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आज अगर रावण मौजूद होता

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आज अगर रावण मौजूद होता  देख आज की बुराई वो भी रोता  वो कहता आज के बुरे लोगों से तो मैं अच्छा था इतनी बुराई तो  मैंने भी ना रचाई  इतने बुरे कर्म तो मैंने भी नहीं किया  इच्छा विरूद्ध सीता को मेरी नजरें भी ना छुए  अहंकारी था दूजी ना थीं  मुझमें बुराई  ऐसी बुराई तो मैंने नहीं फैलाई  अंहकार की राह से हुआ मेरा विनाश  ज्ञानी था राम से बढ़कर बलशाली था पर मैं अहंकारी था इसलिए हुईं मेरी हार और बुराई ना थीं  आज के मानव सा तो ना मेरा व्यवहार  आज के मानव अहंकारी जाने किस नशें में चूर  मैंने तो सीता को नहीं किया मजबूर आज के मानव से तो सुरक्षित नहीं कोई सीता  आज सीता को बचाने राम भी तो नहीं आतें । नाम :- जयश्री पाण्डेय " नैन्सी" पता :- बिहार छपरा

बेटी तू मेरा लाज रखना

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एक पिता अपने पुत्री को विवाह के समय क्या समझाते हैं  मैं अपनी कविता के जरिए यहां प्रस्तुत कर रहीं हूॅं। बेटी तू मेरा लाज रखना  जाकर अपने ससुराल में  पिता का सिर ना झुकाना  करके मुझ पे अभिमान  बेटी ये दुनिया की रीति है  करना सबका सम्मान  छोटे हो या बड़े हों  देना सबको स्नेह   ना करना कभी भी  मुझमें अभिमान  तेरा एक पिता वहां  पर भी हैं जो तुझसे  उम्मीद लगा बैठा हैं  मेरी बहु आएगी  और मेरे घर को  अपना घर बनाएंगी  मुझे अपना पिता बनाएंगी  अपने सांसू को अपनी माॅं बनाएंगी  कब मेरी बहु आएगी  इस घर को मंदिर बनाएंगी बेटी मेरा लाज रखना  जाकर तू अपने ससुराल में  जयश्री पाण्डेय 🙏