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शुभकामना संदेश और मोबाइल–हास्य कविता

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दुनियादारी की दौड़भाग में अब समय है मिलता कम आरंभ हुआ इसीलिए फोन पे शुभकामनाओं का चलन अवसर होली, दीवाली का या क्रिसमस, ईद का हो त्यौहार डेटा ऑन करते ही धड़ाधड़ मेसेज आते अपार शुभ संदेशों की फोटो से गैलेरी फुल होती सब संदेशों का रिप्लाई करें नैतिक जिम्मेदारी होती इंटरनल स्टोरेज की समस्या, मेमोरीकार्ड में स्पेस भी है कम  पर शिकवा किसी से कर नही सकते क्योंकि त्यौहारों का है मौसम     प्रीति ताम्रकार     जबलपुर(मप्र)

दिमाग करे हड़ताल

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परीक्षा के इस मौसम में हर विद्यार्थी बेहाल प्रश्नपत्र को देख सबका दिमाग करे हड़ताल मैथ्स की तैयारी में रट डालें सारे थ्योरम और फ़ार्मूले चाहे प्रैक्टिस किये हों  सारे के सारे सवाल प्रश्नपत्र को देख सबका दिमाग करे हड़ताल फ़िज़िक्स और बायो,केमिस्ट्री हर चेप्टर पढ़ने में गुजरे रात्रि सो न पाने का,  चाहे न करे मलाल प्रश्नपत्र को देख सबका दिमाग करे हड़ताल रुला देती हिस्ट्री, जॉग्राफी कितना भी पढ़ें, रहता है बाकी पासिंग मार्क्स पाकर भी  हो जाते हैं निहाल प्रश्नपत्र को देख सबका दिमाग करे हड़ताल आखिर क्यों होती है परीक्षा यह तो होती है पर+इच्छा चौबीस घण्टे पढ़कर भी न बेस्ट हो सके ऑल प्रश्नपत्र को देख सबका दिमाग करे हड़ताल प्रीति ताम्रकार जबलपुर ,मप्र

मुझे तुम बसंत से लगते हो

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जिसे देख सुमन सी मैं खिलती उर में प्रणय की लहर उठती जब अंक में तुम भर लेते हो मुझे तुम बसंत से लगते हो मेरे नाम में ही अनुराग बसा और तुम पर्याय मदन के हो मेरे प्रेम की बातें करते हो मुझे तुम बसंत से लगते हो  आई है रुत ये मादक सी और मै हूँ घटा एक चंचल सी जब मस्त पवन से बहते हो मुझे तुम बसंत से लगते हो हर पलछिन में छाई उमंग मैं उड़ने लगी बनकर पतंग जब तुम नभ बन छू लेते हो मुझे तुम बसंत से लगते हो           ✍🏻प्रीति ताम्रकार                 जबलपुर (मप्र)

जन्मदिन विवाह का

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मुबारक हो प्रियतम आज जन्मदिन विवाह का मीठी नोंकझोंक का प्रेम के प्रवाह का मांग सजाई सिंदूरी लेकर फेरे सात वचन दिया जीवन भर न छूटेगा अपना साथ अठारह वर्षों की यात्रा में कुछ कठिन मोड़ भी आए कभी आपसी समझ की कमी हुई कई बार विचार टकराए पर अपने प्रेम का पुष्प प्रिय कभी नही मुरझा पाया कभी हम झुक गये, कभी तुम झुके हर बार सीखा एक सबक नया तेरे प्यार का मिला संबल जब आंखों में आँसू आये जब गम का छाया अंधेरा तुम खड़े थे आस दीप जलाए तुम भी दिल मेरा लगे कहीं न संग हमेशा रहना हमदम हर उम्र तेरे लिए सजती रहूँ मै है ख्वाहिश रहूँ सदा सुहागन       प्रीति ताम्रकार        जबलपुर

लेते हैं एक सेल्फी

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सुनो, कल हमारी सालगिरह है हो जाओ न रेडी एफबी , व्हाट्सएप पर पोस्ट करने को लेते हैं कुछ सेल्फी देखो मत टालो न जल्दी ही करें ये काम कल सबको फोन पे थैंक्यू कहने में ही होगी सुबह से शाम स्क्रब, शेविंग कर फेस चमकाना और बालों को रंग लेना  मैं सजधजकर तैयार रहूँगी तुम भी थोड़ा मेकअप कर लेना एक रंग के कपड़े पहन कर हम फोटो क्लिक करेंगे  एवरग्रीन कपल हैं हम यह दुनिया को दिखला देंगे यूं तो फुर्सत मिलती नहीं हम रहते बिजी हैं रोज आज कई सारी पिक लेंगे  बनाके अलग अलग से पोज़ झुका लूंगी मैं नजरें और तुम  मुझे देखना प्यार से दूसरे में, हम दिल बनाएंगे हाथों को जोड़कर अपने कॉपी करेंगे गूगल से और भी कई अदाएं हर जिम्मेदारी भूलकर  चलो कुछ लम्हें संग बिताएं  आओ न हम तुम इक बार हो जाएं फिर से रोमांटिक चलो देर न करो साजन जी करें यादगार सेल्फी क्लिक चलो देर न करो साजन जी करें यादगार सेल्फी क्लिक                ✍🏻प्रीति ताम्रकार                     जबलपुर

बेचारे लड़के-पुरूष दिवस पर व्यंग्य

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"यार हर्ष, पता मैंने आज गूगल पर देखा कि आज पुरुष दिवस है,साथ ही नीचे लिखा था कि आइए,समाज में पुरुषों और लड़कों का सम्मान करें।पढ़ने के बाद यार मैं सोच में पड़ गया कि क्या हम बेचारे लड़कों का भी कोई सम्मान होता है?मुझे तो फील होता कि हमने बस धनिया मिर्ची लाने और फ्रिज की बॉटलें भरने के लिए ही जनम लिया है।" "हाँ यार, तू सही बोल रहा, जिस तरह से लोग बेटियों के लिये स्टेटस डालते हैं कि बेटियां घर की रौनक होती हैं,बेटियां बाबुल की रानियां,पापा की परी ,माँ का सपना और न जाने क्या क्या होती हैं , पढ़कर तो माँ कसम ऐसा लगता कि जैसे हम लड़के तो धरती पर बोझ हैं।" किचन में काम करते हुए हर्ष की मम्मी और दीदी ने जब दोनों दोस्तों की व्यंग्यपूर्ण बातें सुनी,तो उन्हें बहुत हँसी आई,दोनों सहानुभूति से बोली कि हाय बेचारे लड़के!😃               प्रीति ताम्रकार                जबलपुर

एक मुलाकात

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बहुत दिनों से नही मिली  मैं खुद से मिलना चाहती हूँ लम्हें चंद चुराकर बस एक मुलाकात चाहती हूँ अब तक जाने कितने किरदार निभाये हैं मैंने पर अब मैं फिर से  मैं बनना चाहती हूँ  लम्हें चंद चुराकर बस एक मुलाकात चाहती हूँ कर्तव्यों की राह पर कई शौक भुलाएं हैं मैंने उन भूलीबिसरी गलियों से फिर से गुजरना चाहती हूँ लम्हें चंद चुराकर बस एक मुलाकात चाहती हूँ               ✍️प्रीति ताम्रकार                   जबलपुर

जब से गये हो तुम परदेस

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कुछ मुझमें अधूरा लगता है सब सूना सूना लगता है चाँद भी मद्धम लगता है जब से गये हो तुम परदेस खिले फूल देख मन मुरझाए सजना सँवरना मुझे न भाए दर्पण भी बैरी लगता हाय जब से गये हो तुम परदेस न उमंग तीज त्योहारों की न ललक बसन्त बहारों की न लुभाती रौनक बाजारों की जब से गये हो तुम परदेस तेरे दरस की मुझे आस है कभीकभी लगता तू आसपास है विरह से जागी,कैसी ये प्यास है जब से गये हो तुम परदेस हरपल भीगी सी रहती हैं ये याद में बरसती रहती हैं मेरी आँखें राह तेरी तकती हैं जब से गये हो तुम परदेस         प्रीति ताम्रकार          जबलपुर

क्या अब वापसी सम्भव है?

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ब्याह दिया मां बाबुल तुमने मुझे नया संसार दिया नए रिश्तों से बंधकर मुझसे मेरा नया साक्षात्कार हुआ विदा हुई तो सबने बोला अब दो कुल की तू रौनक है आते रहना बेटी पीहर अपने पर क्या अब वापसी सम्भव है? जो सीख दी माँ बाबा तुमने उन संस्कारों की राशि लिए निकल पड़ी पिया के संग में उनके हाथों में हाथ लिए प्यारे भाई भौजाई तुम्हारे लाड़ का जीवन में कोई न विकल्प है पर अब चली में देस पराए क्या अब वापसी सम्भव है? सखियां,बहनें,काकी-काका ये घर आंगन, मेरे खिलौने ले जा रही हूँ सँजोकर आँखों में जैसे सपन सलोने इस घर की बेटी थी पहले पर जरूरी सासरे के अब फर्ज हैं आऊंगी मान से अतिथि बनकर हाँ,अब वापसी यूहीं सम्भव है।      ✍️प्रीति ताम्रकार         जबलपुर मप्र

आसमान के रक्षक

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हमारे देश की रक्षा का कार्य सैन्य बल बहुत वीरता के साथ करते हैं। भारतीय सेना के तीन महत्वपूर्ण अंग हैं – जलसेना,थलसेना और वायुसेना। भारतीय वायुसेना सशस्त्र सेना का वह विभाग है जो वायु युद्ध,वायु सुरक्षा एवं वायु चौकसी का महत्वपूर्ण कार्य देश के लिए करती है।इसकी स्थापना  8 अक्टूबर,1932 को रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से की गई थी।इसकी एयरक्राफ्ट ने अपनी पहली उड़ान 1 अप्रेल 1933 को भरी थी। 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में इस सेना ने महान भूमिका निभाई थी। स्वतंत्रता के बाद इसमें से रॉयल शब्द हटाकर इसका नाम सिर्फ "इंडियन एयरफोर्स" कर दिया गया। आज वायुसेना का गौरवशाली 89वां स्थापना दिवस है।यह गर्व की बात है कि भारतीय वायुसेना को विश्व की सबसे ताकतवर सेनाओं में चौथा स्थान प्राप्त है। देश के आज़ाद होने के बाद से भारतीय वायुसेना 4 युद्ध में शामिल हो चुकी है ,जिनमे तीन पाकिस्तान और एक चीन के खिलाफ लड़े गए।भारतीय वायुसेना के अन्य प्रमुख ऑपरेशनों में ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन पुमलाई, बालाकोट एयर स्ट्राइक शामिल हैं।इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में भी ...

हिंदी लवर

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मथुरा निवासी लावण्या और दिल्ली के यश की शादी अरेंज विथ लव मैरिज थी। दोनों के ही परिवार उच्च शिक्षित एवं सम्पन्न थे। लावण्या स्वयं भी इंटीरियर डिजाइनर थी।उनके विवाह में सभी आये परन्तु यश की चार वर्ष बड़ी बहन  श्रेया जो सिक्किम में किसी कम्पनी में उच्च पद पर कार्यरत थी वह नहीं आ सकी। एक-दो बार फोन पर उनसे बात हुई, वो हमेशा अंग्रेजी में बात करती थीं,जबकि लावण्या अधिकतर सामान्य हिंदी में ही बात करती थी। लावण्या को अक्सर ही लगता जैसे श्रेया को उससे बात करने में विशेष रुचि नहीं है। पर वह समझदार थी इसलिए उसने इस बात को अधिक तूल नही दिया। शादी के दो महीने बाद उनका आने का प्रोग्राम बना। जब वह आई ,सभी ने उनका बहुत प्यार से स्वागत किया।लावण्या भी बेहद गर्मजोशी से उनसे मिली,पर श्रेया का व्यवहार प्रत्यक्ष मिलने पर भी उपेक्षापूर्ण ही रहा।बात बात पर उसे हिंदी में बात करने पर हीनता का एहसास कराती। एक दिन जब बाजार में श्रेया की एक सहेली नेहा मिली तो दोनों का परिचय करवाया, तभी किसी का कॉल आ गया और नेटवर्क की समस्या के कारण लावण्या कुछ दूर जाकर बात करने लगी।जब वह बात खत्म करके आ रही थी , तब उस...

हम तुम हो गए हैं अपडेट-हास्य रचना

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एक दिन कुछ सोचते हुए, पत्नी जी बोली,"सुनिये तो", हमने भी थोड़ा डरते-सहमते कह ही दिया,"अजी,कहिये तो", "क्या आपको याद हैं जी सात फेरों के सात वचन," सिर को "ना" में हिला तो दिया, पर घबरा गया मैं मन ही मन, "अठरा बरस हुए शादी के, कई चीजें हुई आउटडेटेड, क्यूं न अब हम कर लें, सात वचनों को अपडेट" "कैसी बातें करती हो, शादी नही कोई मोबाईल ऍप्लिकेशन, कभी सुना भी है सात वचनों का, होता अपडेटेड वर्जन"🙄 जो आँखें दिखाई मेडम ने, तो हमने पारी बदली, "मेरी जान,तुम्हारी कल्पना अतुल, तुम कवियित्री जो ठहरी" अपनी खुशामद सुनकर के, पत्नीजी हो गई ग्लेड , "सात वचन को छोड़ो, जब हम तुम ही हो गए अपडेट" जीवन के सफर की हर मुश्किल में, एक दूजे का साथ निभाया, कभी लड़कर,कभी प्यार से इक दूजे को समझा,समझाया हमने भी कहा,"अजी, डोंट वरी, आगे भी करेंगे एडजस्ट, जब जब जरूरत होगी, हम खुद को करेंगे अपडेट।          ✍🏻प्रीति ताम्रकार                जबलपुर(मप्र)

हम बदलेंगे युग बदलेगा

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कौन कहता है कि कठिन है  इस दुनिया को बदलना बस जरूरी है खुद से कुछ सच्चे वादे करना अपने माता पिता का शीश कभी न झुकने देना दिल दुखा दें ऐसे कड़वे वचन कभी न कहना विद्या देते हैं शिक्षक जो उनका दिल से हो सम्मान शिक्षा का मोल समझें तो भावी पीढ़ी बनेगी विद्वान सीमा पर देश की रक्षा करें सेना के हम नही जवान पर प्रण कर लें, हम रोकेंगे उसे जो कोई करे देश का अपमान अपने बेटों को सिखलाएं नारी सम्मान के संस्कार न होगा फिर कहीं किसी स्त्री के संग बलात्कार अपनी जरूरतें घटा लें तो न करना पड़ेगा अधिक धनार्जन दूर हों दिखावे की दुनिया से भ्रष्टाचार का न करें समर्थन हर नागरिक हो ईमानदार बन जाये सच्चा इंसान जब हम बदलेंगे, युग बदलेगा होगा देश, समाज का कल्याण                प्रीति ताम्रकार                 जबलपुर (मप्र)

रक्षाबंधन

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"फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है, सारी उमर हमें संग रहना है ...." पड़ोस वाले घर से आती गीत की आवाज़ सुनकर श्रद्धा को मन में बेचैनी सी होने लगी, आँखों के सामने बचपन के दिन सजीव हो उठे। और आँखों से आंसू सम्हाले नही गए तो सबसे नज़र बचाकर अंदर किचन में गई और बड़ी सफाई से आंसुओं को साड़ी के पल्लू में जज़्ब कर लिया। हर साल रक्षाबंधन पर उसका यही हाल रहता था । तभी भैया का फोन आ गया, अपनी भावनाओं को नियंत्रित करते हुए फोन उठाया। "हेलो भैया,कैसे हो?" "हैप्पी रक्षाबंधन गुड़िया,मैं ठीक हूँ,तू अच्छी है न?"–भैया की आवाज में भी उदासी थी।"तेरी बहुत याद आ रही।" "हाँ भैया, हैप्पी रक्षाबंधन, भैया मुझे भी आपकी बहुत बहुत याद आ रही।"कहते हुए श्रद्धा को रोना आ गया। "अरे,रोते नहीं पगली,मम्मी बोलती हैं न त्योहार के दिन रोना नही चाहिए।" "हाँ भैया नही रोना चाहिए पर मेरा त्योहार तो बस नाम का है।"गहरी सांस छोड़ते हुए उसने कहा,"पता भैया मेरा भी मन करता कि मैं अपने हाथों से तुम्हें राखी बांधू, पर क्या करूं, बच्चों क...

तिरंगे का सम्मान

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यह कहानी है एक छोटे बच्चे शिवा की।उसके मम्मी पापा बहुत कम पढ़े-लिखे थे।उसके पापा मजदूरी करते थे और मम्मी गांव के एक छोटे से स्कूल में सफाई का काम करतीथीं।स्कूल में टीचर दीदी अक्सर बच्चों को देशभक्ति की कहानियां सुनाती थीं और अपने देश का संम्मान करने की दिख देती थीं।वह सिखाती ,कि हमे अपने राष्ट्र ध्वज एवं राष्ट्रगीत का सम्मान करन चाहिए।शिवा की मम्मी घर आकर यही कहानियां शिवा को सुनाती जिनको सुनकर उसका मन अपने देश के प्रति असीम सम्मान और प्रेम से भरा था। एक दिन सुबह  शिवा की मम्मी उसे तैयार करके अपने साथ स्कूल ले गईं।जब स्कूल पहुँचे तब शिवा ने देखा, पूरा स्कूल नारंगी, सफेद और हरे गुब्बारों से सजा था। हर तरफ देशभक्ति के गीत गूंज थे। स्कूल के बच्चे हाथ में तिरंगा लिए उत्साह से यहां वहां दौड़ रहे थे। स्वंतन्त्रता दिवस की धूमधाम देखकर शिवा बहुत खुश हुआ।स्कूल की बड़ी मैडम ने झंडा फहराया, फिर सभी ने राष्ट्रगीत गाया गया। इसके बाद टीचर दीदी ने उसे  दो लड्डू भी  दिए। सारा दिन शिवा बहुत खुश रहा और स्कूल की बातें करता रहा। अगले दिन भी वह मम्मी से स्कूल जाने की जिद  करने लगा, ...

कांपते हाथ

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रविवार की शाम को परिवार के साथ बिड़ला मंदिर जाने का प्रोग्राम बना। सब लोग समय से तैयार होकर फटाफट कार में बैठकर चल पड़े।आरती का छोटा भाई उदय , जो उन्ही के घर रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था, वह गाड़ी चला रहा था। छुट्टी का दिन, उस पर शाम का समय होने के कारण सड़क पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक था, इस कारण ड्राइव करते समय उदय आदतन थोड़ा चिड़चिड़ा रहा था। लौटते समय रास्ते में कार के आगे एक बुजुर्ग आदमी को कांपते हाथों से, धीरे अतिरिक्त सावधानी के साथ स्कूटर चलाते देख बड़बड़ाया , "इन बुड्ढ़े लोगों को भी न, कौन छोड़ देता है सड़क पर, हाथ कांप  रहे पर अंकलजी गाड़ी चलाने का शौक नही छोड़ पा रहे,एक ठोकर लगी न तो सीधे ऊपर का टिकिट कटेगा ।" जब वे घर पहुंचे, तो आरती जो बहुत देर से उसकी चिड़चिड़ाहट को खामोशी से नजरअंदाज कर रही थी, उसकी इस बदतमीजी पर चुप नही रह सकी। "कैसे बोल रहे हो उदय, कितनी देर से तुम्हारी चिड़चिड़ाहट को इग्नोर रही हूँ। पर तुम्हारे यह शब्द तो बदसलूकी की हद ही पार कर दिये । एक बार उन बुजुर्ग अंकल के बारे में सोचो, वह लगभग 70 वर्ष के होंगे, हो सकता, उन्हें  किसी मजबूरी  में ड्राइव करना पड़ ...

लगती बैरन सावन की फुहार

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कैसे देखे सजनी बागों की बहार रूठे हो साजन  तो लगती बैरन  सावन की फुहार एक नज़र को तरसता दिल सजनी का बेकरार  पर सजना बेदर्दी न देखें उसके सोलह सिंगार पर सजनी उसको रिझा ही लेगी जता के अपना प्यार               प्रीति ताम्रकार               जबलपुर

कभी ख्वाब में भी ये सोचा न था

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जो अल्फ़ाज़ हम शौक में बोल जाते थे मन के भाव जो कागज़ पर उतर आते थे एक पहचान वो मुझको दिला जायेंगे              कभी ख्वाब में भी ये सोचा न था जो बातें कभी दिल को दुखा जाती थीं पाके तन्हा पलकें भिगा जाती थीं हम उन्ही को लफ़्ज़ों में सजा पायेंगे              कभी ख्वाब में भी ये सोचा न था अब मैं खुद में नया हौसला पाती हूँ नए नए रूप में खुद को आज़माती हूँ नई राहों पर सबको साथ पाएंगे                कभी ख्वाब में भी ये सोचा न था            प्रीति ताम्रकार             जबलपुर

गरमागरम भजिये

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भीगा भीगा मौसम हाय ठंडी ठंडी बयार कैसे जाने दें प्रियतम  इन लम्हों को बेकार आओ बना दें इन  घड़ियों को यादगार गरमागरम भजिये बना दो  गर करते हो मुझसे प्यार प्याज के भजियों में हमदम तुम धनिया जरूर डालना मिर्च बारीक काटकर  स्वाद में जान डालना टमाटर की चटनी जब होगी भजियों के साथ मुझसे रुका न जाएगा जल्दी से लूंगी स्वाद बाहों में बाहें डाल सेल्फी लेंगे मेरे हमदम तुम यूंही रहना साथ बीते न प्यार का मौसम

कवियित्री बन गई है बीवी

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पहले खुश रहती थी जो गृहकार्य के काउंटडाउन में अब कवियित्री बन गई  मेरी बीवी लॉक डाउन में काम तो अब भी करती है वो बड़ी निपुणता के साथ में पर जैसे ही समय मिले मोबाईल है लेती हाथ में जल्दी जल्दी निपटाती है रोज  के सारे काम धाम बच्चों की पढ़ाई, या हो पूजा सास ससुर का भी रखती ध्यान पहले की तरह मुझसे अब लड़ती भी नहीं है कभी कभी लगता अब मेरी केयर करती ही नही है मम्मी लिखती कविताएं सोच बच्चे भी इतराते हैं अपनी माँ को देख सफल खुशी से डांट भी अब खा जाते हैं आत्मविश्वास नया जागा मंच पर भी मिला सम्मान मायके और ससुराल में पाया नया रूप नयी पहचान सीधी साधी गृहिणी अब सुपर वूमेन बन गई है  कभी  वो करती काव्यपाठ कभी संचालिका  भी बन गई है अलग अलग साहित्य वाले  समूह से जुड़ी है  अनजान थी अपनी कला से जो अब पंखों को  फैला कर उड़ी  है मेरे जानने वाले भी मुझको खुशकिस्मत कहते हैं जो बीवी से प्यार करें उनकी खुशी में ही खुश रहते है  ✍🏻प्रीति ताम्रकार        जबलपुर