युही खुश हु मुझे तुम मेरे । इस हाल रहने दो । दिया है जख्म जो तुम ने । कभी भुला ना पाऊँगी।  दर्द मंजुर है मुझ को । ये झुठा प्यार जाने  दो । तुम क्यु कहते हो ये मुझ से। के तुम बिन जी नही सकता । अकेली छोड़ दो मुझ को । के ये एहसान रहने दो । बेवफा बोल कर मुझ को । तुम क्यु मुझ को बुलाते हो । अकेली छोड़ दो मुझ को । के ये इल्जाम रहने दो । मतलबी लोग है सारे । साथ कोई नही देता । मुझे तुम छोड़ दो तन्हा।  मुझे गुमनाम रहने दो । लगाऐ है गुना मुझ पर । के मै वफा नही करती । मुझे तुम छोड़ दो तन्हा।  के ये इल्जाम रहने दो । रितु शर्मा 

एक औरत

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कुछ करने नही देती ये दुनिया मुझे डराती है।  तु औरत है हर दम एहसास दिलाती है।। तुम घर से जाओगी  तो घर को कौन सम्भालेगा। तु कुछ कर  नही सकती  ये एहसास दिलाती है।। माँ के घर जाती हु , माँ मुझको गले लगाती है । वापिस कब जाओगी भाभी ये सवाल उठाती है।। मुझसे कह देती है, तु सब कुछ ले जा अपना। तेरी आदत है तु सामान भुल जाती है।। वो भुल जाते है कि मै भी एक नारी हु । दुर्गा बन जाऊं तो सब दुष्टो पर भारी हु।। फिर क्यु मुझको सब, हर पल यु सताते है। तु सिर्फ एक औरत है मुझको एहसास दिलाते है एक माँ का रिश्ता है जो सब से सच्चा है। एक वो माँ है जो अपना दर्द आंचल में छुपा जाती है।                     रितु शर्मा

हे राम मेरे

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हे राम मेरे,हे राम तेरे बिन ना होते काम मेरे। तु बिगाडी बनाता है मेरी तुम ने ही हरे सब कष्ट मेरे।। मै मोह माया मे फसी हुई ना तेरा नाम ध्याती हु। तुम ने दे करके शारण मुझे, है सारे कष्ट निवारे मेरे।। मुझे तुझपे भरोसा है रघुवर ,इस लिए मै नाम धयाती हु। तु हर संकट हर लेता है, तु दुर है करता कष्ट मेरे ।। मुझको एक तेरा सहारा है, बेगाना ये जग सारा है। जब जब भी मन मेरा डोला ,तुमने ही सवारे काम मेरे।। कौई की मुसीबत आती है, पहले तुझसे टकराती है। मेरी रक्षा करता है हर दम, मुझ पर है बहुत एहसान तेरे।। हे राम मुझ पर दिया करो,मोह माया से मुझे दुर करो।  एक तेरी शारण मे आने से कट जाएगे सब कष्ट मेरे।। मेरे तन मन मे तेरा वास रहे, तु हर दम मेरे पास रहे।  मै तुझको पूजती हु रघुवर,ऐसे ही निकले प्रान मेरे। । सब रिश्ते छोड़कर जाते है कहा हर दम साथ निभाते है।  पर तुम ना छोड़ना साथ मेरा, रहना हर पल तु साथ मेरे। । कौई गलती हो जाए तो , मन मे दुभीदा आ जाए यो। तुम मार्ग दर्शक बन जाना, सही कर देना सब कर्म मेरे।।        🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺         ...

मेरे भाई

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लड़ते  है अगर मुझ से तो, वो परवाह भी करते है। वो भाई है मेरे जो  बेपनाह प्यार भी करते है।। जो कहती हु जो करती हु, उसे उल्टा ही करते है।  मगर रोने नही देते मेरी परवाह करते है।। साथ देता है वो मेरा करु कोई भी शैतानी।  मगर जब डांट पढती है, आगे मुझ को ही करते है।। वैसे बो मेरी किसी बात की परवाह नही करते। मगर जब गुस्सा हो जाउ ,मिनते हजार करते है ।। वो अपनी दुआओ मे भी मुझको याद करते है। वो मेरे भाई है जो मुझसे बेपनाह प्यार करते है। लड़ते है अगर मुझ से********।      रितु शर्मा

नशा

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तु साथ मेरे रहना  ,मै बहकती बहुत हु। होता है नशा तेरा तो मै महकती बहुत हु।। कोशिश करती हु मै के चुप चाप सी रहु।  पर क्या करु नशे मे मुस्कराती बहुत हु। ना पूछना तु मुझ से मेरे दिल की दास्तान।  मै नशे मे होती हु तो बात छुपाती बहुत हु।। खुश रहती हु मै यु तो हस्ती भी बहुत हु। जब नशे मे होती हु तो खिल खिलाती बहुत हु।। इस दिल मे तबाही का एक रंज भरा है। लोग कहते है मै दर्द को छुपाती बहुत हु।। एक गम भरा नगमा है ।एक दर्द की महफ़िल।  लोग कहते है मै नशे मे गाती बहुत हु।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐                रितु शर्मा

निगाहों की शरारत

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इन आखो मे शरारत का सलीका देखो।  जान  ले जाने का अनोखा तरीका  देखो।। हम तो मर जाएगे आखो की इस इनायत पर । कत्ल करने का एक और तरीका देखो। । बार आखो ने किया सम्भला नही ये दिल मेरा। उनकी  आखो का सरेआम ये हुनर देखो। कत्ल सरेआम कर रहे हो तुम।कहा से सिखा ये हुनर देखो। जान जाएगी इन निगाहो से।हो रही है ये बेसब्र देखो लोग कहते है हुस्न बालो का , ये तरीका है दिल चुराने का। तोड कर रख दिया है दिल मेरा,करती सरेआम है कत्ल देखो  छीन कर ले गया मेरी सासे, हो गया सब से बेखबर देखो। बन्द होती है जब तेरी आखे। मै हो जाती हु बेसब्र देखो।। इन  आखो  मे  शरारत  का  सलीका  देखो । जान  ले  जाने  का  एक और तरीका देखो ।। 💐 रितु शर्मा

मै नही घबराऊँगी।

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💐ॐ गणेशाय नमः💐 अब कुछ भी हो जाऐ मै नही घबराऊँगी। गिर कर उठुगी फिर से, मै नही शरमाऊँगी। । कल था तेरा आज है मेरा जीत कर दिखलाऊँगी।  हौंसले के साथ पंख खोल कर दिखलाऊँगी।। बहुत रह ली पिंजरे मे , अब नही रह पाऊँगी। खुले आसमान मे मै उड़ान भर कर दिखलाऊँगी ।। घर मे कैद करली बहुत, मै आज की नारी हु। करेगा जो जुल्म कोई, मै नही  सह पाऊँगी।। कर दिया है मुश्किल सब ने  नारी का जिना यहा। बदलुगी इस सोच को मै जित कर दिखलाऊँगी।। नारी माँ है नारी बहन है नारी से संसार है । फिर क्यु देनी पड़ती पल _पल नारी को ही जान है ।। नारी नही तो कुछ ना होगा, नारी का सम्मान करो । जन्म दिआ है जिसने तुमको उसका ना अपमान करो।। जब जब नारी पर जुर्म हुआ है तब तब परले आई है । नारी के सम्मान को लेकर कितनी गाथाऐ आई है। सब कुछ तुम को मिल जाएगा बस मन मे ये ठान लवो । अपनी माँ के चरनो मे बस एक बार प्रणाम करो।। 💐💐💐💐💐💐💐💐👍💐💐💐💐💐💐💐💐                       रितु शर्मा

अकेलापन

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कितने अजीब से इस दुनिया के मेले है । हर तरफ है महफ़िल पर दिल अकेले है।। जिधर देखती हु ,खुशी ही खुशी है। पर बिन तुम्हारे हम कितने अकेले है।। लगी रोनके है ,महोब्बत के मेले है । ना जाने किऊ तेरे बिन हम अकेले है।। कही खाब है कही तन्हाई ओ के रेले है। ना जाने किऊ तेरे बिन हम अकेले है।। ना बिछडने के गम ओर ना मिलने के झमेले है। ना जाने किऊ तेरे बिन हम अकेले है। । जे भी खुब है तेरी आदत छोड़ने की। तेरे साथ तन्हा , तेरे बिन भी अकेले है ।। कितने अजीब से************।

ए‌ तेरी आंखें

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इन आखो मे सिमट जाती है बाते मेरी।  बहुत गुमनाम सी लगती है ये तेरीआँखे  ।। बहुत सी बाते है जो हम से कहना चाहती है। मगर खामोश सी रहती है ये तेरी आँखे ।। देख ती हु तेरी आखो मे तो डुब जाती हु। समुन्दर से भी कही गहरी है ये तेरी आँखे।। शहर दुनिया तो क्या मै खुद को भुल जाती हु। जाने क्या मुझसे ये कहती है तेरी आँखे।। नींद आती नही है मुझको अब तो रातो को। बहुत बेचैन  सी करती है ये तेरी आँखे।। जाने क्या राज है इनमे जो चमक है इतनी।  मेरी धड़कन ही रोक जाती है तेरी आँखे।। नही बस्ती कोई सुरत अब इन निगाहो मे। तेरी आखो को पसन्द करती है मेरी आँखे। 💐 रीतू शर्मा