मईयां तेरे द्वार


मईयां तेरे द्वार,
आज खड़ा सारा संसार ।

खुद में क्यूं नहीं झांकता,
तेरा इंसान बस एक बार ।

बस अब कुछ दिनों तक ही
सब कोई तुमको पूजेंगे,
हर बेटी हर औरत में
सब तुमको ही देखेंगे ।

मूर्तियां तेरी मिलेगी
फिर कूड़ेदान में,
देख कर बहू बेटियों को फिर
आंखों आंखों में ही नोचेंगे ।

मां इन नौ दिनों के बाद
तुम भी बदल जाओगी क्या,
मौन होकर देखोगी सबकुछ
फिर अस्त्र शस्त्र नहीं उठाएंगी क्या ।

तुम तो मां ,मां हो इस जग की
तुम तो सबकुछ जानती हो,
किसके वेश में कौन छुपा हैं
तुम सबको पहचानती हो ।

हे मां जगदम्बा.....
हे मां काली.....
नजर बस  तुम बनाएं रखना,
छूने ना पाएं अबसे 
मां, बहनों का आंचल कोई
बस इंसानियत को तुम बचाएं रखना ‌‌


मुकेश दुहन" मुकू"

(आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं)

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