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बारिश की बूदें

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बारिश की बूंदे 💦☔ बारिश की बूदें कितनी खूबसूरत होती है,  तुम्हारी पड़ती एक एक बूदों का तो जवाब नहीं,  मिट्टी पर गिरते ही समा जाती हो,  अपनी खुशबू से फिजाओं  को महका जाती हो,  अपनी बूदों से सुखी नदियों को भर देती हो ,  धरती को हरा भरा कर देती हो 🌳💚🍏,  मोर भी शर्म हया छोड़ कर नाचने लगते है,  चांदी जैसी बूदों की वो छम छम आवाज,     मधूर संगीत जैसी लगती है,          तपती हुई  रोशनी को ,  अपनी झटकती हुई जुल्फों की बूदों से छुपा देती हो,  सीपी मे पड़ते ही एक बूंद मोती हो जाती है,  सच मे बारिश की बूदें कितनी  खूबसूरत होती है ।

रिश्तों की डोर

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टूटते नही बिखरते है रिश्तों की डोर से हम बंधते है चाहत होती है रिश्ते निभाने की लेकिन मायने समझ  नही पाते है डोर बड़ी नाजुक होती है रिश्तों की      कस के बांधना पड़ता है हर पल कोशिश रहती है कोई रुठे न      किसी का साथ छुटे न कभी भी रिश्तों की डोर टुटे न रिश्तों की मुस्कुराहटों का कोई मोल नहीं         न कोई तोल    हर मोड़ पर मिल  जाते हैं लोग      जो बन जाते है अनमोल एक गलती से टूट जाते हैं रिश्ते एक सच से चहक जाते हैं रिश्ते       टूटते नहीं बिखरते है  रिश्तों की डोर से हम बधते है।

चाय

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चाय की बात ही खास है   एक घूंट पीते ही होता ताजगी का एहसास है    चाय के साथ हो उनका साथ तो इससे बड़ी क्या बात।।  ☕☕☕☕ सुबह से शाम तक तु कितनों को जगाती है दिन भर की टेंशन तु एक कप मे भगाती है।।

महादेव

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है भोले हर कण मे तु  है समाया ,  तभी तो मेरे हर दुख को तुने अपनाया ,  मेरी हर मुस्कुराहटें तुझसे ही है,  रोती हुई आंखों को तुने हसाया,  कोई नहीं है साथ मेरे पर हर पल तुझे साथ पाया ।        हर हर महादेव। 🙏🙏

झूंड से आगे निकलना है

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झूंड का ही हिस्सा हू ,  मगर आगे निकलना है,  मंजिल भी धुधंली सी दिख रही है,     रास्ते भी कच्चे है पर इरादा है पक्का,  वक़्त के साथ बढ़ रही हू,  दिन का सूरज रात का चादं ही बस देख रही हूँ,  खुद से जितने का जमाना देख रही हूँ,  झूंड से निकल कर  अपना आशियाना देख रही हूँ,  अलग कुछ करना है, सम्मान पाना है,       तो भीड़ को पीछे छोड़ना है,  उस राह को चुनना है जिसे किसी ने चुना नहीं,  उस हाल मे रहना है जिसमें कोई रहा नही,  उस पत्थर को तोड़ना है जिसे किसी ने तोड़ा नहीं,  उस बात को कहना है जिसे किसी ने कहा नहीं,  झूंड का हिस्सा हू मगर आगे निकलना है। ।

एक शख्स थी

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एक शख्स थी जो मेरी पहचान मेरा सम्मान,         मेरे लिए खास थी,       मैं हंसी तो वह उसकी वजह,      मैं गुस्सा तो वह मनाने की वजह,        मैं ख्वाब तो वह मेरी नींद,       मैं प्यार तो वह एहसास,             मैं धुप तो वह छावं,         मैं दिन तो वह रात,       मैं भुख तो वह प्यास,       मैं पतझड़ तो वह बंसत,         मैं कलि तो वह फूल,  मैं छोटा सा आशियाना तो वह पूरा  जंहा थी,        मैं शरीर तो वह  रूह थी,  मैं जिंदगी तो वह सांसे थी,  एक शख्स थी जो मेरी पहचान ,      मेरा सम्मान मेरे लिए खास थी। ।  वो कोई और नही मेरी माँ थी ।।👩‍👧👩‍👧

छोटी सी आशा

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      छोटी सी आशा पानी  सा बहने की, पंक्षी बनकर उड़ने की,        है ये छोटी सी आशा,  मैं पाऊ अपनी मंजिल को,  जिसके देखती हूँ मैं सपने,  निराशा से भरे मन को आशा से भरने की,  हर मुसीबत से लड़ने की,  राहों मे कितनी भी मुश्किलें आए ,  पर हार नही मानना,  बदले जमाना पर हमें नही बदलना,        गिरकर उठने की,        पर्वत सा ऊचां उठने की,             लहरों संग दौड़ने की,               समय के संग चलने की,          खुशबू बनकर हवाओं मे उड़ने की।            है ये छोटी सी आशा।।

चौदहवीं का चांद

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चौदहवीं का चांद कितना सुंदर होता है,   उपमा दी जाती है सुंदरता की,           सच मे बहुत ही सुंदर  देखा इक दिन उस चौदहवीं के चांद को,  वो रात भी सुरमई थी, दुधिया जोड़े मे आई थी,      चमकता हुआ,सुंदर गोल  चांदी सा था उसका मोल,     हर पल उसकी बढती कलाएँ,,  दूर तक उसकी छीटकती चांदनी ,,  उस रात अकेली ही देख रही थी उस चांद को,  इतने तारों के बावजूद भी अकेले ही  अपनी  चमक रखता है,  कितनी भी तारीफ करो कम है उस रात के चांदनी की,  न शब्दों मे बांध सकते है न उसकी  कोई उपमा दी जा सकती है,           चौदहवीं के चांद की। ।

शायरी

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तुझे रोकने  का बहाना मुझे पता है जब भी तु जाने की  बात करे बस तुझे चाय पिलाकर  रोकना है।  मेरी सुबह भी शाम भी तुम्ही हो मेरे सर दर्द का आराम भी तुम्ही हो इतनी मोहब्बत है तुमसे कि   मेरे हर सुख दुःख के साथ तुम्ही हो।।

तेरे जाने के बाद

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    तेरे जाने के बाद तेरे जाने के बाद सब बदल सा गया है,  आंखें कभी सो नही पाई,  खुल के कभी रो नहीं पाई,  शिकायतें कभी कर नही पाई,      तेरे जाने के बाद मन के भावों को कौन पढ़ेगा,  छोटी बड़ी उलझनों को कौन समझेगा,  पलक बिछाएं बेसब्री से इंतजार कौन करेगा,  तेरे जाने के बाद सब बदल सा गया है सपनों मे तुझे देखती हूँ,   तेरी तस्वीर से बातें करतीं हूँ,  तेरी यादों में मुसकाती हूँ, चुपके से रो लेती हूँ,       तेरे जाने के बाद ना वो आंचल  न ममता की छावं,  ना लोरी, ना तेरी गोदी,  दिन भी लगे अंधेरी रात ,       तेरे जाने के बाद करती थी तू मुझसे ही मेरी शिकायतें,  मुझे तो अकेला छोड़ कर चली गई,  मुझे तो आती है , क्या तुझे नहीं आती मेरी याद,       अब तु बता,  किससे  करूँ मैं तेरी  शिकायतें,  तेरे जाने के बाद सब बदल सा गया।

परिस्थितियां और महिलाएं

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परिस्थितियां महिलाओं को मजबूत  बना देती है,  एक अलग सा आत्मविश्वास जगा देती है,  तप तप के पक जाती है इतना कि चमका लेती है खुद को ,  खुद के  लिए सजने लगती है, रंग भी चुनने लगती है,      रुठना, रोना सब छोड़ देती है,  उलझनों को कर के एक किनारा, खुद को सुलझा लेती है,   बंद कमरो से निकल कर खुले आसमानों मे उड़ती है,        लिख देती है जिंदगी के तजुर्बे को,  अकेले ही जूझने लगती है मुश्किलों से,  मन दुखी हो तो कुछ खास पका लेती है, कभी घुंघरुओ के साथ, तो कभी साज की ओर हो जाती है।।           पर हिम्मत नही हारती,  रोती तो खुब है पर दुख नही मनाती,  मुश्किलें कितनी भी हो सबको हरा देती ,  ये औरतें ही होती है जो हर परिस्थितियों ,       मे खुद को ढाल लेती है। ।

चाय

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दोनों ही चुप थे खामोशी टुटी भी       एक सवाल पर क्या आप को चाय पसंद है।  ☕☕☕☕ मेरी जिंदगी मे एक रिश्ता बड़ा खास है वो कोई और नही एक कप चाय है।

मेरा शहर

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मेरा शहर लहूरी काशी के हम वासी,  रहते हैं हम प्रेम के प्यासी,  बहती है यहाँ पवित्र गंगा,  है परिंदे हम उसी शहर के,  शंकर भी है यहाँ के वासी,  जिसे कहते है हम लहूरी काशी,  तंग गलियों से भी आती है वो चाय कि सोंधी खुशबू,  मंद हवाओं से भी आती है वो फूलों की भीनी खुशबू,  परायों को भी अपना बनाता,  सुख दुःख मे वो सबके साथ रहता,  घाटों पे हसते खेलते बच्चे,  मंदिरों मे आते भक्त सच्चे,  फौजियों का है शहर जो देते  देश के लिए अपनी कुर्बानी ऐसा है शहर मेरा ,  जिसे कहते है हम लहूरी  काशी ।

इंतजार कर रही हूँ

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आज भी इंतजार कर रही हूँ,  सुबह से शाम कर रही हूँ,  वक़्त के साथ कर रही हूँ,  हर राह पर कर रही हूँ,  अब खुद को संभाल नहीं पा रही हूँ,  फिर भी आज भी इंतजार कर रही हूँ।         मुश्किल है पर जी रही हूँ,  दिल भी मानता नहीं पर मना रही हूँ,  बिते हुए कल के साथ जी रही हूँ,  यादों के सहारे एक एक पल काट  रही हूँ,  पता है कि तू आ नहीं सकती ,     फिर भी तुझे बुला रही हूँ,  आज भी इंतजार कर रही हूँ ।  ।।माँ 👩‍👧।।

निस्वार्थ सेवा

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कितनी खुशी मिलती है  निस्वार्थ सेवा से,       बिना कुछ लिए,  उसके आंसुओं को रोकने से,  दो वक़्त की रोटी देने से ,उनको गले लगाने से,       कितनी खुशी मिलती है,  किसी असहाय के सर पर हाथ फेरने से,  किसी की चोट पर मरहम लगाने से,  किसी की धुप को हटा कर उसे छांव देने से,      कितनी खुशी मिलती है,  कितनी खुशी मिलती है निस्वार्थ सेवा से,  किसी बेबस को सहारा देने से,  अपना सुख छोड़ के उनका दुख अपनाने से,  आसुओं वाले आखों मे से आसूं पोछने से,  कितनी खुशी मिलती है,  सच्चा सुख मिलता है निस्वार्थ सेवा से ।  असहाय मनुष्य कि सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।।

गोधुली बेला

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     गोधुली बेला,  बहुत ही मनमोहक दृश्य होता है ,  चारों ओर चहल पहल,  बच्चे खेलते हुए, चिड़िया वापस घर को जाते हुए,  पशुओ का झुंड जाते हुए, कई लोग मिलकर बातें करते हुए,       बहुत ही सुंदर होती है गोधुली बेला,  सूर्य भी अपनी किरणों को समेट कर ,  अपनी लालीमा को चारों ओर फैला कर,  प्यारी सी मुस्कान के साथ उस बेला को गोधुली कर,                  उस चांद को आने का कह कर,     अपनी रोशनी को छिपा कर,  चले जाते हैं अपने घर की ओर,  तपती धुप के बाद, आते हैं शीतल झोके,  हिलते है प्रफुल्लित पात,  पूरा होता है विरह काल, आती है मिलन की रात,  नगाड़े बजते है देवालय मे, घनटिंयो की टनटनाहट से मंगल गीतों के गान से, शंखनाद से          गुजं उठती है गोधुली बेला  ।।

जिंदगी भर का साथ

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तू अस्सी का मै पचहत्तर की ,  खत्म होने को  डोर जीवन की,  तेरे साथ कितना वक्त जी लिए,  जिंदगी के हर पहलू मे साथ रहे,  कभी वो रूठना मनाना,  गुस्सा दिखा के फिर प्यार जताना,  उम्र के हर पडाव पे साथ निभाना,  मेरा शर्माना, कभी तेरा गुस्से  में देखना,  मै हसीना तू दीवाना,  कितना सुंदर था वो जमाना,  अब सब कुछ खत्म हो गया,  जीवन मे अब कोई रस नही  ,  हम दोनों के अब कुछ भी बस मे नही,  सांसे कब छोड़ दे साथ,    पर हो हाथों में हाथ,  लाठी ही है अब साथी, न जाने हो जाए हम कब माटी,      साथ छुटे न हमारा,   क्यूकि हम दोनों हो गए है एक दुसरे के आदि।  काश हमारी सांसे भी हो एक दूसरे के साथीl

अंधा कानून

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      अंधा कानून  बिक जाता  है ये चंद रुपयो मे,  कोई इमान नही , कोई सम्मान नही,  न किसी बेगुनाह की चिंता,  चंद कागज के टुकड़ो पर,  सत्य पर झूठ की मोहर लगा के,  सच को दबा के, झूठे गवाहों को दिखा के,        बेगुनाहों को फसा के,  चंद पैसे ले के जश्न मनाते है,  अपना बैंक बैलेंस बनाने के लिए,  गरीबों को दबाते हैं, खुद को उठाते है,  दलाली कर के लाखों रुपये कमाते है,       पैसों का जूनून है,      ये अंधा कानून है।           इनके नजरिये से ,  न्याय अन्याय है और अन्याय न्याय है।

बुद्ध पूर्णिमा

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  बुद्ध पूर्णिमा का दिन बौद्ध धर्म के लोगों के अलावा हिन्दू धर्म के लोगों के लिए भी बहुत मायने रखता है।  भगवान गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु जी का नौवा रूप माना जाता है।  बुद्ध पूर्णिमा चारों ओर प्रकाश लाता है, इस दिन ज्योतिमय  पथ का आविष्कार हुआ था।  जग में बुद्ध वाणी को फैलाया, बुद्ध वाणी को संगीतमय बना कर जन जन तक पहुचाया।  इस दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, और ज्ञान की प्राप्ति भी, इस लिए बुद्ध पूर्णिमा खास है।  गौतम बुद्ध एक भाव थे, अपनी ही कैद से भाग गए खुले आसमान के नीचे रहने लगे और  वहाँ से उन्होंने ज्ञान,  विचार, एहसास, अनुभव सब प्राप्त किया और लोगों तक पहुचाया भी।  सबसे महान कार्य बुद्ध ने किया ज्ञान के शब्दों से पुरे संसार को भीगो दिया था।

विश्व पक्षी प्रवासी दिवस

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संसार में पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियां हैं ।  सब अपनी  अपनी आवश्यकताओं को पुरा करने के लिए मीलों मीलों तक जाती है।  दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इनका आना जाना लगा रहता है।  फिर एक निश्चित समय के बाद ये अपने मूल आवास पे आ जाती है,  प्रवास का समय ५ से ६ महीने तक का होता है, प्रवास स्थल की दूरी १०० मील से लेकर हजारों मीलों तक हो सकती है।  प्रवासी पक्षी तलाबो के किनारे, चरागाहों , परती भूभि मे सैकड़ों मीलों की यात्रा के बाद उतरते थे, जहाँ सब शुद्ध जल, वायु, वनस्पतियाँ  इनका स्वागत करते थे,  अब न तो चरागाह है न परती भूमिया , सब कुछ छिन्न गया है उनका, इसलिए अब प्रवासी पक्षिया कम दिखती है।  पक्षी यात्रा के दौरान थकने, प्यास लगने, या भोजन की कमी के कारण  मर जाते हैं।  हम मनुष्यों को इनकी मदद करनी चाहिए, इसलिए आवासों की संरक्षण की आवश्यकता को समझते हुए विश्व प्रवासी दिवस मनाया जाता है।  पक्षियों की रक्षा करो, पलास्टिक, प्रदुषण को दूर करो।।