जुल्फ
तुम यूं ना जुल्फें लहराया करो, कहीं बादल फिर न बरस जाए, तुम यूँही ना ऐसे शर्माया करो, कहीं लोगों की नज़र न लग जाए, तुम लब अपने खोला न करो, कहीं कोयल भी ना गुम जाए, मुख पे तुम पर्दा किया करो, कहीं चाँद ना तुमसे जल जाए, मेरे दिल की धड़कन सुना करो, कहीं तुम्हें और कोई ना भा जाए। । अनुराग सिंह ✍️✍️