बेचारे लड़के-पुरूष दिवस पर व्यंग्य


"यार हर्ष, पता मैंने आज गूगल पर देखा कि आज पुरुष दिवस है,साथ ही नीचे लिखा था कि आइए,समाज में पुरुषों और लड़कों का सम्मान करें।पढ़ने के बाद यार मैं सोच में पड़ गया कि क्या हम बेचारे लड़कों का भी कोई सम्मान होता है?मुझे तो फील होता कि हमने बस धनिया मिर्ची लाने और फ्रिज की बॉटलें भरने के लिए ही जनम लिया है।"
"हाँ यार, तू सही बोल रहा, जिस तरह से लोग बेटियों के लिये स्टेटस डालते हैं कि बेटियां घर की रौनक होती हैं,बेटियां बाबुल की रानियां,पापा की परी ,माँ का सपना और न जाने क्या क्या होती हैं , पढ़कर तो माँ कसम ऐसा लगता कि जैसे हम लड़के तो धरती पर बोझ हैं।"
किचन में काम करते हुए हर्ष की मम्मी और दीदी ने जब दोनों दोस्तों की व्यंग्यपूर्ण बातें सुनी,तो उन्हें बहुत हँसी आई,दोनों सहानुभूति से बोली कि हाय बेचारे लड़के!😃

              प्रीति ताम्रकार
               जबलपुर

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