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Showing posts with the label सपना कुमारी

फादर डे

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दुनिया की हर खुशी मांगने वाले, अपने बच्चों की खुशियों में गमों में खुशी और दुखी होने वाले  वो शख्स सिर्फ पिता होते हैं, बच्चों के लिए दुआ उन्नति मांगने वाले, सिर्फ पिता ही तो होते हैं, हर रिश्ता खास होता है, चाहे दोस्त रिश्तेदारो  का, पर वह रिश्ता जिसमें सफलता देखकर कभी जलन नहीं होती अपने अरमानों का त्याग कर अपना फर्ज बखूबी निभाने वाले वह रिश्ता पिता का होता है, मार्गदर्शक शुभचिंतक, जिंदगी की हर एक मोड़ पर  सही मार्ग दिखाने वाले, उस पिता को शत शत नमन नाम -सपना कुमारी     जहानाबाद बिहार

🌹 पापा 🌹

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पापा की परी तो हम भी थे कभी ‍पर वक्त के साथ सब-कुछ बदल ग‌ए अब नहीं पिता का साया है अब तो बस अपने बच्चों के सुपर मॉम्स बन कर रह गए कहा गए वो बचपन की यादें कब हम बड़े हो गए वक्त का कारवां कैसे गुजरता चला गया वक्त का लम्हा का पता नहीं चला कब बचपन से बड़े हो गए वो बचपन की यादों कहीं खो गई सी है मासूमियत भरी बातें वो बचपन की ज़िदीपन कहा खो ग‌ई है अब तो उम्र के इस दहलीज पर भागती दौड़ती जिंदगी से अक्सर तन्हाई महसूस होती है काश वक्त थम जाता हम लौट जाते पुराने जिंदगी के सफर में सुबह की चाय की प्याली चुस्की पापा मम्मी बहनों के संग पीते गप्पे हांकते मस्ती करते बीते वक्त की कुछ बातें करते अब तो बस पापा यादों में रह ग‌ए अब तो बस पापा के साथ वक्त बिताये लम्हे की याद आते हैं अंतिम उम्र के पड़ाव पर सबको छोड़कर जाना ही पड़ता है पर बीते वक्त की याद बहुत आती है अब तो अपने बच्चों में ही खुद का बचपना छलकता है होठों पर मुस्कान उनकी खुशी , शरारतें को देखकर खुद ही देख कर आ जाती है जिंदगी तो वक़्त के साथ बदलते रहती है पर पापा हमेशा यादों में बसे रहेगें 🙏🙏🙏🙏🙏 नाम -सपना कुमारी जिला- जहानाबाद  बि...

स्वर्ग नरक

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किसी का घर ना उजड़े ना किसी का परिवार बिखरे नारी के हाथ में ही तो स्वर्ग और नर्क का डोर है घर के मंदिर को हर कोई जन्नत नहीं बना सकता सब कुछ धरती पर तो ही है घर के मंदिर को स्वर्ग नरक नारी ही तो  बना सकते हैं हम स्वर्ग की चाह रखते हैं अपने घर को स्वर्ग नहीं बनाते हैं नारी नारी की दुश्मन बन बैठी है अपने घर को ही तो नर्क बना बैठी हैं मृत्यु प्राप्त कर स्वर्ग और नर्क की बातें करती है अपने घर को स्वर्ग नहीं बनने देती है और स्वर्ग की इच्छा प्राप्त करती हैरान हूं अपना घर ही तो स्वर्ग है बस नारी के हाथ में स्वर्ग और नर्क की डोर हैं........ नाम- सपना कुमारी जिला-जहानाबाद बिहार

🌹मेरे पापा🌹

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मेरे पापा का कल पुण्यतिथि है  पापा के लिए कुछ चंद शब्द लिखी हूं शत शत नमन पापा को 🙏🙏                   पिता का साया, उम्र भर नहीं रहती, दुनिया का दस्तूर है, दुनिया से हर शख्स को, छोड़ कर जाना पड़ता है, धरती पर माता पिता को, भगवान के समान माना गया है, आपकी उंगली पकड़कर चलना सीखा, सपनों की उड़ान भरना आपने ही तो सिखाया था पापा, उम्र के इस  दहलीज पर, आप की नसीहत याद आती है, हम बच्चों की हर ख्वाहिश को, बखूबी से पूरा करते थे पापा, घर की  ज़िम्मेदारियां का बोझ, हर फर्ज को निभाते थे पापा, आज आप बिछड़ कर चले गए, आपकी याद बहुत आती है पापा, आपकी कही बातें याद आती है पापा, जिंदगी भर पिता का साया, नहीं होता उम्र के अंतिम पड़ाव में, हर शख्स को दुनिया से चले जाना होता है, अपनी जिम्मेदारी उठाने का फर्ज जो सिखाये थे पापा , आज उन वचनो को निभा रहे हैं पापा, संस्कार, अनुशासन आपने ही तो सिखाया था पापा, स्नेह दुलार आप ही तो करते थे पापा,  छोड़कर कहां चले गए पापा, जिंदगी की हर समस्या को, सुलझाते  थे पापा हर पल, सहारा थे पापा आपकी ...

वह छोड़ कर जा चुकी थी

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अस्पताल में अपनी ड्यूटी कर रही थी रीता अचानक थरथर कांपने लगी। तभी दूसरी नर्स पास में आते हुए क्या हुआ ठंड लग रही है क्या नहीं पता नहीं आज क्या हो रहा है। मन अजीब सा बेचैन हो रहा है कोई पुकार रहा है ऐसा लग रहा है कोई परिचित मुझे बहुत याद कर रहा है। कुछ समझ में नहीं आ रहा है आखिर हो क्या रहा है। सुनो तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही है तुम क्या बोल रही हो मुझे समझ में नहीं आया। रीता ऐसा करो आज छुट्टी ले लो दो-तीन दिनों के लिए । रीता ने उसकी सलाह को मानते हुए अस्पताल से छुट्टी लेना उचित समझा। रीता को घर में आने के बाद भी किसी की रोने और चिल्लाने की आवाज आ रही थी वह थरथर कांपने लगी फिर भी उसने हिम्मत बाधते हुए पूछा तुम कौन हो ऐसे हंसी ठिठोली क्यों कर रही हो मत डराओ मुझे मेरे सामने आओ। भूल गई क्या मैं आरती तेरी बचपन की दोस्त। रीता के शरीर से जान निकल गई यह तो आरती की आवाज लग रही है। ऐसा मुझे क्यों महसूस हो रहा है मेरे आस-पास वह तो अपने ससुराल में होगी। मायके गए हुए भी तो तीन-चार साल हो गए वह‌ अभी सोच ही रही थी  उसे लगा कुछ कहना चाहती हो सुनो ना रीता मैं मर चुकी हूं। मेरे पति ने मेरी बेटी ...

आईना

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हां जनाब यह समाज का दर्पण कुछ बोलती है, यूं तो हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, नारियों के प्रति जुल्म कम  नहीं हो रहे हैं। हां जनाब हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं पर जनाब आज भी दोहरे समाज में जी रहे हैं। यूं तो कहे  हम 21वीं सदी में जी रहे हैं नारी समानता की बातें हो रही है जी जनाब हम 21वीं सदी में जी रहे है अपने हक के लिए आवाज उठाना अभिशाप  बन  गया  है अपने समाज के लोग ही आधुनिक महिला से कट रहे हैं खुद के लिए प्रश्नचिन्ह बन गए अपने हक की लड़ाई के लिए आवाज उठाना भी गलत हो गया है नारी नारी की दुश्मन हो गई है कोर्ट में कीचड़ उछालने से ना डर रही है जी जनाब हम पता नहीं किस दोहरे  समाज में जी रहे हैं यू तो हम चांद सितारोंकी बात करते हैं 21वीं सदी में भारत की तरक्की की बात करते हैं पर जनाब भारतीय मानसिकता से ग्रसित ही रहते हैं विदेशों में सिंगल पेरेंट्स के तारीफ करते हैं अपने देश को गरीब और दूसरे देशों को विकसित की बात करते हैं पर जनाब भारत में सिंगल महिला पेरेंट्स को देखकर वही पुरानी रूढ़िवादी ख्याल आती है बेचारी और दया की पात्र नहीं तो बिगड़ैल और संस्...

तलाकशुदा का दर्द

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घूरती निगाहें पूछती है कभी-कभी, मैं भी तो इंसान हूं जिंदगी क्या मेरी नहीं, गलत रिश्तो की तारे जब जुड़ जाती है, सारा दोष लड़की के मथे क्यो जड़ दी जाती है, कभी खुद को अबला और असहाय महसूस क्यों कराई जाती है, मुझ में ही कमियां क्यों बताई जाती है खुद के लिए जीना क्या जिंदगी नहीं है, हमसफर के बिना क्या जिंदगी नहीं है, कुछ निगाहें दया और बेचारी सी देखते हैं कुछ हबस के निगाहों से, खुद के लिए जीना क्या जिंदगी नहीं है, जुल्म की आवाज उठाना अपराध हो गया घुट घुट कर सिसकी की आवाजें ना जाने कितने घरों में, बंद कमरे के अंदर छिपे होगी जुल्म की आवाज उठाने पर अपने लोग भी बेगाने हो गए  क्या गुनाह था मेरा लोग कतराने लग गए मैं स्वतंत्र हूं फिक्र नहीं है मुझे, घुट-घुट की जिंदगी से अच्छा है, अकेले और आजादी की जिंदगी, मैं खुश हूं लोगों की परवाह नहीं है दुनिया समाज क्या सोचे जिंदगी के पथ पर कभी डगमगाए नहीं आत्मविश्वास मेरा बनाए रखना प्रभु जिंदगी मेरा खुशहाल बनाए रखना आजाद ख्यालों की मैं जुल्म बर्दाश्त नहीं। सपना कुमारी जहानाबाद बिहार

🏵️मेरी भी सुन लो 🏵️

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मैया लल्ला की भी सुन लो, ग्वालिन झूठी तेरा लल्ला सच्चा, आज क्यों मुझे ओखल में बांधा, कान्हा तू बड़ा नटखट है रे, ग्वालिन  तेरी शिकायत करें , आज तेरी मैं एक ना सुनूंगी, तुझे मैं आज मजा चखाऊंगी, तेरा कान्हा गली गली घूमे, ग्वालिन की मटकी फोड़े, तेरा कान्हा बड़ा नटखट है रे यशोदा, मैया ग्वालिन झूठ बोले, कान्हा तेरा सच्चा तेरी ग्वालिन झूठी, सखियां तेरी शिकायत करें हैं, माखन चोर मटकी फोड़े कान्हा तू बड़ा नटखट है रे आज तुझे मैं, रस्सी से ओखल में बांधू धूप में, तुझे मैं बांध हूं म‌इया मेरी भी सुन लो, सखियां और ग्वालियन झूठी, मुंह पर माखन लगायो मेरे नाच दिखाना को बोले पनघट किनारे, रास रचाए और बांसुरी बजाए मैया मुझे तंग करो है मुझे कहो  नाच दिखाओ बांसुरी बजाओ मेरे पाव दुख जावे मैं नन्हा सा, तेरा कान्हा सखियां तेरी झूठी, मुझे कहे तेरी यशोदा मैया को कह दूंगी माखन चोर है तेरा कान्हा, हम सखियन की मटकी फोड़े, मेरी झूठी शिकायत करो है, मैं सच्चा तेरा कान्हा यशोदा मैया मेरी सुन लो सखियां तेरी झूठी मैं सच्चा रे मैं तेरा कान्हा तू मेरी यशोदा मैया, कान्हा तेरा सच्चा सखियां तेरी झूठी । सपना क...

🌺 मैं वापस आऊंगा 🌺

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मैं आऊंगा लौटकर मां, बस मुझे पहचान लेना, तेरी दर्द भरी आंखों को देख कर, मेरा दिल तड़पता है पर असमय चला जाऊंगा मुझे नहीं पता था कोरोना महामारी में लाखों मां की गोद सूनी हो गई मैं वापस आऊंगा बस आप पहचान लेना, माता पिता के बुढापे का सहारा था मैं पर नियति का मुझे पता नहीं मैं चला जाऊंगा, मां की ममता की आंचल बिछाए रखना बस आप पहचान लेना, लौटकर फिर आऊंगा तेरी बेबसी को देखा मैंने, बुढ़ापा का सहारा था मैं अपने  बच्चों का मां पिता तेरे ऊपर दे रहा मैं ,अपने लाल को दुनिया से अलविदा कर दो इस महामारी में किसका बस चला है, मैं वापस लौट कर आऊंगा बस आप मुझे पहचान लेना पत्नी की आंखों में दर्द देखा मैंने उसे प्यार से समझा देना मैं वापस आऊंगा मुझे प्यार से अलविदा कर दो तेरे आंसुओं का सैलाब मुझसे देखा नहीं जाता, आप खुश रहो आपके दुख देखा नहीं जाता, मेरे बच्चों को अपने बेटे जैसा समझ कर ख्याल रखना आप का सहारा तो ना बन पाया पर अगले जन्म में आपका सहारा  जरूर बनूंगा मैं वापस फिर आऊंगा आप भूल मत जाना अगले जन्म में फिर मिलेंगे आप पहचानने मे भूल मत करना मैं वापस फिर आऊंगा बहु तेरा सहारा बने बेटी की तरह सम्म...

🌺शिक्षक दिवस 🌺

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ज्ञान का प्रकाश तू दिखाता चला गया कच्चे मिट्टी के घड़े को ‌ज्ञान  के भंडारे में ढालता चला गया मंजिल दिखाता चला गया राह तू दिखाते चला गया मंजिलों के सफर में मार्गदर्शन कराता चला गया....... रास्ते कठिन थे ज्ञान का प्रकाश फैलाता चला गया... जिन मंजिलों का रास्ता पता नहीं था मार्गदर्शन कराता  चला गया तेरे मार्गदर्शन से गुरु कुछ भी असंभव नहीं................. छात्रों के जीवन में ज्ञान की ज्योति फैलाता चला गया उस गुरु के चरणों में शीश हम निभाते है पहले पाठशाला के बाद तेरा स्थान है गुरु उस गुरु के चरणों में अपना सिर झुकाते हैं.......... महाभारत में अर्जुन जीत पाते नहीं गुरु के ज्ञान के बिना अधूरा है द्रोणाचार्य और कृष्ण के बिना अर्जुन इस मुकाम तक आते नहीं उस  गुरु को सत सत नमन उसे गुरु की महिमा का कितना बखान करु उस गुरु को शत-शत नमन सपना कुमारी जहानाबाद बिहार

🌺रामवृक्ष बेनीपुरी🌺

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रामवृक्ष बेनीपुरी जी हिंदी साहित्य के शुक्लोत्तर युग के प्रसिद्ध लेखक थे। भारतीय साहित्यकारों में रामवृक्ष बेनीपुरी जी प्रेमचंद्र की श्रेणी के लेखक थे इनकी रचनाओं में हमारे देश की आत्मा यानी गांव की बहुलता और जीवंत वर्णन मिलता है। रामवृक्ष बेनीपुरी जी को कलम का जादूगर भी कहा जाता है। इन महान लेखक का जन्म हमारे बिहार के पावन धरती पर १९०२ई मुजफ्फरपुर जिला के बेनीपुर गांव में साधारण किसान परिवार में जन्म हुआ था। इनके पिता श्री फूलचंद्र एक साधारण किसान थे। बचपन में ही इनके माता-पिता का देहांत हो गया हरिन का लालन-पालन इनकी मौसी ने किया था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा बेनीपुरी में हुई थी और बाद में यह अपनी ननिहाल में पढे। सन 1920 ईस्वी में गांधी जी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन प्रारंभ होने पर ये अध्ययन छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े बाद में इन्होंने साहित्य सम्मेलन की विशारद परीक्षा उत्तीर्ण की रामचरितमानस के पठन-पाठन से साहित्य की रचना आरंभ की साहित्य के क्षेत्र में ये पत्रकारिता के माध्यम से आये। 15 वर्ष की अवस्था में इन्होंने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लिखना शुरू किया। देश सेवा के पुरस्क...

धागे की प्रेम

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तुम खुश रहो भैया दूर रहकर भी आप की सलामती चाहते हैं धागे की प्रेम हमेशा बनी रहे बरसों बीत गए  आपसे मिले हुए बचपन की यादों में मैं जब खो जाती हूं तेरी याद बहुत आती है अब तो वो गुजरा जमाना बचपन का शहर की जिंदगी में भूल गए होंगे अपने बच्चों के रक्षाबंधन का उत्साह देखकर तेरी याद बहुत आती है समय के साथ हर  रिश्ते  धूमिल हो जाते हैं, पर तेरी याद बहुत आती है भाई बहनों का प्रेम भाभियों को रास नहीं आती है उन्हें तो बस ननद ही नजर आती है। अब तो वक्त के साथ  रिश्ते भी बदल गए स्नेह प्रेम सब कुछ पैसा और  मंहगे गिफ्ट पर आकर टिक ग‌ए शहरों की चकाचौंध और भागदौड़ वाली जिंदगी गांव की जिंदगी रास नहीं आएगी अब...... अब तो बरसो आंखें तरस गए अगले राखी पर मिलने आओगे कब ऑनलाइन राखी भेजने में आनंद नहीं आता जो  माथे पर तिलक हाथों की कलाई पर रेशम की डोरी बांधने मे आती है जो राखी बांधने में आनंद था आज वह रिश्ता महंगे मिठाई और भाभियों के ताने मे रह गए प्रेम का वह अटूट बंधन शायद बिखरता चला  गया है ना मेरा दोष ना तेरा दोष समय और जिम्मेदारियों का  फिक सब रिश्तो को दूर कर रहा है ...

आजादी के दीवाने

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देश के लिए जो शहीद हुए उनकी कुर्बानी व्यर्थ गई चंद्रशेखर भगत सिंह जैसे लाखों वीर शहीद क्यों हुए...... अंग्रेजों ने देश को लूटा आज नेता भी लूट रहे अपने ही भार‌त माता कीधरती  पर कुर्सी के गद्दी के खातिर धार्मिक ,जातिवाद जगह जगह दंगे करवा रहे। गांधी जी सरदार बल्लभ जी की आंदोलन व्यर्थ गए भारत माता की दुर्दशा देखकर मन व्यथित हो जाता है............ अंग्रेजों नेआपस में लड़ा कर राज किया आज भी नेता गद्दी के खातिर देश में आरक्षण और जातिवाद का हवाला देकर दंगे करवा रहा हम नागरिक को अब भी समझ में ना आ रहा.. ... ‌ अंग्रेज और नेता में कोई फर्क ना रहा देश में भूखमरी और  बेरोजगारी है  नेता हम लोगों के पैसे से विदेश जा रहा........ 75 वा वर्ष देश को आजाद हुआ पहले भी भारत माता जंजीरों से जकड़ी थी ..... आजाद भारत में अब भी भारत माता आज भी सिसक रही...  अंग्रेजों से आंदोलन करके भारत के वीर पुत्रों ने  क्या इस हाल के लिए आजाद किया सपना कुमारी जहानाबाद बिहार

हास्य कविता प्यार

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एक चांद का टुकड़ा प्यार में मुझको फंसा लिया. ‌.. मैं उसके दीवानगी में बावला हो गया वह हुस्न की परी जलवे दिखा कर चली गई मैं उसके इश्क में दीवाना हो गया मुझे पता ना था यारो मुझे फंसाकर चली गई आज मैं भिखारी हो गया पैसे थे पास में अनगिनत आ गई मुझे अपने जाल में फंसा कर अपने काम निकाल कर चलीग‌ई मैं उसके इश्क में फिसलता चला  गया मुझे ना पता था वह अपने जाल में फंसा कर चली गई।............ वह मुझसे नहीं मेरे दौलत से प्यार करती थी पैसा था तब तक साथ रही आज मेरे साथ परसों किसी और के साथ दिखी।.........  पिता के डांट खा रहा मुझे ना पता था पिता की नसीहत आज सही दिख रहा।........  कैसे मैं फंस गया प्यार के चक्कर में आजकल के फर्जी रिश्तो के चक्कर में। हर जगह धोखा मिला कॉलेज या ऑफिस में अब समझ आया चालू लड़कियों के चक्कर ।.... ‌‌..... कॉलेज में मीठी बातें करके परीक्षा में सवालों के उत्तर पूछती अपनी अदाओं से दीवाना बनाकर परीक्षा में अच्छे अंक लाती घर में पिता के फटकार खा रहा लड़कियों के चक्कर  आवारा हो गया। चालू लड़कियों के चक्कर में दिल टूट गया    हर जगह दिल फेक लड़कियों ने प्या...

हास्य कविता कैसी विडंबना

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पत्नी हर बात पर धमकी देती है आधे हिस्से लेकर चली जाऊंगी तलाक की हर वक्त धमकी देती है हाय कैसी विडंबना है प्रभु सब युगों मे अबला और असहाय नारी का चित्रण हुआ है कुछ हमारी फरियाद भी सुन लो नारियों ने अधिकार का गलत प्रयोग किया है।........... संविधान ने नारियों के लिए कानून बना दिए। आज नारियों ने उसका दुरुपयोग किया है। हम आज की नारी हैं अपने अधिकारों का गलत प्रयोग किया है पति से हर बात पर लड़ाई करती है घरेलू हिंसा का आरोप करती है हम पुरुषों के भी व्यथा समझो सरकार हमें हर बात पर प्रताड़ित करती है।................. नौकरी में आरक्षण ले लिया ऑफिस में नारी का होने का एहसास  दिलाती है। अपने को अबला और असहाय बताती है।........... घर से बाहर हर जगह महिलाओं से प्रताड़ित हो रहा हर वक्त अपने अधिकारों का एहसास दिलाती है कुछ पुरुषों की व्यथा भी समझो सरकार आज की नारियां है अधिकारों का गलत प्रयोग भी किया है।.......... अबला और असहाय का रोना रोया है हम पुरूषो भी महिलाओं से प्रताड़ित हुए हैं। हमें सही होते हुए भी लोगों ने गलत समझा है। कैसे समाज में जी रहे हैं हम पुरुष प्रधान का बस ठेपा लगा है महिला ने अपन...

जिंदगी मेरे घर भी आना

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कुछ बातें मुझे करनी है तुझ से शिकायत करनी है जो अच्छे खुशहाल जिंदगी  के सपने बुने थे।.......  मुझे तुमसे शिकायत करनी है ऐ जिंदगी मेरे घर भी आना तुझ से शिकवा शिकायत करनी है मेरे घर के दरवाजे पर खुशियों का दस्तक देना।......... ऐजिंदगी मुझसे क्यों रूठ गई कल्पना में भी सोचा ना था आजकल कैसी जिंदगी जी रही मैं जिंदगी मेरे घर भी आना ढेर सारी खुशियों का पैगाम लाना रब से शिकायत करनी छोड़ दिया ऐ जिंदगी दिल की कुछ बातें करनी है मेरे घर के दरवाजे पर दस्तक देना  शिकवा शिकायत तुझसे करनी है ऐ जिंदगी मेरे घर जरूर आना आंखों से आंसू बहते हैं इंसान से खफा नहीं रब से खफा हूं मैं ऐ जिंदगी मुझे तुझसे दिल की बातें करनी है।..........  ऐ जिंदगी मेरे घर के दरवाजे पर खुशियों का दस्तक  जरूर देना क्या रब से यही जिंदगी मांगा था शांति और सुकून कहां चले गए खैर छोड़ो इन सब बातों को रब से शिकायत क्या करना जिंदगी मेरे घर भी आना नये खुशियों के पैगाम लाना मेरे घर के दरवाजे खुले हैं मेरे घर के दरवाजे पर खुशियों का दस्तक जरूर देना।.......... ऐ जिंदगी तुझसे दिल की बातें करनी हैं।........... ऐ जिंदगी मे...

बच्चों के भोजन में उच्च प्रोटीन और विटामिन सी वाले आहार शामिल करें

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जैसा कि पता है covid-19 माहमारी मे  तीसरी लहर का प्रभाव बच्चों पर ज्यादा पड़ेगा। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए छोटे बच्चों को घरों से बाहर आवश्यक होने पर ही ले जाए। छोटे बच्चों को संभालना घर में मुश्किल हो जाता है उन्हें अधिक से अधिक घर पर ही समय बिताने की आदत दिलाएं। छोटे बच्चों को रिश्तेदारों और मित्रों के यहां नहीं ले जाएं विशेषकर उस समय जहां कोई सदस्य सर्दी, खांसी बुखार या अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हो। छोटे बच्चे की इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होती है। कोरोना का तीसरा लहर अगस्त में आने की संभावना बताई जा रही है। छोटे बच्चों को संभालना और सुरक्षित रखना अगर कुछ परहेज किया जाए तो  घर में कोरोना को भगाने और सुरक्षित वातावरण पा सकते हैं। बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहो,सभाओ वसमारोह मे जाने से परहेज करना चाहिए, बच्चों को हाथ मिलाने अथवा चुंबन से भी परहेज कराये तथा एस एम एस के नियमों जिनमें सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व सैनिटाइजर शामिल है का पालन कराये। बच्चों में सर दर्द ,बुखार बदन दर्द गले में खराश ,सूखा कफ, भूख की कमी ,कमजोरी दस्त ,आंखों में दर्द होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या शिशु...

हाय रे सरकारी नौकरी

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  हाय रे सरकारी नौकरी जो लड़कियां घास तक ना डालती थी सरकारी  नौकरी क्या लग गई  खूबसूरत लड़कियों की लाइन लग गई..........  हम काले कलूटे लड़कों के किस्मत के ताला खुल गई जो लड़कियां भाव ना देती थी सरकारी नौकरी क्या लग गई मधुमक्खियों की तरह पीछे पड़ गई हमने हसीन सपने तो नहीं देखे थे हमारे सपनो मे तो भूतनी ही आती थी सरकारी नौकरी क्या लग गई अब तो अप्सरा आसपास मंडराने लग गई............. सोचा ना था हम काले कलूटे के भी किस्मत कभी चमकेगा अब तो अच्छे घर और खूबसूरत लड़कियों की रिश्तो की झड़ी लग गई हाय रे सरकारी नौकरी क्या लग गई जो लोग चिढ़ाते थे आज उनके बोल भी बदल गई........  हाय रे सरकारी नौकरी दहेज देने वालों की लाइन लग गई हम काले कलूटे लड़कों की किस्मत  बदल गई......... सरकारी नौकरी क्या लग गई हम काले कलूटे लड़को के किस्मत की ताला खुल गई................ सपना कुमारी  जहानाबाद बिहार

जीवन से भरी दुनिया

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रंग बिरंगी दुनिया अलबेली सी मस्तानी सी.......... क्या क्या रंग दिखाती से जीने की चाह दिखाती सी कभी आंसुओं की धार बहती सी कभी खुशियों के आंसू बहाती सी ना जाने कितने रंग दिखाती सी जीवन से भरी दुनिया में क्या क्या रंग दिखाती सी जीने की चाहत दिखाती सी अनजाने डगर अनजाने सफर ना जाने कौन से मंजिल का सफर दिखाती सी................ कभी खुशियों का बेला कभी गमों का सैलाब जीवन से भरी दुनिया में जीने की चाह दिखाती सी ना जाने जिंदगी के सफर में कितने रंग दिखाती सी जीने की चाहत दिखाती सी मिलना और बिछुड़ना है ना जाने कौन सी खुशियां जिंदगी के सफर मे...... मंजिल का रास्ता दिखलाती सी चार दिन की जिंदगी में अधूरे ख्वाबों को जिंदगी के सफर में पूरा करने की चाहत जिंदगी जीने की चाहत अलबेली और मस्तानी सी जिंदगी में जिंदगी जीने की चाहत सिखाती सी खुशियों का मेला जीवन से भरी दुनिया में जीने की चाह सिखलाती सी............... ऐ वक्त न ठहरा है ना ठहरेगा जिंदगी तो चलने का नाम गाड़ी है लोग आते हैं चले जाते हैं जीवन से भरी दुनिया में जिंदगी जीने की चाह सिखलाती सी रंग बिरंगी दुनिया में जिंदगी का सफर जीने की चाह दिखाती सी......

पैशन ✍️

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आदित्य और टीना हनीमून से लौटने के बाद कुछ अजीब सा व्यवहार कर रहे थे। बेटा आदित्य मुझसे कुछ छुपा तो नहीं रहे हो बहुत उदास क्यों हो? नहीं मां ऐसी कुछ बात नहीं है। जा बेटा थके हुए हो सफर में जाकर आराम करो। टीना बेडरूम में जाकर सो गई। आदित्य  बरामदे में सिगरेट जलाते हुए मन ही मन सोच रहा था आखिर मां से मैं क्या बताऊं। टीना इतनी बड़ी बात आखिर क्यों छुपाई? क्या सोच रहे हो बेटा बहू इंतजार कर रही होगी। सुबह मुझे भी उठना है बहू को रसोई में पहली बार खाना भी तो बनाना है। बेटा मैंने उसके लिए सोने की अंगूठी बनाई है ठीक है ना तू जब शिमला गया था तब मैंने बनवाया। आदित्य का चेहरा उतर गया क्यों बेटा तुझे पसंद नहीं आया क्या मैं इनसे कह रही थी नेकलेस ले लो पर यह मेरी बात सुनते कहां है। अब बहू आ गई है मेरा साथ देने के लिए तुम लोग तो मेरी बात सुनते कहां हो। आदित्य को धक्का लगा आह मां ने कितने बहू के सपने बुने थे घरेलू संस्कारी बहू चाहिए जो आदित्य को भी खुश रखे। बेटे किस ख्याल में खोए हुए हो आज तक इतना उदास नहीं देखा। आदित्य चुपचाप अपने कमरे में चला गया। पता नहीं क्यों उदास है अभी शादी के तो तीन-च...