पुनर्विवाह - प्यार की एक नयी शुरूआत भाग - १९

पीहू फूल लाये हुए लोगों से फूलों  की टोकरी चुपचाप लेकर रविश के कमरे में छुपा देती हैं और  पीहू , स्वाति और रानी को लेकर  पालर्र चली जाती हैं । रात 8 बजे जहाँ  सब घर वाले महाराजा पैलेस आ जाते हैं । मेहमानों का आना अभी  शुरू ही हुआ है । 
सरोज जी  - कहाँ हैं ये तीनों , अभी तक नहीं आईं हैं ।अब तो मेहमानों का आना भी  शुरू हो गया है । प्रशांत जरा फोन तो करो पीहू को , कब से गई हैं  ये लड़कियां । सरोज जी परेशान होते हुए  प्रशांत से कह रही थी ।
प्रशांत - जी मां  मैं अभी पूछता हूं । 
रविश - प्रशांत  तुम रुको मैं  रानी को फोन कर के पूछता हूं । रविश,  रानी को फोन करते हैं  । उधर रानी और  पीहू तैयार होकर स्वाति को देखते हैं  । जो हल्के पीच कलर के जोड़े में बहुत सुंदर लग रही हैं । अपने लंबे बालों की चोटी बनवाई हैं । और  उसमें जूही के फूलों का गजरा लगा हैं।  जो स्वाति के  दोनों  कंधो पर आये हुये है । साथ में  मांग टीका और  मैचिंग के गहने हैं । जिसमें स्वाति और  भी सुंदर दिख रही थी । जब उसके सर पर कढ़ाईदार दुप्पटा ओढ़ाया जाता है । स्वाति को देखकर  रानी सीटी बजाने लगती हैं । 
रानी - भाभी आज तो भैया की शक्ल देखनी पड़ेगी । उनका मुंह खुला का खुला ना रह जाये तो कहना । तीनों  तैयार होकर निकल ही रहे होते हैं कि रानी के फोन रविश का काल आता है । काल देखकर रानी काल पिक करती है ।
रानी - हां भैया , हम लोग  बस निकल ही रहे हैं । कुछ देर में  पहुँच जायेंगे  । 
रविश - तुम लोग अभी तक नहीं निकले हो । मां कब से परेशान हो रही  हैं । जल्दी आओ ! 
रानी - जी भैया । 
रानी और पीहू  , स्वाति को लेकर जल्दी मैरिज हाल पहुंचते हैं । मैरिज हाल पहुंचकर रानी,  पीहू के कान में  कुछ कहती हैं और  फोन कर के हाल के बाहर किसी को बुलाती हैं । रविश वहीं गार्डन एरिया में  खड़े होकर किसी रिश्तेदार से बात कर रहे हैं । लेकिन उनका ध्यान बाहर गेट की ओर रहता हैं।  
कुछ ही देर में उन्हें सामने से रानी आती हुई दिखाई दी । सामने रानी को देखकर रविश की आंखों में चमक आ  गई । लेकिन ये चमक कुछ देर की ही थी । क्योंकि रविश  , स्वाति को देखने के लिए उतावले हुए जा रहे थे । लेकिन रानी , पीहू और  रानी  के कुछ दोस्तों के कारण स्वाति को देख नहीं  पा रहे  थे।  जैसे ही रविश स्वाति को देखने की कोशिश करते , रानी सामने आ जाती।  रानी के दायें और बायें उसकी सहेलियां चल रही थी । और  पीहू स्वाति के साथ उनके पीछे चल रही थी।  

क्रमशः 

रचनाकार - श्व़ेता सोनी

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