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अब तो मुझे यहाँ, सभी चाहते हैं

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अब तो मुझे यहाँ, सभी चाहते हैं। कल तो मेरे साथ, कोई नहीं था।। करते हैं अब तो , सभी प्यार मुझसे। कल तो मेरा दोस्त, कोई नहीं था।। अब तो मुझे यहाँ-----------------।। नफरत थी सबको, मेरी इस सूरत से। मिलाता नहीं था, नजर कोई मुझसे।। मेरे सितारें अब है, बुलंद जो। मिलाते हैं अब हाथ, सब लोग मुझसे।। अब तो मुझे यहाँ-----------------।। बताते थे अपनी मजबूरी , कल सब। मदद मांगता था, उनसे मैं जब।। घर मैंने अब जो, बना लिया है। बुलाते हैं महफ़िल में, मुझको अब सब।। अब तो मुझे यहाँ-----------------।। क्यों भूल गए थे, रिश्ता वो कल को। आये नहीं मुझसे, मिलने क्यों कल को।। मैं तो उन्हीं के ,घर का था हिस्सा। रुलाया उन्होंने , क्यों मेरे दिल को।। अब तो मुझे यहाँ------------------।। साहित्यकार एवं शिक्षक- गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

रस्म तो होगी निभानी

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रस्म तो होगी निभानी, चाहे काबिल हम नहीं। गर निभाई नहीं रस्म तो, कुछ भी काबिल हम नहीं।। रस्म तो होगी निभानी-------------।। जीना है गर जिंदगी को, ऑंसू भी पीने होंगे। रखना है उनको तो खुश ,चाहे खुश हम नहीं।। रस्म तो होगी निभानी-------------।। हुई है हुकूमत हमेशा, मुफ़लिस पर दौलत की। बहुत ही छोटे हैं उनसे, मना कर सकते हम नहीं।। रस्म तो होगी निभानी--------------।। उनको तो क्या होगी हानि, होंगे हम ही कर्ज में। कुछ भी नहीं इज्ज़त हमारी, अजनबी भी हम नहीं।। रस्म तो होगी निभानी------------।। हो गए बर्बाद घर बहुत, रस्मों के इस समाज में। लेगा नहीं कोई खबर कल, चाहे महफूज हम नहीं।। रस्म तो होगी निभानी-------------।। साहित्यकार एवं शिक्षक- गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

हे दिल तुझको किसकी तलाश है

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हे दिल तुझको किसकी तलाश है। क्यों तु उदास है , किसकी प्यास है।। हे दिल तुझको-------------------।। नजरें उठाकर देख, फैली है रोशनी। झिलमिल सितारें हैं, फैली है चांदनी।। तूने चिराग क्यों जलाया नहीं है। क्या बात है, क्यों इतना हताश है।। हे दिल तुझको-----------------।। कर ले तु भी मौज , इन मस्त  लहरों में  जरा झूम ले तु भी, इन ठंडी बहारों में।। मिटा प्यास अपनी तु , इन फुहारों से । रख दिल को खुश, क्यों तु नाराज है ।। हे दिल तुझको-------------------।। धोखा दिया है जिन्होंने, फिक्र उनकी छोड़। लूटा है तुझको जिन्होंने , रिश्ता उनसे तोड़।। तेरे भी है ख्वाब और अरमान बहुत। क्यों तेरी जिंदगी में नहीं उजास है।। हे दिल तुझको--------------------।। रचनाकार एवं लेखक-  गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)