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भगवान परशुराम

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विष्णु  के   हैं   ये  छ्ठे  अवतार परशु   इनका   मुख्य   हथियार इक्कीस  बार  कर  क्षत्रिय नाश साधू   संतों  का   किया  उद्धार महेंद्र   पर्वत   पर  ध्यान  लगाते पृथ्वी   पर   रात्रि  में   ना   आते कश्यप  मुनि  को  दान  में देकर पृथ्वी   के   उद्धारक    कहलाते तपस्या  में  रहते  सदा  वो  लीन पर  क्रोध के  वश  में  हैं  असीम पर मोम के  जैसा  उनका  गुस्सा भूलकर सब  देते  तुरंत  आशीष जन जन का  कल्याण  वो  करते भीष्म द्रोण  जैसे  शिष्य  निखरते जो  कोई आता  उनके  शरण  में उसके  सब  दुख क्लेश  वो  हरते भगवान की  जयंती  आयी पावन जैसे आने को  व्याकुल हो सावन आयो  मिलकर  सब  उनको ...

याद आती अब बचपन की दुनिया

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याद आती अब बचपन की दुनिया जहाँ नहीं थी कभी कोई कमियाँ खेल और मस्ती संग करते पढ़ाई आज हो ही गई इन सबसे दूरियां निन्यानवें के फेर में पड़ गए सभी बचपन हो गया था जैसे अजनबी पाई पाई का लगे हैं हिसाब लगाने बचपन में ऐसा सोचा ना था कभी माँ की ममता और पापा का दुलार ढूंढ रहे बचपन कहाँ गया वो यार दुनिया मेरी अब सिमटती जा रही बचपन में बना रखा था जो संसार बचपन की दुनिया याद अब आती अक्सर यादें उसकी बहुत सताती लौट आये फिर बचपन की दुनिया आज भी हर इंसान को वो भाती 🖋️ रवि गोयल

कभी राधा रोती है, तो कभी मीरा रोती है

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कभी राधा रोती है, तो कभी मीरा रोती है कान्हा की याद में पलकें, दोनों रोज भिगोती हैं मैं कैसे कह दूँ यह उनका, समर्पण है सब झूठा कभी प्रेम है बरसा, कभी भक्ति बरसाती है दोनों ने ही पूजा है, श्याम को जी भर के दोनों ने पिये विष प्याले, अमृत समझ कर के दोनों के पांव में ही बेड़ियां, डालने को सब तैयार दोनों ने ही तोड़े हैं, बंधन सभी दुनिया भर के राधा ने तो कान्हा को, बसाया था साँसों में मीरा ने मन मंदिर मे, सजाया था आंखों में एक मूर्त को अपना, अब भगवान समझ लेना प्रेम भी पाप था देखो, लोगों की बातों में मीरा ने सौंपा था जीवन, करने को बस दर्शन राधा का प्रेम पावन, जैसे जमना का जल निर्मल ना मारो इसमें कंकड़ तुम, अब ए दुनिया वालों जो आया भंवर कहीं, तो संभलना होगा मुश्किल करो मत अब तुलना तुम, दोनों के नाम की दोनों ने जिया खुद को, दासी बनकर श्याम की हर कोई प्यारा कान्हा को, जिसने भी उसे चाहा मीरा और राधा तो, पावन प्रेम का प्रमाण थी 🖋️ रवि गोयल

स्वास्थ्य और स्वच्छता

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कूड़ा करकट कभी ना फैलाना घर की चीजों को भी चमकाना बर्तन कपड़े रोज़ करना साफ झाड़ू पोछा भी नित्य लगाना रोज़ सवेरे तुम जल्दी नहाना नाखून को ना कभी बढ़ाना बालों को भी तुम रखना छोटा मत लगाओ इसमें कोई बहाना मम्मी की तुम मदद करना काम से कभी ना पीछे हटना चीजों को जगह पर जो रखो टूटने की ना घटेगी कोई घटना हम सबको मिलकर प्रण है लेना कूड़ा करकट को ना फैलने देना बीमारियों की है गंदगी निशानी हर जन को तुम संदेश भी देना 🖋️ रवि गोयल