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Showing posts with the label Dr.Vinay Kumar Shrivastava

अग्निवीर बन बैठे अपने ही पथ के अंगारे

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ऐ नौजवां तुम्हें अबतो अग्निपथ पर चलना होगा। देश के तीनों सेनाओं में ही अग्निवीर बनना होगा। ऐसी एक योजना शासन ने तेरे लिए ही बनाई है। देशसेवा हेतु नौजवानों ये योजना ले कर आई है। जब तक खून गर्म है तेरा दहक रही सीने में आग। इस बेरोजगारी में तू इधर उधर कहीं भी ना भाग। देश प्रेम में चार साल की सेवा कर कुछ लो कमा। जैसा पैकेज दिया गयाहै उसका ये लो लाभ उठा। बात समझ में नहीं आरही बिल्कुल ये जवानों के। 4वर्ष की देश सेवा बाद क्या होगा इन जवानों में। कहाँ जायेंगे क्या करेंगे दस परसेंट आरक्षण लेके। नहीं सुरक्षित कोई भविष्य हैं इनके ये सेवाएं देके। विपक्षी पार्टियों नेभी है इनको खूब भ्रमित किया। नई जवानी जोश देख के इनको हैं पथभ्रष्ट किया। इनके कदम उठे हैं गलत दिशा में तोड़फोड़ करते। अपने विरोध के प्रदर्शन में येसब आगजनी करते। धधक रहा देश आज क्रांतिवीर अग्निपथ पे खड़े। देश सुरक्षा ये ना सोचें निज भविष्य के लिए लड़ें। देश की संपत्तियों को नौजवान नुकसान पहुंचाएं। होने लगीहै धर पकड़ इनके ऊपर मुकदमें लगाएं। शासन सत्ता भी समझाने में इनको होजाती फेल। देशद्रोह की धाराओं में भेज रहीहै इनको वो जेल। ऐसे दाग...

फलों का राजा "आम" कितना खास

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आम के पेड़ में देखो बौर लगे, छोटे-छोटे टिकोरे भी तो लगे। बढ़ेंगे धीरे-धीरे एक-एक आम, गुच्छों में लगते ये हरे-हरे आम। आम से लदे पेड़ ये झुक जाते, राही,बच्चे सभी देख हैं हर्षाते। पुदीना-आम की चटनी बनेगी, जलजीरा अचार खटाई बनेगी। तोता मैना चिड़ियां भी चखती, पेड़ों से ही पक  सींकर गिरती। पेड़ की पकी सींकर है मिलती, बच्चों हम सब को भी मिलती। पाल आम के खुब डाले जाते, बाजारों में आम ही भर जाते। पक्के-पक्के पीले-पीले आम, अमीर गरीब सब खायें आम। मीठे बहुत ये स्वादिस्ट हैं आम, लंगड़ा,चौसा एवं सफेदा नाम। दशहरी,आम्रपाली, तोतापारी, सिंधोरी,नीलम,फजली आम। देशी,भदइँ,बहेरी बम्बइया नाम, अनेकों प्रकार के होते हैं आम। गुड़म्मा बनायें अमावट भी डारें, नमकीन,मीठा पना बनाये आम। खाने चूसने में अच्छा भी लगता, दो रोटी ज्यादा ही खवाये आम। सभी फलों का ये होता है राजा, छोटे बड़े सभी को हर्षाये आम। बच्चों ये आम रसीले खुब खाना, शरीर बढ़ाये स्वस्थ्य बनाये आम। रचियता : डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

रिश्तों की डोर से गुँथी माला अनमोल

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गिरी हुई कीमती चीजों को,बेशक लोग उठा लेते। अपनी हो या हो वो पराई,उसको गले लगा हैं लेते। रिश्तों के मोती की माला,होती है सबसे अनमोल। इन्हें बिखरने कभी न देना,इनके होते नहीं है तोल। अगर कभी ये टूट भी जायें,फ़ौरन लेना इन्हें बटोर।  सतरंगी मोती से ही हो,घरआंगन में रोज अंजोर।  खुद के हाँथों की सभी,उंगलियां 1 बराबर न होये। सब की अपनी कीमत है,मुड़ जायें तोये मुट्ठी होये।  मुट्ठी है संयुक्त उंगलियों की,शक्ति रिश्तों की जान।  परिवार सुखी रहताहै तभी,होता जब इनका मान। रिश्तों की माला यार है,बच्चे बूढ़े पैरेंट्स का प्यार। इन्हें कभी न टूटने देना,इसके बिना जीवन बेकार। जिस घरमें रहता है एका,हो छोटे बड़े का सम्मान। उससे अच्छा न घर कोई,पाता सदा है जग में मान।  जब तक साँस चल रही,हर पल को उत्सव बनायें। याद रखें घर बाहर वाले,घरका ऐसे माहौल बनायें। छल कपट एवं बेइमानी,जीवनमें कभी न ले आयें। हँस खेल आपसी प्रेम से,जीवन का आनंद उठायें। इंसान अगर बन कर के,जीना सीख सका न कोई। सुख चैन आराम कभी वो,समझो जीवन में न होई। रचयिता : डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापग...

अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस-21 जून

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आज ये 8वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए हैं, स्कूलों व विश्व संस्थाओं ने ये दिवस मनाए हैं। जोभी जीवन में योग महत्व को जान लिया है, अच्छे स्वास्थ्य केलिए जरूरी है मान लिया है। योग हमारे भारत के ऋषियोंमुनियों की है देन, हजारों साल पूर्व चरक,धवन्तरी एवं ये सुखेन। प्राचीनतम परंपरा में रहा स्वास्थ्य का आधार, दुनिया मान रही है हमारे ऋषियों का आभार। स्वामी रामदेव योग को वास्तव में दिए विस्तार, कितने शिविर लगा देश दुनिया में किए प्रचार। दुनिया भर में योगा को पहुँचाया घर-2 द्वार-2, करनेलगे योग ज्यादातर पायें रोगों के उपचार। मोदीजी 2014में संयुक्त राष्ट्र में किया आह्वान, योग का घोषित करें कोई 1विश्वदिवस विद्वान। संयुक्तराष्ट्र में इसके उपयोगिता पर हुआ मंथन, 177देश के सदस्योंने इसको कर दिया समर्थन। दिसम्बर2014 में इस हेतु तय किया माह जून, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तिथि घोषित है 21जून। विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योगदिवस 2015से है शुरू, भारत नईदिल्ली के राजपथ से बना विश्व गुरु। तबसे होता आरहाहै 8वां योगा दिवस इस बार, योग करें निरोग रहें एवं रोगों से पाएं बेड़ा पार। स्वस्थ शरीर रहे इससे नई स्फूर्ति ऊर्ज...

दिग्भ्रमित युवा एवं भारत देश

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आज दिग्भ्रमित युवा हो रहे देख देख, कर दूसरों की वो जिंदगी आलीशान। मेहनत एवं संघर्षो का उन्हें पता नहीं, बाप के दौलत पर बघारें शेखी शान। कितना किया पिता ने कड़ा परिश्रम, तो शायद यह सुख का दिन है आया। कितनी मेहनत की होगी उन्होंने तब, कितना बहा पसीना थकन है आया। ये दिग्भ्रमित युवा हैं अपने ही देश में, रोजगार व्यवसाय खोजते परदेश में। भूल बैठे हैं अपने अंदर का दमखम, कर रहे शिकार भेड़िये आके देश में। पश्चिमी सभ्यता देखके युवा वैसे ही, आज रहना करना  जीना वही चाहें। अपनी संस्कृति एवं सभ्यता देश की,  बिल्कुल भी वह अपनाना नहीं चाहें। अपने मन के मर्जी पर है वह चलता, बड़े बुजुर्गों की एक भी बात न मानें। दिग्भ्रमित युवा बहकावे में आ जाते,  लालच में जल्दी आके बात वे मानें। गुस्से में रहते हैं ज्यादातर दिग्भ्रमित, सबसे बड़ी खराबी आज युवाओं में। नहीं सोचता भला स्वयं एवं राष्ट्र का, उत्तेजना बढ़ गई है आज युवाओं में। निर्धारित लक्ष्य पाने को तड़पडता है, ये पैसा ही जल्द कमाना है मकसद। सच्चे रास्ते से आये या गलत राह से, जल्दी धनवान बन जाना है मकसद। कुछ पाने के लिएकुछ खोना पड़ता, मेहनत जुनून लगन से ...

हर घर की शान पिता-होते बड़े महान पिता

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       (पितृ दिवस विशेष कविता) पितृ दिवस की बेला है आई।                 हरेक पिता को मेरी बधाई।। पिता हमारे घर की होते शान।                  पिता हमारे होते बड़े महान।। पिता जनक है,पिता है साहस।                पिता है इज्जत और सम्मान।। बच्चों की पूँजी और ताकत है।                पिता ही बच्चों की है पहचान।। घर की एक एक ईंट में शामिल।               पिता का ही खून पसीना रहता।। सारे घर की रौनक है पिता से।                 घर की जान पिता सब सहता।। हर शोहरत,रुतबा मान पिता से।               बच्चे का गर्व अभिमान पिता से।। बच्चों में हिम्मत पिता से बढ़ती।                पिता के बल से पीढ़ी है चलती।। रिश्तों का रिश्ता सम्मान पिता हैं।           ...

ग्रहों की चाल का जीवन में प्रभाव व महत्व

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ग्रहों की चाल का जीवन में महत्व प्रभाव है। मिट्टी छुये  बने सोना  कभी हरेक अभाव है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड  विभाजित है 360 अंशों में। हमारी हर राशियाँ विभाजित है 30 अंशों में। हमारे ब्रह्माण्ड में कुल राशियाँ ये 12 होती हैं। नक्षत्रों कीभी कुल संख्या मिलाके 9 होती है। हमारी हरेक राशि विभाजित है 30 अंशों में। इन्हीं 12 राशियों का योग यह 360 अंशों में। हर ग्रह की गति राशि की 30 डिग्री सीमा है। इसे पार करनेकी भी भिन्न-2 समय सीमा है। ग्रहों की इस गतिशीलता को गोचर कहते हैं। इसे मौजूदा ग्रहकी राशिगत स्थिति कहते हैं। सूर्य चंद्रमा  मंगल बुध गुरू  सब ग्रह होते हैं। शुक्र शनि राहु एवं केतु सहित 9 ग्रह होते हैं। इन9 ग्रहों में सबसे तेज गति चंद्र में होता है। ग्रह चाल से येसारा जीवन प्रभावित होता है।  ग्रहों के गति से ज्ञान होता ये जीवन कैसा है। ज्योतिषीय गणनाओं से पता लगे ये कैसा है। ग्रहों के चाल सेही पता लगे आपका ये हाल। ग्रहों के चाल सेही पता लगे आपका ये चाल। ग्रहों की चाल प्रभावित करती है धंधा पानी। ग्रहों की चाल प्रभावित करती है राजा रानी। जीवन में घटित हो रही अच्छ...

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस

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रानी लक्ष्मीबाई को उत्सर्ग दिवस पर नमन करें। देकर अपनी श्रद्धांजलि सच्ची कथा श्रवण करें। पिता थे मोरोपंत ताम्बे व माता भागीरथी बाई। बचपन में नाम मणिकर्णिका कहें मनु भी भाई। 19नवम्बर1828 बनारस में जन्मी लक्ष्मीबाई। चार वर्ष के उम्र में माँ स्वर्ग गईं भागीरथी बाई। बचपन में  शिक्षा दीक्षा पिता मोरोपंत देते गये। माँ की मृत्यु बाद पिता मनु को लेके बिठूर गये। तात्या टोपे से शास्त्रों व अस्त्र शस्त्र शिक्षा पाई। नाना साहब से भी हर विद्या की है  शिक्षा पाई। बिठूर में रानी लक्ष्मीबाई को छबीली कहते थे। इस  वीरांगना कन्या की लोग चर्चायें  करते थे। 13वर्ष के आयु में ही छबीली का विवाह हुआ। झाँसी शासक गंगाधर राव नोवलकर संग हुआ। 1851में लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। 3माह बाद ही ये पुत्र अकाल मृत्यु प्राप्त किया। वंश चिन्ता में बीमार राजा ने बच्चा गोद लिया। गंगाधर ने दामोदर राव को उत्तराधिकार दिया। 20नवम्बर1853 को गंगाधर राव की मृत्यु हुई। दत्तक पुत्र को वारिस मानें अंग्रेजों से ये रार हुई। मार्च1854में अंग्रेजों ने लक्ष्मीबाई को निकाला। झाँसी किला छोड़ दें रानी ऐसा आदेश निकाल...

समुंदर के पहरेदार वतन के जांबाज सिपाही हैं

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हमारे देश की सेना में,समुंदर के भी सिपाही हैं। समुंदर के हैं पहरेदार,वतन के सच्चे सिपाही हैं। नेबलफोर्स का जांबाज,जहाजों का सिपाही हैं। समुंदर में चौकसी में,हमेशा रहते वे सिपाही हैं। भारत की सेनाओं में,जरूरी यह भी नौसेना है। पनडुब्बियों में भी है,जल जहाजों में नौसेना है। हमेशा ही समुंदर में,किनारों पर रही नौसेना है। युद्धक साजोसामान से,सजी अपनी नौसेना है। दुश्मनों की हरकतों पर,नजर रखती ये सेना है। किसी खतरे में करती है,सुरक्षा यह जो सेना है। किसीभी जंग में आती है,बड़े ये काम की सेना। समुद्री हमलों को ये थामें,जवाब देती यह सेना। कोईजब युद्ध छिड़ता है,ये तीनों सेनाएं लड़ती। वायु में हवाई जहाजों से,वायु सेनाएं है लड़ती। जमीं पर टैंकों तोपों से,ये थल सेनाएं हैं लड़ती। समुंदर से समुंदर में शत्रु, से नौसेनाएं हैं लड़ती। देश रक्षा में रहती हैं तीनों,ये सेनाएं सिपाही हैं। कठिन ड्यूटी पे रहते हैं,सदा सेनाएं सिपाही हैं। यह सच्चे देश रक्षक हैं,जलसेना के सिपाही हैं। हमारे वतन के पहरेदार,यह समुंदर सिपाही हैं। रचयिता : डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

ढलती उम्र में वैराग्य भी जरूरी है

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ये दुनिया संसार है रंगीला मायामोह से भरा है। चक्कर में इसके आकर भला कौन न पड़ा है।। परिवार गृहस्थी की दुनियादारी में क्यों पड़ा है। जीवन ये जो मिला है प्रभु एहसान ये बड़ा है।। इस जग में जब हैं आये माँ के गर्भ में था वादा। धरती पे जाके प्रभु जी निभाएंगे अपना वादा।। मुझको निकालें बाहर गुणगान का किया वादा। दुनिया में आके भूल गया ईश्वर से किया वादा।। घर परिवार ही संसार में लगने लगा यह अच्छा। मायामोह का जाल भ्रमित करके रखा अच्छा।। निज घर भी बस गया व सब लगने लगा अच्छा। छूटता ना मोह का बंधन टूटता न रिश्ता सच्चा।। ईश्वर ने ही बनाया है बांटा उम्र की एक अवस्था। सब भोगों के अंत में आती वैराग्य की अवस्था।। लेचुका बहुत है आनंद निज जीवन के व्यवस्था। अब वक्त आया है सब तज वैराग्य की अवस्था।। ईश्वर में मन लगाओ अब ईश्वर के गुण ही गाओ। जीवन को अपने मानव कुछतो सफल बनाओ।। छोड़ो ये मोह माया व ये दुनियादारी मुक्ति पाओ। वैराग्य लो गृहस्थी से व भवसागर से पार पाओ।। जिह्वा का स्वाद छोड़ो इस शरीर का सुख छोड़ो। धन दौलत से मोह छोड़ो जर जमीं से भी छोड़ो।। वैरागी जीवन जिओ अंत में कीर्तन भजन जोड़ो। प्रभु से जो वादा कर आये प्रभ...

किसी भीड़ में खो मत जाना

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रहो भले ही कभी किसी भीड़ में, अपनी अलग ही पहचान बनाना। देश प्रेम ही रखना अपने दिल में, रचनात्मक सोचना एवम बनाना। भीड़ भी अपनी शक्ति दिखाती है, पर बुरे काम में कभी भी न रहना। भीड़ अगर हो राष्ट्रप्रेम प्रदर्शन की, सच के रास्ते पर निर्भीक है रहना। जीत उसी की सदा हुई है ये होगी, मानवता के लिए चला जो पथ में। राह में चाहे जितने भी काँटे आते, एक दिन तो शूल फूल बने पथ में। भीड़ में केवल भेड़ें हैं चलती जाएं, उनको पता नहीं ये कहाँ है जाना। बिना ज्ञान के लक्ष्य बिना चली वो, गिरे कुएं में 1 तो सभी गिर जाना। कोरोना गया नहीं फिर बढ़ रहा है, देखें कैसे भीड़ हैं ये मास्क लगाए। पालन करो कोविड प्रोटोकॉल का, खुदभी भीड़ में मास्क रखें लगाए। मास्क लगाए भीड़ देखके वायरस, देखें कैसे भीड़ से वह भाग रहा है। शायद वो देश छोड़ भाग जाने को, मास्क देख लंबी दौड़ लगा रहा है। भीड़ किसीकी हो सेना पुलिस की, नेतृत्व तो केवल योग्यताधारी करे। हरेक भीड़ का एक नेता भी होता, किन्तु नेतृत्व तो वही दो धारी करे।  कहते हैं हिन्दुस्तान भेड़िया धसान, पर सच में कुछ बात अलग ही है। जिसमें होता है दम खम ये अपना, उसकी तो ये हर बात अलग ही ...

छोटी सी आशा

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छोटी छोटी आशाओं में जीना सीखें। महत्वाकांक्षाएं घटा कर जीना सीखें। जन्म मिले तो जीने की छोटी आशा। मतलब भर पढ़लिख लेने की आशा। रोजगार से लगने की है छोटी आशा। निज घर बसने की रखें छोटी आशा। प्रभु पत्नी की गोद भरे की है आशा। घर में बच्चे खेलें कूदें है छोटी आशा। हर इच्छा जो अपनी छोटी सी आशा। जीवन ढंग से बीत जाए छोटी आशा। अपनी जरूरतें पूरी हो सकें ये आशा। मानव को रहती ही ऐसी छोटी आशा। इंसा को सुख मिले जभी छोटीआशा।  छोटी-2 आशाओं की ही हो प्रत्याशा। ईश्वर सब की पूरी करते छोटी आशा। कर्म करें तो फल की रखें नहीं आशा। मिलेगा मीठा फल होगी नहीं निराशा।  बस एक यही अपनी छोटी सी आशा। छोटी-2 आशाओं से भरी एक आशा। ऐसे ही जीवन काटें रखें छोटी आशा। रचयिता : डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

सम्पूर्ण सृष्टि ये चौदहवीं का चाँद है

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चौदहवीं का चाँद है ये प्रकृति हमारी। कितनी सुहानी सुंदर है धरती हमारी। देखो नजर उठाके जिधर जन्नत लगे। कश्मीर में नजारे धरा की जन्नत लगे। श्वेत बर्फ से ढका हिमालय मन भाये। पहाड़ का ये झरना कितना मन भाये। नीला नभ हरित ये धरती बड़ा सुहाए। जलनिधि की ये लहरें कितना लुभाए। वन उपवन जीवजन्तु सब इतने प्यारे। तरह-2 के पुष्प खिले हैं कितने न्यारे। जिस माँ की कोख  से हुए अवतरित। राम कृष्ण बुद्ध आदि पैदा अवतरित। हर एक माँ खुद ये चौदहवीं का चाँद। सम्पूर्ण सृष्टि ही ये चौदहवीं का चाँद। इतनी सुंदर होती हैं भारतीय नारियाँ। ऐसी कहीं ना दिखती जग में नारियाँ। 14वीं का चाँद हैं ये पूनम का चाँद हैं। जननी हैं सृष्टि की ये 1शीतल चाँद हैं। पशु पक्षी कीट पतंगे दिखें बड़ा सुंदर। रंग बिरंगी तितली मयूर कबूतर सुंदर। घोड़े हाथी गाय बैल भैंस बकरे प्यारे। कोयल बुलबुल पपीहे तीतर हैं प्यारे। खरगोश तोते बिल्ली कुत्ता भी सुंदर। घर के आँगन की गौरैया भी है सुंदर। पर्यटन स्थल धार्मिक स्थल भी सुंदर। अयोध्या काशी  मथुरा वृंदावन सुंदर। इस प्रकृति की हर रचना बहुत सुंदर। मानव निर्मित हर सरंचना भीहै सुंदर। प्रभु की सम्पूर्ण स...

युवाओं में नशा की लत पाप का सूचक-अपराधों का मूल है

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ऐसा पहले कभी नहीं था,जैसे आज है बॉलीवुड। कितना था आदर्श चरित्र,हीरो हीरोइन सभी गुड। जिनके काम को देखा है,वे सब अभिनेता थे गुड। आज नशा में चूर दिखा है,ज्यादातर ये बॉलीवुड। नाम किया बदनाम स्वयं का,नजरों से उतर रहे हैं। हैस हशीस कोकीन ,सीबीडी आयल में तैर रहे हैं। सुन कर है दुःख होता,किस रस्ते हैं चल पड़े सभी। ये कैसी सीख दे रहे हैं, आने वाली पीढ़ी को सभी। उड़ता पंजाब बनाया है,उड़ रहा समूचा बॉलीवुड। ऐसा क्या इस धुएं में है,ये मकड़जाल ही वेरी गुड। कुछ तो इस पर सोचें,समझें इसका वहिष्कार करें। किया है अब तक गलती, तो उसको स्वीकार करें। नशा पाप का सूचक है,व यह अपराधों का मूल है। इससे कोई मजा है मिलता,  यही समझना भूल है। कुछ ही देशों ने है फैलाया,सब से गन्दा व्यापार है। युवा पीढ़ियां इसमें फंसती,हो रही रोज शिकार है। भारत कमजोर बनाने का,दुश्मन देश की चाल है। होगा नशा काफ़ूर सभी ,जितना बड़ा भी जाल है। फ़ैल रहा है गवा जैसे,नेनुआ तरोई करेला लौकी। एक जगह बीजो इसे तो,तेजी से पकड़ ले डौकी। खून चूस लेता है,नशे की आदत जो पड़ जाती है। ड्रगेटिक्स बना देता है,ड्रग बिना नींद ना आती है। हीरो-हिरोइन या प्रोड्यूसर,या ...

अगाध प्रेम की कई निशानी

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प्रेम शब्द ही है यह बड़ा निराला, ऐसा कोई नहीं जो किया ना हो। निज जीवन में प्रेम प्यार इश्क में, किसी का संग ना कोई जिया हो। लैला ने किया मजनूं से जीवन में, बेपनाह मोहब्बत इन दोनों में थी। शीरी ने किया फरहाद से बेइंतहा, मोहब्बत जवानी इन दोनों में थी। हीर एवं रांझा की मोहब्बत इश्क, सब सुनते थे सब की जुबानी थी। राजा भरत-शकुंतला के प्रेम का, किस्सा भी सुने ऐसी कहानी थी। अकबर व जोधा बाई के बेपनाह, को भी दुनिया ने सुना है देखा है। शाहजहां मुमताज बेगम के प्यार, को भी दुनिया ने सुना है देखा है। अगाध प्रेम की निशानी ऐसी एक, ताजमहल शाहजहां का बनवाया। दुनिया का सातवां ये 1 अजूबा है, सफेद संगमरमर का जो बनवाया। ये तो हुई कुछ राजा महाराजा का, कुछेक शहंशाह एवम नबाबों का। ऐतिहासिक किस्से भरे पड़े हुए हैं, इश्क से राजे महाराजे नबाबों का। प्रेम तो अमीर गरीब सभी करते हैं, अपने बल बूतों की भी निशानी है। किसी की है अनुपम ताजमहल तो, किसी का शिशु ही प्रेम निशानी है। किसी के कान में झुमका बाली ये, गले में ये मंगलसूत्र प्रेम निशानी है। किसी के हाथों में चमके जो कंगन,  सोने हीरे का ये हार प्रेम निशानी है। किस...

चुनावी गठबंधन व अन्य गठबंधन

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गठबंधन का दौर चल  रहा है आज चुनावों में। दो-दो तीन दलों का होता गठबंधन चुनावों में। राजनीति में होता रहताहै अक्सर ये गठबंधन। कैसे जीतें लोग चुनावी गणित काहै गठबंधन। सर्वप्रथम  ईश्वर बनाता है जोड़ों का गठबंधन। दर-दर भटके पिता बेटी का ढूँढे वो गठबंधन। जब तक जहाँ लिखा होता वह घर न मिलता। तबतक रिश्ता न होता न बेटी का वर मिलता। 2परिवारों के 2अजनबियों का है एक मिलन। परिणय सूत्र में बँधते हैं तो होता मधुर मिलन। विवाह मंडपम में दूल्हा-दुल्हन का गठबंधन। चुनरी के संग अंगौछे की  टोंक का गठबंधन। सात फेरे संग-संग लेते हैं बाँधे हुए गठबंधन। सात वचनों से बंधा हुआ है जीवन गठबंधन। जीवन भर संग जीने मरने  का यह गठबंधन। शुभ कार्यों में होता  पति-पत्नी का गठबंधन। कायस्थों में 1प्रथा होती जिसे कहें गठबंधन। प्रथम गर्भस्थ शिशु का 7वें माह में गठबंधन। कहीं-कहीं इसे कहतेहैं गोद भरी की है पूजा। मात-पित्र बनने के पूर्व गठबंधन की है पूजा। कुछ गठबंधन स्वार्थ की भेंट भी चढ़ जाते हैं। मन का मीत नहीं मिलता तो भी चढ़ जाते हैं। राजनीति में भी गठबंधन टूटते बनते रहते हैं। तय बातों से अलग चले तो ज्यादा...

जीवन में योग का महत्व अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का शुरुआत व इतिहास

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योग हमारे भारत के ऋषियों मुनियों की देन, हजारों साल पूर्व चरक,धवन्तरी और सुखेन। प्राचीनतम परंपरा का यह स्वास्थ्य का आधार, दुनिया रही मानती हमारे ऋषियों का आभार। स्वामी रामदेव ने इसे वास्तव में दिया विस्तार, कितने शिविर लगा देश दुनिया में किये प्रचार। दुनिया भरमें इस योग को पहुँचाये हर घर द्वार, करने लगे योग ज्यादातर पायें रोगों के उपचार। मोदीजी 2014 में संयुक्त राष्ट्र में किया आह्वान, योग का घोषित करें कोई १विश्व दिवस विद्वान। संयुक्त राष्ट्र में इसकी उपयोगिता पर हुआ मंथन, 177 देश के सदस्योंने इसको कर दिया समर्थन। दिसम्बर 2014 में इस हेतु तय किया माह जून, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तिथि है घोषित 21जून। विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2015 से है शुरू, भारत नई दिल्ली के राजपथ से बनाहै विश्व गुरु। मोदी के नेतृत्व में योग केलिए जुटी भीड़ अपार, योगा जो किये प्रथम दिन संख्या थी 35 हजार। तबसे होता आरहा ये 7वां योगा दिवस इस बार, योग करें निरोग रहें और रोगों से होये बेड़ा पार। सुखी शरीर रहे इससे व नई स्फूर्ति ऊर्जा मिलती, मन प्रसन्न रहे इससे व चेहरे पे आभा भी दिखती। अमन चैन के संग जीवन में हरपल ख...

हे!सूर्यदेव तुमसे ही होती नई सुबह

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जीवन की हर सुबह सुहानी होती है। मनमोहक ठंडी भोर सुहानी होती है। सूर्यदेव का स्वर्णिम लाल रंग प्यारा। कितना सुंदर लगता  कितना न्यारा। धीरे-2 सूर्य की किरणें नभ से आएं। धरती पर अपना  उजियारा फैलाएं। सोते पक्षी जग जाते  कलरव करते। मुर्गे की सुन बाग़ खाट से उठ पड़ते। प्रभु भजन व स्नान ध्यान को जाते। पशु पक्षी इंसान उपवन खिल जाते। बुलबुल बोले व कोयल राग सुनाए। गमलों-पेड़ों में  पुष्प गुच्छ मुस्काए। माँ कहे सुन भोर हुई उठ मेरे लाल। बिस्तर छोड़ पढ़ लिख प्रातः काल। पढ़े भोर में जो वो याद हो जाता है। स्कूलों में बच्चा वही फर्स्ट आता है। उठ भोर में किसान करता है काम। महिला घर में करती सुबह से शाम। नई भोर जीवन में सबके रोज आए। भगवान भाष्कर ये खुशियां फैलाए। हे!सूर्यदेव तुमसे ही होती नई सुबह। जीवन आनंदित हो दिन रात सुबह। रचयिता : डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

ईश्वर चाहे सबको कोई भेदभाव नहीं करता

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किसी से भेदभाव रखना कोई अच्छी बात नहीं। दिल में हो स्थान सभी के प्रति आदर राग नहीं। हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी तो हैं ये इंसान। सबके रंगों में एक ही खून ये बहता है ये इंसान। लहू का रंग एक है सबके नीला पीला नहीं लाल। बिना भेदभाव के रक्त चाहिए होता है यह लाल। जिसे खून चाहिए होता वह जाति धर्म न देखा है। मानवता के खातिर यारों रक्त बैंकों में न देखा है। देते हैं सब बिना भेदभाव के जानें यह बचाने को। लेते हैं सब बिना भेदभाव के जानें यह बचाने को। अब समाज में वैसे भी देखो भेदभाव नहीं कोई। हर समाज में लोग होरहे शामिल भेद नहीं कोई। सामंतवादी शासन में ये भेदभाव रही एक कुप्रथा। समाजवाद व धर्म निरपेक्षता में कोई नहीं कुप्रथा। अबतो सब एक कुएं से पानी पीते हैं साथ में खाते। अगल बगल रहते हैं सब कहीं भी ये आते हैं जाते। कुछ जमीदारों को अबभी जमीदारी काही है दम्भ। जमीदारी उन्मूलन हो गया जीते अब भी उसी ढंग। काम काज खेती बाड़ी मजदूरी करते थे जो पहले। वह भी मिलते नहींहैं अब आसानी से जैसा पहले। अब तो सवर्ण का कोई भी जोर नहीं न जमाना है। अबतो केवल पिछड़ी जातियों का ही ये जमाना है। जाति पाति की गणित को देखो आई र...

सामने वाली खिड़की में मेरा दिल है

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मेरे सामने वाली खिड़की में,1शोख हसीना रहती है। कुछ कहती तो नहीं मुझसे,रह-रह के देखा करती है। ऐसे क्यों लगता है मुझको,वो मुझे देख कुछ कहती है। दिल कहता है मेरा मुझसे,प्यार ये शायद वो करती है। उसके रोज-2 के हरकत से,दिल उसपे आ गया मेरा। यूँतो मेरे पास है मेरा दिल,कोई वश नहीं उसपे मेरा। जब मैं निज खिड़की खोलूँ,उसे पाता खड़ी डाले डेरा। मेरा दिल ये मेरे वश में नहीं,दिल चुरा ले गई वह मेरा। अब चैन इधर भी नहीं रहा,उधर भी तो शायद बेचैनी। वो केवल मुझे देखती रहती,बढ़ जाती मेरी तो बेचैनी। ऐसे में नींद कहाँ आती यारों,उलझन ये रहती बेचैनी। ख्वाबों में भी उसके खातिर, तड़प रहती और बेचैनी। भोली सूरत है सलोनी मूरत,चेहरे पे चाहत की आह। गोरे गाल और नयन कजरारे,होठ गुलाबी गोरी बाँह। काली जुल्फें व नजरें प्यासी,यौवन का न कोई थाह। अलबेला है रूप गजब का,बढ़ गई देख मेरी ये चाह। ख्वाबों में मलिका वो मेरी,मेरा सपना सच हो जाता। जन्म-जन्म की वो मेरी हो जाती,मैं उसका हो जाता। मेरी खिड़की के सामने वाली,शोख हसीना से नाता। मेरे जीवन में कुछ ऐसा ही,उस खिड़की से हो जाता। रचयिता : डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता-पी...