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Showing posts with the label क्षणिका

बुद्ध पूर्णिमा

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  बुद्ध पूर्णिमा का दिन बौद्ध धर्म के लोगों के अलावा हिन्दू धर्म के लोगों के लिए भी बहुत मायने रखता है।  भगवान गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु जी का नौवा रूप माना जाता है।  बुद्ध पूर्णिमा चारों ओर प्रकाश लाता है, इस दिन ज्योतिमय  पथ का आविष्कार हुआ था।  जग में बुद्ध वाणी को फैलाया, बुद्ध वाणी को संगीतमय बना कर जन जन तक पहुचाया।  इस दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, और ज्ञान की प्राप्ति भी, इस लिए बुद्ध पूर्णिमा खास है।  गौतम बुद्ध एक भाव थे, अपनी ही कैद से भाग गए खुले आसमान के नीचे रहने लगे और  वहाँ से उन्होंने ज्ञान,  विचार, एहसास, अनुभव सब प्राप्त किया और लोगों तक पहुचाया भी।  सबसे महान कार्य बुद्ध ने किया ज्ञान के शब्दों से पुरे संसार को भीगो दिया था।

विश्व पक्षी प्रवासी दिवस

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संसार में पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियां हैं ।  सब अपनी  अपनी आवश्यकताओं को पुरा करने के लिए मीलों मीलों तक जाती है।  दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इनका आना जाना लगा रहता है।  फिर एक निश्चित समय के बाद ये अपने मूल आवास पे आ जाती है,  प्रवास का समय ५ से ६ महीने तक का होता है, प्रवास स्थल की दूरी १०० मील से लेकर हजारों मीलों तक हो सकती है।  प्रवासी पक्षी तलाबो के किनारे, चरागाहों , परती भूभि मे सैकड़ों मीलों की यात्रा के बाद उतरते थे, जहाँ सब शुद्ध जल, वायु, वनस्पतियाँ  इनका स्वागत करते थे,  अब न तो चरागाह है न परती भूमिया , सब कुछ छिन्न गया है उनका, इसलिए अब प्रवासी पक्षिया कम दिखती है।  पक्षी यात्रा के दौरान थकने, प्यास लगने, या भोजन की कमी के कारण  मर जाते हैं।  हम मनुष्यों को इनकी मदद करनी चाहिए, इसलिए आवासों की संरक्षण की आवश्यकता को समझते हुए विश्व प्रवासी दिवस मनाया जाता है।  पक्षियों की रक्षा करो, पलास्टिक, प्रदुषण को दूर करो।।

"छुट्टी की सुबह"

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छुट्टी की सुबह तो है -: कामकाजियों के लिए है एक तोहफा। घरवालियों के लिए सुख औ व्यस्तता का है संगम। बच्चों के लिए तो है खेल औ पार्टी का दिन।  सेवानिवृत्तियों के लिए तो है सब दिन है एकसमान।  घुमक्कड़ियों के लिए है लेकर आयी सैर-सपाटा का संसार।।       रचनाकार-           सुषमा श्रीवास्तव               मौलिक रचना               सर्वाधिकार सुरक्षित 

क्यों

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क्यों तेरी आंखे भावशून्य हैं  क्यों लबो पर ये खामोशी छाई है  आंसूओं से लिख भेजी तहरीर  क्यों तेरे दिल तक नहीं पहुंच पाई हैं   दस्तक दे रही दिल के दरवाजे पर क्यों तुमको नहीं सुनाई दे रही हैं क्यों इतना इम्तहान ले रही जिंदगी  दर कदम दर फासला बढ़ा रही हैं करू कोशिश जितनी पास आने की तेरी बेरुखी तुझे मुझसे दूर ले जा रही हैं नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

शह और मात

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                  इंसान बुरी लतो को  शह   दे जाता है।  और वो बुरी लतें इंसानियत को  मात  है।। फरेबी जगत का ये मायाजाल है। करता जो इनको अनदेखा, उनका हाल बेहाल है।।    ।। शह और मात की बस यही बिसात है।।

दास्तान

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तू दिल मे समाया ऐसे की दास्तान बन गई, तेरी मेरी कहानी फसानों मे छप गई।। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

सपनों के घर

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बाहर तपती धूप है... शीतल बयार मिलती है तो बस... मेरे सपनों के घर में ... बाहर दो आंसू भी विचलित कर देते है.... सागर की लहरें भी सुकून देती है... मेरे सपनों के घर में... बाहर तो बारिश की बूंदें भी.... ज़हर का असर करती है... तूफ़ाँ भी झूला सा लगता है... मेरे सपनों के घर में...

मुस्कान

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मुस्कान मुख पर हमेशा  अच्छी लगती है  मुस्कान से हर मुश्किल  आसान हो जाती है  मुस्कान होती है चहरे  पर चहरा बहुत अच्छा  लगता है चहरा खिला खिला  रहता है

प्रतिक्षा

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जाने किस प्रतीक्षा में है खामोश आँखें वक़्त रोके कब रुका है कोई कितना भी चाहे किस गम में गुमसुम है खामोश आँखें उठो,देखो द्वार पर ख़ुशियाँ खड़ी हैं फैलाये बाँहें बढ़ाकर कदम रोक लो उसे जाने न  पाये...                   नेहा शर्मा

दोस्त

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ना चाहत है सितारों की, ना चाहत है नज़ारों की, आप जैसा दोस्त मिल जाए, तो क्या जरूरत है हजारों की। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

पागल मन

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क्यों हृदय में रुदन अभी है बाकी प्रतीक्षा में कटी  सुबह शाम रात्रि नव भोर का प्रहर फिर जगा रहा आशा आंखों से अभी भी बहती अश्रुधारा द्वार पर टकटकी लगाए नयन , हर आहट पर  बढ़ जाती धड़कन कोई नहीं आने वाला समझ नहीं पाता  ये मेरा पागल मन रेनु सिंह

सरस्वती मैया

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सरस्वती मां आपकीं भक्ति करू  निशदिन तुम्हारा में ध्यान धरु ध्यान धरु में मां सरस्वती तेरी भक्ति करू भक्ति करू भक्ति करू  तुम्हारी ही मां में निशदिन में साधना करू साधन करू मां सरस्वती तू ही सांसो की सरगम  में सरगम में संगीत भरनेवाली  मन के मंदिर में ज्ञान दीपक जलाने वाली तुम ही माता विद्या  की देवी तुम ही हो मां ज्ञान की देवी ज्ञान की देवी ज्ञान की देवी

हाले दिल

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हाले दिल लिखकर भेजा फिर क्यों समझ ना पाएं  सब जान समझ कर भी अनजान बन कर दिखाएं  देखा झांक कर तेरी आँखों की गहराई में तो पाया  चाहता है तू भी उतना ही जितना मैंने तुझे चाहा  नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

चलो इस बार कुछ नया करते है!!

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चलो इस बार कुछ नया करते है!! इस बार दीवाली की सफ़ाई के साथ-2 मन की सफ़ाई भी करते है!! घर के जाले तो सबने साफ कर ही लिये होंगे चलो अब मन में लगे जाले साफ करते है!! एकता श्रीवास्तव✍️

हुस्न

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हुस्न का सदियों से यही दस्तूर रहा है  सौंदर्य के अहंकार में चकनाचूर रहा है  इश्क तो करता रहा है हुस्न की भरपूर बंदगी  मगर उनकी मेहरबानियों से सदा दूर रहा है  हरिशंकर गोयल "हरि"

क्या हुआ अगर

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क्या हुआ अगर तू मुझे पसंद नहीं करता  क्या हुआ अगर तू मेरे संग नहीं चलता  तेरे होने का अहसास मेरी सांसों में बसता हैं  तू ही तो है जिसे दिल हर दम याद करता है जरूरी नहीं मै तुम्हे चाहूं तू भी मुझे चाहें  जरूरी नहीं मै तेरे नखरे उठाऊ तू भी मेरे उठाएं  लाजिमी है तेरे दिल को कोई और भाता है  मेरी नजरों के सामने से तेरा चेहरा ना जाता है कसक सी हैं इस दिल में तेरा दिल ना जीत सके   टीस उठती हैं जिस्म में हाले दिल ना बता सके नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

भविष्य

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  है भविष्य विशाल, फिर क्यों इतने सवाल,  चल रहा संभल के फिर भी है ठोकरों का जाल,  गिर भी जाऊँ तो ये मन न मचाए बवाल,  सहारे के सहारे उठा भी तो ये है नियति की चाल,  फिर भी खुशी से फैल रहा  दर्द ये फिलहाल,  करू मेहनत आखिर पसिने  का रंग भी है लाल,  ना हार मान उठ ,मन मे ला भुचाल,  कुछ न कर सका मत ले इसका मलाल,  तु सोच मत कि क्या होगा तेरा हाल, बिखर कर जो निखरता है वही तो होता है बेमिसालl

जिन्दगी के पन्ने

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पलट कर देखे जब जिंदगी के पन्ने तो नज़र ये आया दबे पाँव ख़ुशियाँ खिड़की के रास्ते से आती है और दरवाजे को खोल चुपके से निकल जाती है....

सुदामा बनूं

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चाहा नहीं कभी मीरा बनूं राधा बनूं  तुझ संग प्रीत की डोर मैं बांधू  एक ही तमन्ना थी तू श्याम बने मैं  तेरा प्रिय सखा सुदामा बनूं अपने सारे दुःख दर्द तुझ से कहूं  कुछ तू बिन कहे समझ लेना  मन में छाएं घने अंधकार को बांसुरी     की मधुर धुन से हर लेना ।। नेहा धामा " विजेता " बागपत ,उत्तर प्रदेश

ग़मों के अंधकार

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गमों के गहरे अंधकार से निकलने  को जिसे प्रकाश समझ लिया  खींचे चले गए जिसकी रोशनी में   उसी ने हाथ जला दिया अपने अक्ष को ही अक्सर देख डर जाते हैं आइने में खुद से नजरें नहीं मिला पाते हैं तेरी रुसवाई पर दिन रात इतना रोएं अब तो आंखों के आसूं भी सूख गए  कोई तमन्ना दिल में बाकी ना रही  इतना मायूस किया तूने ऐ जिन्दगी  तेरी हसरत अब इस दिल में नहीं  तुझसे तो मौत की बाहें ही सही ।। नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश