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ओलंपिक की उन्मुक्त उड़ान

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:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: लवलीना  बोरगोहेन  ने भरी ,  ओलंपिक की उन्मुक्त उड़ान l  अभाव को मार माड़कर मुक्का, ओलम्पिक मैडम किया पक्का l कास्य पदक से जीता पाशा  ! असम मुखिया बारा हैं बासा  l भारतीय को हैं ओलंपिक का आशा गाँव की पगडंडी ने लवलीना तराशा l कंधो पर उम्मीदों का प्रभार  ! सेमीफइनल से बना आसार  l किया नारी शक्ति का साभार ! असम मुखिया बारा आभार l गाँव से  ओलम्पिक का सफर  ! मातपिता गोरंवित,शहर निखर l कोलकाता गोल्ड मैडल का लहर ! अर्जुन पुरस्कार  ने दिया  शिखर l गरीब घरों की सशक्त हुई नारियां ! टोक्यो ओलंपिक में छाई शेरनियां l जूझ -जूझ के छक्का लगाई बेटियां l पंच -पंच मुक्का से झुकाई दुनियां  l डॉ. ज्योति सिंह वेदी "येशु " ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: आदर्श नगर,मधेपुरा, विहार नोट ::- सर्वाधिकार सुरक्षित कॉपीराइट एक्ट के आधीन

आओ प्रेमचन्द्र को नमन करों !

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वराणसी   के लम्ही गाँव में, भारत का आया दुःख हरण l सन  अट्ठारह सौ  अस्सी में, प्रेमचंद्र का हुआ अवतरण  l माता -पिता, परिवार सबकुछ खोया, समाज की कुरीति का गबन बताया  l बड़े भाई साहब को भी सामने लाया, अल्पायु  में ही  कलम को पाया l फिर लिख दिया लेखनी  से धरा , कलम का सिपाही  बनाया  वतन निर्मला,कम्बल के बिना हल्कु मरा जीवंत पात्र हैं बूढी काकी, कफ़न l उपन्यास सम्राट का जिया जीवन  हामिद चिमटा लेकर आया चमन  गोदान, पंच  परमेश्वर कालजयी ! समाजिक  पीड़ा देख रोया गगन l --डॉ. ज्योति सिंह वेदी "येशु "          मधेपुरा, विहार (स्वरचित एवं मौलिक रचना )

बाघ संरक्षण

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बाघ संरक्षण  -------------------- बाघ को आरम्भ से ही अन्य जानवरों की तुलना में अपने  राजसी ठाठ -बाट, प्रेरक व निडर स्वभाव के कारण एक विशिष्ट सामाजिक स्थिति प्राप्त है विशेषकर  उसकी लावण्यता, ताकत, फुर्तीलापन और अपार शक्ति होने के कारण ही बाघ को राष्ट्रीय पशु के रूप में गौरंवित किया गया हैं व इसे शीर्ष वनचरों में गिना जाता हैं lइसकी मोटी पिली लोमचर्म का कोर्ट होता हैं जिसपर गहरी धारीदार पट्टीयां होता हैं, जो उसके सुंदरता में चार चाँद लगा देता हैं l जहाँ बाघ में वीरता और देवत्व के भाव होते हैं वहीं बाघों ने भी मनुष्य को सदैव अपनी प्राकृतिक भोजन श्रृंखला से परे एक जीव के तौर पर स्नेह बरसाया हैं lभारत में बाघों की घटती जनसंख्या की जाँच के लिए अप्रेल 1963 में ही बाघ परियोजना शुरू की गई व बाघ संरक्षण के उपाय भी किये गए,सफल भी रहा और अभी भी कार्यरत हैं l हमें देश में बाघों के विलुप्त होने से बचाने के लिए भारत सरकार व पर्यावरण मंत्रालय का पुरजोर सहयोग करना होगा चूँकि यह हमारा प्रथम कर्तव्य हैं, बाघ को एक बड़ा खतरा उसके शरीर के अंगों की मांग है, जिससे बचाना होगा, शिकार करने से रोकन...

भारत का धर्म मानवता हैं

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====================  मानव प्रकृति की उत्कृष्ट सभ्यता हैं lमानव का कोई जाति नहीं होता हैं, जाति तो जानवरों का होता हैं, ये कुत्ता हैं, ये बिल्ली हैं, ये गधा हैं, ये बाघ हैं, ये हाथी हैं, ये घोड़ा हैं आदि -आदि, ये मानव के ऊपर कहीं से भी लागू नहीं होता,यह बस एक थोथी परम्परा हैं, जिसे सब पीढ़ियों से ढो रहा हैं         प्रत्येक मानव सभ्यता का उदय अच्छे संस्कारों से होता हैं, इस संसार की लगभग सभी सभ्यता उन्नत रही हैं, और हैं भी,आगे भी रहेगा , चूँकि मानव के जन्म के साथ ही सारे मानवीय गुण आ जाते हैं, इसलिए मानवता जीवित हैं, अब बात करते हैं जाति की तो इसकी उत्पति अपनी - अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए सत्ता लोभीयों ने की हैं, ताकि सत्ता बनी रहे l भोले - भाले समाजियों के ऊपर थप्पा मार दिया गया, पहले तो उसके कार्यों के आधार पर जाति का नाम दिया गया,फिर पेशों के आधार पर जातिगत नामकरण करके पीड़ित व कुंठित समाज को अलग - अलग जातियों में बाँटकर राज कर रहा हैं,जिसके कारण ये जाति कहीं पर धब्बा बन गया तो कहीं छप्पा बन गया हैं, गरीबों व महिलाओ के लिए धब्बा हैं, गलत लोग या ...

सौरव तुम दोषी हो

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-----=======------ सौरव तुम दोषी हो ! हाँ तुम ही दोषी हो l तुमने वध किया हैं , हाँ तुमने वध किया हैं l लोलो की भावनाओ को दहला  लोलो की संभावनाओं को कूचला सौरव तुम हत्यारा हो ! हाँ तुम ही हत्यारा हो l लोलो के प्रेम शैशव  को असमय प्रोढ करने का, उनके ह्रदय को विरह के घृत से प्रज्वलित कर तड़पने का ! उनके पथ को कंकरीले कर, हौसलों को रक्तरंजित करने का! उनके जीवन की हरीतिमा को मरुभूमि में परिवर्तित करने का l सौरव,तुमने वध किया हैं ! हाँ तुमने ही वध किया हैं  l आशाओं के अंकुरण से पहले, साँसो की गति बाधित करने का l नेह के जन्म से पहले ही, गर्भ में ही भ्रूण मर्दन का  l --------------------------------- डॉ. ज्योति सिंह वेदी "येशु " ---------------------------------- स्वरचित एवं मौलिक रचना प्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित