बेटी तू मेरा लाज रखना

एक पिता अपने पुत्री को विवाह के समय क्या समझाते हैं 

मैं अपनी कविता के जरिए यहां प्रस्तुत कर रहीं हूॅं।

बेटी तू मेरा लाज रखना 
जाकर अपने ससुराल में 

पिता का सिर ना झुकाना 
करके मुझ पे अभिमान 

बेटी ये दुनिया की रीति है 
करना सबका सम्मान 

छोटे हो या बड़े हों 
देना सबको स्नेह 

 ना करना कभी भी 
मुझमें अभिमान 

तेरा एक पिता वहां 
पर भी हैं जो तुझसे 

उम्मीद लगा बैठा हैं 
मेरी बहु आएगी 

और मेरे घर को 
अपना घर बनाएंगी 

मुझे अपना पिता बनाएंगी 
अपने सांसू को अपनी माॅं बनाएंगी 

कब मेरी बहु आएगी 
इस घर को मंदिर बनाएंगी

बेटी मेरा लाज रखना 
जाकर तू अपने ससुराल में 

जयश्री पाण्डेय 🙏

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