सुदामा बनूं


चाहा नहीं कभी मीरा बनूं राधा बनूं 
तुझ संग प्रीत की डोर मैं बांधू 
एक ही तमन्ना थी तू श्याम बने मैं 
तेरा प्रिय सखा सुदामा बनूं
अपने सारे दुःख दर्द तुझ से कहूं 
कुछ तू बिन कहे समझ लेना 
मन में छाएं घने अंधकार को बांसुरी   
 की मधुर धुन से हर लेना ।।
नेहा धामा " विजेता " बागपत ,उत्तर प्रदेश

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