पुनर्विवाह - भाग २८
रविश नाश्ता करने के बाद सरला जी से .. रविश - मां मैं क्लिनीक जा रहा हूं । शाम को जल्दी घर आऊंगा । स्वाति आप और शिवांश तैयार रहना शाम को मैं आपको मंदिर ले जाऊंगा । आता हूं ...कहकर रविश क्लिनीक चलें जाते हैं । रविश के जाते ही नेहा हंसते हुए सरला जी से कहती हैं - मां भैया भी ना ...उनको तो भाभी को मूवी दिखाने और डिनर पर ले जाना चाहिए । लेकिन वो भाभी को मंदिर ले जा रहे हैं ...।कह कर हंसती हुई नेहा अपने कालेज के लिए निकल जाती है और सब घर वाले भी नाश्ता कर के अपने - अपने काम में चले जाते हैं पीहू और स्वाति नाश्ते के बर्तन समेट कर किचन में ले जा रही होती है । तभी सरला जी स्वाति को रोक कर कहती हैं ...। सरला जी - स्वाति इधर आओ बेटा , मेरे पास बैठो । स्वाति सरला जी के पास जाकर बैठ जाती हैं । सरला जी - स्वाति , बेटा तुम नेहा की बात सुनकर परेशान मत होना । वो क्या है कि ना ...स्वाति सरला जी की बात बीच में काटकर कहती हैं । स्वाति - मां , आप परेशान मत होइए । मुझे नेहा की बात का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा और ना ही मैं परेशान हूं । दरअसल मैंने ही उन्हें कहा था , मंदि...