भक्ति
तू जो कर दे इशारा मेरे कान्हा
तेरे रंग में रंग जाऊं मैं,
बंद कर लूं आंखें सदा के लिए
तेरी भक्ति में रम जाऊं मैं ।
माखन संग चुराऊं तेरे
ग्वाला भी बन जाऊं मैं,
बांध लें अपने बंधन में मुझको
तुझ संग गईयां फिर चराऊं मैं ।
प्यार करूं मनुहार करूं
तेरी राधा सी बन जाऊं मैं,
जमुना तट राह तकू मैं तेरी
तेरी मुरली फिर बन जाऊं मैं ।
तू जो कर दे इशारा मेरे कान्हा
तेरे रंग में रंग जाऊं मैं,
बंद कर लूं आंखें सदा के लिए
तेरी भक्ति में रम जाऊं मैं ।
भजन करूं ध्यान धरूं
तेरी मीरा सी बन जाऊं मैं,
धारण कर फिर विष का प्याला
किसी को नजर न आऊं मैं ।
भक्ति करूं वि धरूं
तेरा सुदामा सा बन जाऊं मैं
आंखें बंद कर जब ख्वाब बुनूं
बस तुझको ही पाऊं मैं ।
तू जो कर दे इशारा मेरे कान्हा
तेरे रंग में रंग जाऊं मैं,
बंद कर लूं आंखें सदा के लिए
तेरी भक्ति में रम जाऊं मैं ।
तू ही खिवैया रास रचईयां
इस भंवर से तर जाऊं मैं,
सिर सजू तेरे मैं मोर पंख सी
हर छांव धूप संग तूझे ही पाऊं मैं ।
कान्हा कान्हा मेरे कान्हा
सबको ही ये बतलाऊं मैं,
कोई भी पूछे जब नाम तेरा
बस गीत यही दोहराऊं मैं ।
तू जो कर दे इशारा मेरे कान्हा
तेरे रंग में रंग जाऊं मैं,
बंद कर लूं आंखें सदा के लिए
तेरी भक्ति में रम जाऊं मैं ।
मुकेश दुहन" मुकू"
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