अग्निवीर (सैनिक वही जो माने देश सर्वोपरि)भाग- ३
विक्रम एवं उनके साथियों का चरित्र चित्रण - "विक्रम, प्रशांत , करण, जय, रवि और अमन यह सारे लड़के एक ही गाँव के थे और साथ साथ ही सैनिक में जाने की तैयारी कर रहे थे। इनका स्कूल से लेकर कॉलेज तक का सफर साथ में ही बिता। गाँव से दूर शहर में भी रूम लेकर यह एक साथ रहते थे और पढाई करते थें। यही कारण था की इनलोगो में गहरी मित्रता थी। इन सभी दोस्तों में करण ही ग्रुप का लीडर था, जो की बहुत ही गुस्सेल् और लडाई करने वाला था इसलिए सभी इसे ग्रुप का लीडर कहते थे। विक्रम और प्रशांत ये दोनों भी लडाई झगड़े में पीछे नहीं रहते थे लेकिन करण के तुलना में ये करण से पीछे थे, क्योंकि करण की कोई सीमा नहीं थी लडाई में वह न जाने कितनों का खून तक बहा चुका था! लेकिन विक्रम और प्रशांत कभी किसी का खून नहीं बहायें थे बस यही फर्क था ,करण और इन दोनों में "। "अब बारी है जय और रवि की इन्हें लडाई झगड़ों से कोई मतलब नहीं रहता था। ये दोनों मजाकिया किस्म के लोग थे। इन्हें हँसी मजाक करना,इक दूसरे को किसी लड़की का नाम लेकर चीढाना बस इन्हीं सब चीजों से मतलब था। रही बात अमन की तो वह अपने नाम की भाँति ही शां...