आखिरी अदालत
कर्मों का जीवन है, कुछ करले जरा मुसाफिर। जाने कब होना पड़ जाए रब के जहाँ मे हाजिर। कर्मों की ही दौलत तू साथ ले के जाएगा।, क्या है तेरा क्या है मेरा सब धरा रह जाएगा। उस पिता ने दिया है जीवन, क्या यूं ही बितायेगा। होगा जब फैसला वहाँ पर, फिर क्या तू बताएगा। सफर में कुछ ऐसा करले, तुझे याद करे दुनियाँ। आँखों मे आँसू आ जाएँ, याद में तेरे खातिर । कर्मों का जीवन है, कुछ करले जरा मुसाफिर। जाने कब...