ज़हरीला पानी
जहरीला पानी कहें शराब कहें कड़वी चाय कहें या फिर कुछ और क्या पता कितने नाम है इसके । सबने अपने -अपने हिसाब से इसका नामकरण कर रखा हैं । पर क्या फर्क पड़ता है इससे काम तो एक ही है इसका..... जिंदगी का खात्मा । पीने वालों की भी और उसके आसपास रहने वाले लोगों की भी । कहने को हर रोज इस पर बैन लगता है पर फिर भी मिलता हर जगह हैं । और पीने वालों का तर्क- हमने ही तो देश को चला रखा है । आखिर हमारे पीने से ही तो अर्थव्यवस्था व्यवस्थित रहती है । सरकार और पीने वाले दोनों को ही आखिर क्यूं नहीं समझ आती ये बात ..... क्या फायदा ऐसी आमदनी, अर्थव्यवस्था का जो किसी के घर की नींव पर खड़ी हो । जो बचपन और इंसानियत के टुक्ड़े कर दे....... यहीं है जहरीला पानी । मुकेश दुहन" मुकू" सोनीपत हरियाणा