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कागज और पत्थर

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🌹जरूर लिखता होगा भगवान कागज़ और पत्थर का भी नसीब... मगर यह भी जरूरी नहीं है कि एक पत्थर ठोकर खाऐ... और भगवान बन जाऐ... और कोई कागज़ रद्दी में जाऐ... और दूसरा गीता बन जाऐ...!

अहसास अकेलेपन की भाग ३

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मुझे याद आ रहा था कि बचपन में मैं एक बार एक  रंगीन मछली🐠 लेकर आया था, और मैने उसे एक जार में पानी डाल कर उसमें रख दिया था|फिर मैंने उसे खाने के लिए कुछ दिया, पर वो अनमनी सी घूमती रही, और उसने कुछ भी नहीं खाया|थोड़ी देर बाद में मैंने देखा वो पानी की सतह पर जाकर बैठ गई|अगले दिन मैंने देखा कि वो मछली🐠 पानी में उल्टी पडी़ हुई है|उस दिन के बाद मैं कभी भी मछली नहीं लेकर आया|मुझे यह किसी ने भी नहीं बताया था कि वो अकेले थी तो इसलिये मर गयी, अगर इसके साथ और भी मछलियाँ  होती तो वो बेचारी छोटी सी मछली न मरती| फिर मैंने सोचा! कि इस संसार में आदमी हो या या पेड़🌳 पौधे🌱 कोई भी अकेले नहीं रह सकते हैं। हर एक को साथ की जरूरत होती है| हमें भी अपने आसपास देखना चाहिए कि अगर कोई भी अकेला हो तो उसे साथ देकर उसे मुर्झाने से बचाएं, और अगर हम भी अकेले हैं तो किसी के साथ वक्त गुजारें और अपने को मुर्झाने से बचाऐं|क्योंकि अकेलापन संसार की सबसे बड़ी सजा है।  गमले को तो गमले के पास खींच कर किया जा सकता है, लेकिन इसांनो को चाहिए, कि वो अपने रिश्ते को सहेज कर रखें और उन्हें समेट कर रखें| अगर ...

अहसास अकेलेपन की भाग २

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वो  मुस्कुराते हुए बोली...हाँ! अगर पौधे🎋 अकेले हो तो सूख जातें हैं, और अगर इन्हें भी दूसरे पौधे🌿 के पास कर दें, तो ये दूसरे पौधे🎋 का साथ पा कर फिर से हरे हो जातें हैं, और लहलहा उठेगें "क्योंकि ये भी अकेलापन महसूस करते हैं| मीरा बोल रही थी...और मैं सुन रहा था... कि क्या सच में पौधे🎋 अकेले में सूख जातें हैं? मै वैसे पहली बार ऐसा सुन रहा था|फिर मैं सोच रहा था कि सच में पौधे को पौधे का साथ चाहिए होता है?  मीरा ने गमला खिसका कर दूसरे गमले के साथ कर दिया था,, और वो बहुत खुश हो गई थी|मैं उस गमले को देखते हुए, किसी सोच में डूब गया| एक एक करके पुरानी तस्वीरें मेरी आँखों के सामने आ रही थी|कि मेरी माँ के जाने के बाद में पिता जी कैसे एक ही रात में बूढ़े हो गये थे| हालांकि माँ के जाने के बाद वो 16 साल तक रहे, लेकिन बिल्कुल सूखे पौधे🎋 की तरह से|माँ के होते, मैंने कभी भी उन्हें उदास नहीं देखा था|वो हमारे साथ हमारी ही तरह रहते थे,, लेकिन मैंने उन्हें रातों को सुबकते हुए  कई बार देखा था| मीरा भी कह रही थी,,"कि पौधे🎋 सारी रात को अकेले सुबकते है|" और तुमने यह तो पढा़ ही होगा,...

एहसास अकेलेपन का

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अभय की पत्नी मीरा ने कुछ दिन पहले सारे गमले 🏝छत पर रखवा दिये| फिर नर्सरी से पौधे🌱 मंगवाकर छत पर एक छोटा सा गार्डेन बनवा लिया|और नियमित रूप से उन्हें पानी देती,"और माली को बुलवा कर उसमें खाद वगैरह डलवा देती|" शुरू शुरू में तो मुझे उसकी बातों पर हसी आती थी, "पर फिर मैंने सोचा कि चलो कहीं न कहीं तो उसका दिल लगा रहता है...एक दिन मैं छत पर गया तो हैरान हो गया... मैंने देखा कि कितने ही पौधों 🌱में फूल निकल आऐं हैं,, और निंबू के पौधे में दो निंबू लगें हुए हैं,, और मिर्चों के पौधे में दो तीन मिर्चें भी लगीं हुई हैं।  फिर छत पर ही बैठ गया... थोड़ी देर,,मैंने देखा कुछ दिन पहले मीरा ने एक बांस का पौधा🌱 लगाया था,, तो वो उस गमले को खींच कर दूसरे गमले के पास कर रही थी| .... पर गमला भारी होने के कारण खिसक नहीं रहा था...मैंने उससे कहा कि अरे! रहने दो ये वही पर,, अगर भारी है तो... इस पर वो बोली नहीं! ये बांस का पौधा🌱 सूख रहा है। मै उसकी बात सुनकर हस पडा़,, और मैने कहा कि अगर पौधा🌱 सूख रहा है तो इसे पानी दो, खाद दो... इसे दूसरे गमले🏝 के पास करने से क्या पौधा सही हो जाएगा?

किस्मत की किताब

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न जाने कितने ही पन्नों की होती है,  ये किस्मत की किताब,  इसमें ही छुपा होता है,  हमारी जिंदगी का हिसाब| आज यही बैठी हुई सोच रही थी,  कि क्या खोया और क्या पाया| फिर मैंने देखा कि....  कुछ पन्ने फट गये थे,  कुछ पीले पड़ गए थे| कुछ पन्नों की स्याही फीकी पड़ गयी थी,  और कुछ पन्नों पर धूल चिपक गयी थी।  मगर कुछ पन्नों में ऐसी बात न थी..!!  उनको पढ़ने का वक्त ही मिला...!  और जिनकी मुझे याद भी न थी...!  कुछ पन्नें अपने से लगते थे!  और कुछ बेगाने से| कुछ पन्नों के अंदर मिली थी...  गुलाब की पंखुड़ियाँ...  जो किसी की याद दिला रहीं थीं| जिसको देखकर होठों पर आ रही थी मुस्कुराहट| और कुछ पन्नों में रक्खे हुए थे...  मोर के पंख जिसे देख सहेलियों की आ रही थी याद और हसीं भी,,  क्योंकि याद आ रहा था कि कैसे लड़ाई करते थे हम मोर के पंख के लिए कि जल्दी से हमारे हाथों में आ जाए ये पंख,,  जिसे देख याद आ रहा था बचपन का जमाना| सजावट से ही सबकी किताबें रंगीन बनती थी....!  और मनचाहे रंगों से ही तकदीर बनती थी....!!...