बहादुरी


बहादुरी हमको  अब दिखानी होगी,
अपनी अस्मिता खुद ही अब बचानी होगी ‌‌,
आखिर कब तक तलाश करेंगे सहारे
बहादुर हैं हम ये बात सबको समझानी होगी ।

नारी है हम ,हम हैं शक्ति का आधार,
सजा है हमसे ही दुनियां का हर आंगन और द्वार,
आखिर कब तक खुद को कम आंकोगी
जब हमारी ही माया है ये सारा संसार ।

नहीं बनना हैं मुझको अहिल्या,
नहीं सीता सा त्याग हैं मुझमें,
बन कर रहना हैं अब इस जग का हिस्सा
बेशक प्रेम का एहसास है मुझमें ।

क्यूं हूं जाते हो तुम मेरा इतिहास,
रानी पद्मावती, लक्ष्मीबाई,नीरजा हूं मैं ,मैं ही चीनूबाई
देना होगा जवाब अब तुमकों ए दुनियां के ठेकेदारों
दूध पर आंच जो अबकी जरा सी भी आईं ।

मुकेश दुहन" मुकू"

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