कांपते हाथ


रविवार की शाम को परिवार के साथ बिड़ला मंदिर जाने का प्रोग्राम बना। सब लोग समय से तैयार होकर फटाफट कार में बैठकर चल पड़े।आरती का छोटा भाई उदय , जो उन्ही के घर रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था, वह गाड़ी चला रहा था।
छुट्टी का दिन, उस पर शाम का समय होने के कारण सड़क पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक था, इस कारण ड्राइव करते समय उदय आदतन थोड़ा चिड़चिड़ा रहा था।
लौटते समय रास्ते में कार के आगे एक बुजुर्ग आदमी को कांपते हाथों से, धीरे अतिरिक्त सावधानी के साथ स्कूटर चलाते देख बड़बड़ाया , "इन बुड्ढ़े लोगों को भी न, कौन छोड़ देता है सड़क पर, हाथ कांप  रहे पर अंकलजी गाड़ी चलाने का शौक नही छोड़ पा रहे,एक ठोकर लगी न तो सीधे ऊपर का टिकिट कटेगा ।"

जब वे घर पहुंचे, तो आरती जो बहुत देर से उसकी चिड़चिड़ाहट को खामोशी से नजरअंदाज कर रही थी, उसकी इस बदतमीजी पर चुप नही रह सकी।

"कैसे बोल रहे हो उदय, कितनी देर से तुम्हारी चिड़चिड़ाहट को इग्नोर रही हूँ। पर तुम्हारे यह शब्द तो बदसलूकी की हद ही पार कर दिये । एक बार उन बुजुर्ग अंकल के बारे में सोचो, वह लगभग 70 वर्ष के होंगे, हो सकता, उन्हें  किसी मजबूरी  में ड्राइव करना पड़ रहा या हो सकता, इस उम्र में भी वह किसी और पर निर्भर नही हैं, यह सीखने लायक बात है।"

"पर दी...."-उदय की बात पर ध्यान न देते हुए आरती नाराजगी से बोली "कभी यह सोचा कि आज तुम किसी उम्रदराज इंसान को देखकर ऐसे शब्द बोल रहे हो, अपने पापा भी तो टू व्हीलर पर अकेले अपने दम पर अपने सारे काम खुद ही निपटा लेते हैं। और उनका अपने काम स्वयं करना कहीं न कहीं यह हम बच्चों के लिए भी सुविधाजनक ही है। तो क्या उसके बदले हम युवा उन बुजुर्ग गाड़ी चलाने वालों का लिहाज करके धीरज रखके ड्राइव नही कर सकते,  यदि इस तरह अपने पापाजी को कोई बोले तो कैसा लगेगा?"

अपनी बड़ी बहन की डांट सुनकर उदय को अपनी गलती का एहसास हुआ।उसने आरती से माफी मांगी ,
तो आरती ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा , आज हम युवा हैं, एक दिन हमारा भी बुढ़ापा आएगा।हमारे हाथ भी कापेंगे, जैसा बर्ताव तुम अपने लिए पसंद नहीं करते वैसा दूसरों के साथ भी नही करना चाहिए।"
उदय ने सॉरी बोलते हुए ,कभी भी ऐसी बदसलूकी नही करेगा, ऐसा वादा किया। 

✍🏻प्रीति ताम्रकार
      जबलपुर

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