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गजल

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आसमान के तारों के मानिंद अनेक हसरतें हैं मेरे सीने में पर जो चांद बन के  तू आ जाए पास मेरे खुदा की कसम  मजा ही आ जाए जीने में मेरे मन में खुशबू बिखेरने वाले तुम मेरे लिए गुलाब जैसे हो तुमसे ही रंगो ताजगी है मुझ में तुम ही तो मेरे गमों के कातिल हो।। तुम्हारा जो साथ मिला है मुझे हमदम मेरे हर ख्वाब पूरे हुए समझो तुम मेरी जिंदगी का सदाबहार कुसुम सच! तुम औरों से अधिक मेरे हो         श्वेता प्रसून

'"कहता है आभूषण'"

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कहता है अलता- महावर रहो खुश सर से पांव तलक तुम मेहंदी कहती मेरे जैसी जीवन रंगों से रोशन करो तुम अंगूठी बिछिया कहता हमसे एक बात बड़ी प्यारी सुंदर बंधन में बंध गई देखो कन्या एक सु कुमारी कमरधनी कहती करो काम मनोयोग से सारा मांग टीका कहता रहे हमेशा जीवन साथी का सहारा एड़ी से चोटी तक आभूषण संदेश यही देता है प्रेम बंधन रंग और उल्लास जीवन में सौन्दर्य भरता है

नारी की चाह

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आपके प्रेम घृत के कारण ही प्रियवर आज मैं रौशन हूं। आप‌ ही तो सर्वस्व हैं मेरे मैं आपका अवलम्बन हूं।।       मैं केवल एक अनछुई सी कली थी        आपके साथ ने प्रसून बनाया मुझको।      अनगढ़,बेढब एक शिला से,आपके कारण        सुगढ,सुगम बनना आया मुझको।। जीवनसाथी,साथ तुम्हारा मेरे जीवन के साथ ही बना रहे। मेरे हृदय के अंतिम स्पंदन तक सिंदूर मेरे मांग में सजा रहे।।

जिंदगी

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जिंदगी.....         उलझनों से भरी‌ हुई जिंदगी.......          ख्वाब से सनी हुई जिंदगी........           प्रियवर के आगोश सी जिंदगी.......           रात है खामोश सी जिंदगी.......            अनकहा सा दर्द है जिंदगी.......              तकलीफ है,फर्ज है जिंदगी........               खूबसूरत है छंद सी जिंदगी........                मधुर है मकरंद सी जिंदगी........                अर्चना है ईश का जिंदगी........    ‌‌।              कर्म है पुनीत सा जिंदगी........                   ‌ पूनम की रात है जिंदगी.........                आशा भरा प्रभात है जिंदगी.......         ...