क्या हुआ अगर


क्या हुआ अगर तू मुझे पसंद नहीं करता 
क्या हुआ अगर तू मेरे संग नहीं चलता 
तेरे होने का अहसास मेरी सांसों में बसता हैं 
तू ही तो है जिसे दिल हर दम याद करता है
जरूरी नहीं मै तुम्हे चाहूं तू भी मुझे चाहें 
जरूरी नहीं मै तेरे नखरे उठाऊ तू भी मेरे उठाएं 
लाजिमी है तेरे दिल को कोई और भाता है 
मेरी नजरों के सामने से तेरा चेहरा ना जाता है
कसक सी हैं इस दिल में तेरा दिल ना जीत सके 
 टीस उठती हैं जिस्म में हाले दिल ना बता सके

नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

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