नवरात्रि -सांझी माता
नवरात्रि......
नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों में पूजन ।
हमारे भारत देश के हर क्षेत्र में नवरात्रि का त्योहार अलग-अलग तरह से मनाया जाता हैं ।
हर क्षेत्र हर जगह की अपनी अलग परंपराएं हैं ।
कहीं माता का शक्ति के रूप में पूजन होता हैं,कहीं गरबा और कहीं डांडिया नृत्य किया जाता हैं ।
हमारे हरियाणा में बिल्कुल इस त्योहार को अलग तरीके से मनाया जाता हैं हालांकि आजकल लोग अपने घरों के मंदिर में ही कलश और देवी की स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक विधिवत् पूजा अर्चना करते हैं ।
अलग तरीके की बात करें तो आज भी कई जगहों पर माता की सांझी माता के रूप में पूजा जाता है और इसकी तैयारियां महीनों पहले ही शुरू हो जाती हैं ।
सबसे पहले चिकनी मिट्टी लाई जाती हैं , मिट्टी को छानकर उसे गूंथ लिया जाता हैं और इसके बाद बनाएं जाते माता के कपड़े और साजों श्रृंगार का सारा सामान ..... लहंगा चोली, चूड़ियां, कंगना,झुमकी बाली, झांझन पायल,कड़ी छड़कले,नेवरी और अन्य आभूषण । फिर इन सब चीजों को कई दिनों तक धूप में सुखाया जाता हैं । इसके बाद रंग से रंगा जाता हैं । नवरात्रि के पहले दिन घर की किसी दीवार पर या फिर गली की किसी दीवार पर गाय के गोबर से माता की छवि बनाई जाती हैं और गोबर के ऊपर से माता के लिए बनाए गए कपड़े वह गहने चिपकाए जातें हैं । सांझी माता को लाल रंग की चुनरी ओढ़ाई जाती हैं । फिर नौ दिनों तक माता का पूजन किया जाता हैं और उन्हें मीठे का भोग लगाया जाता है । औरतें इकट्ठा होकर सांझी माता के गीत व भजन गाती हैं । अष्टमी वाले दिन सांझी माता का छोटा सा भाई बनाया जाता हैं ,ऐसी मान्यता हैं कि सांझी माता का भाई अपनी बहन को लिवाने आता हैं और दशहरे वाले दिन अपने साथ लेकर जाता हैं ।
नवमी वाले दिन हर घर में खीर, हलवा पूड़ी बनाई जाती हैं ।
दशहरे वाले दिन दिन ढलने के बाद माता की मटकी को सजाकर उसमें रखा जाता हैं और फिर सांझी माता को घर की औरतें वह लड़कियां अपने सिर पर रखकर तालाब पर लेकर जाती हैं विसर्जित करने के लिए......साथ में भाई भी जाते हैं हाथों में लाठियां लेकर...... लड़कियां चाहती हैं कि सांझी माता तर कर पार निकल जाएं और लड़के लाठी मारकर मटकी को वहीं डुबो देते हैं ।
इस तरह से हमारे यहां नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता हैं ।
मुकेश दुहन" मुकू"
Comments
Post a Comment