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शराफ़त का लाइसेंस

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रूढ़िवादी, अंधविश्वास और दकियानूसी विचारों से ओत-प्रोत हमारे समाज के लोग,लड़कियों के चरित्र को  मापने के लिये एक अद्भुत दृष्टिकोण रखते हैं, जिसके द्वारा वे मात्र लड़कियों के लिबास से ही उनके पूरे चरित्र का बख़ान करने का हुनर जानते हैं..... अफसोस.....पढ़े लिखे गंवारों से भरा यह समाज, चरित्र जैसे सुन्दर व विस्तृत गुण को एक बहुत ही ओछी मानसिकता में सीमित कर देता है..... लड़कियों को उनकी शराफत का लाइसेंस,लड़कियों को  ये इसी पैरामीटर पर माप कर देते हैं.....जैसै..... लड़की ने अग़र सलवार,कमीज़ प़हन रखा है और दुपट्टे को सलीके से लगा रखा है तो उस लड़की के माथे पर शराफत का टैग चिपका दिया जाता है और अगर लड़की रास्ते में नज़रें झुका कर चलती है,बात करने का ल़हजा़ शान्त और विनम्र स्वभाव की है.....फिर तो ये अपने आवारा,नाकारा, निकम्मे लड़के के लिये जो  (सारा दिन bike में अपने पिता की मेहनत की कमाई पेट्रोल में फूँक कर गलियों के चक्कर काटता है और अक्सर girls college के सामने लड़कियों को ताड़ता नज़र आता है)  मुँह उठाकर उस लड़की के घर उसका हाथ मांगनें पहुँच जायेंगे और तो बड़ी बेशर्मी के साथ जहेज़ क...

मन मेरा

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बैठ कर अपनी खिड़की पर, बाहर मैं जब भी देखती हूँ..... आशाओं से भरी आँखों से, सारा आसमान देखती हूँ..... सरस,मधुर आवाज़ पंक्षियों की, दिल को मेरे छू जाती हैं..... शीतल,शांत हवायें देखो, छू कर मुझे इठलाती हैं..... फूलों से आती सुगंध, मेरा रोम-रोम म़हकाती है..... देख अली की अठखेलियाँ, उन फूलों पर, मेरा अंतर्मन यह पूछता है, क्या तेरा ये चंचल मन, तुझे उड़ने को ना क़हता है.....? मैं क़हती फिर उससे, मेरा मन भी है उड़ने का..... आसमान में पंख फैला कर, बादलों को चूमने का..... पर डर लगता है इस दुनिया से, ये ना समझेंगे मेरे सपनों को..... जकड़ मर्यादा के पिंजड़े में, काट देंगे मेरे पंखों को..... बस यही सोच फिर मन मेरा, कुछ यूँ सहम सा जाता है, चंचलता को बांध गठरी में, कोने में दबाता है..... आकर फिर साथ मेरे यह  खिड़की पर बैठ जाता है..... देख नीला,खुला आसमान, ये स्वप्न नये सजाता है..... बन्द कर इन्हें फिर आँखों में, चुप होकर सो जाता है..... मन मेरा ये खिड़की पर,साथ मेरे जब आता है.....