पुनर्विवाह भाग १४

रुको वहीं ....पहले आरती तो करने दो । फिर आना अंदर । रविश की बड़ी मां ने कहा ! ऐसे कैसे अंदर आ जायेंगे बड़ी मां । मैं तो बिना नेग के भैया - भाभी को अंदर आने नहीं दूंगी । रविश की छोटी बहन ने कहा ! अरे तुम अपना नेग बाद में लेना । पहले हमें आरती तो करने दो । रविश की बड़ी मां ने कहा और आरती करने लगी । घर के बड़े आरती करने के बाद स्वाति को अंदर ले जाने लगे । तभी रानी फिर से नेग मांगने लगी और साथ में स्वाति की मौसेरी बहन को भी साथ में मिला लिया । रविश ने मुस्कुराते हुए अपने पर्स से पैसे निकालते हुए कहा ‌। अभी मेरे पास इतने ही है । कल पक्का तुझे तेरा गिफ्ट मिल जायेगा । मुंह बनाते हुए रानी ने पैसे ले लिए इस शर्त पर की कल उसे अपना गिफ्ट मिल जाना चाहिए । सुबह होने वाली थी , और शादी के कार्यक्रम में सब थक गये थे । इसलिए सब अपने अपने कमरें में आराम करने के लिए चले गए । कुछ घंटों के आराम के बाद   घर के युवा जहां तरोताजा महसूस कर रहे थे और सत्यनारायण कथा की तैयारी कर रहे थे । वहीं घर के बड़ों को अभी भी थकान लग रही थी। घर की महिलाओं ने मिलकर प्रसाद और खाने की तैयारियां करने लगी । पूजा की सारी तैयारियां करने के बाद तय समय पर पंडित जी ने आकर पूजा शुरू कि ..... कुछ समय बाद पूजा समाप्त होने पर पंडित जी ने विदा ली । पूजा होने के बाद रविश की बड़ी मां ने एक बड़े से परात में दूध डालकर रख दिया और रविश और स्वाति को आमने-सामने बिठा दिया । अपनी मम्मा और रविश को यूं आमने-सामने बैठा देखकर नन्हें शिवांश ने अपनी मम्मा से पूछा ! मम्मा आप और पापा ऐसे क्यूं बैठे हो ! स्वाति को जैसे शिवांश की बातें सुनाई ही नहीं दे रही थी । उसे तो अपनी पहली शादी की कड़वी यादें याद आ रही थी , कि कैसे राजेश ने इन सभी रस्मों को करने से मना कर दिया था । लेकिन रविश वैसे बिल्कुल भी नहीं है । द्वार छेकनी की रस्म हो या अंगूठी ढूंढने की सब में कितने उत्साह और और प्यार से कर रहे हैं । क्या ये मुझसे सच में प्यार करते हैं !! स्वाति का ध्यान तब टूटा जब शिवांश ने उसे हिलाते हुए कहा - मम्मा आप बार-बार क्या सोचती रहती हो । शिवांश की बातें सुनकर रविश की मौसी ने व्यंग्य कसा ! शायद उसे अपनी पहली शादी याद आ गई होगी । इसलिए कुछ नहीं कह रही बेचारी । उनकी बातें सुनकर रविश और बाकि के घर वाले नाराज हो गए । लेकिन रविश की मां चुप ना रह सकी । उन्होंने कहा - मालती मेरी बहू नासमझ नहीं है कि जो बीत गई उसे याद करती रहे । वो आज की पढ़ी - लिखी लड़की है । अपने अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना जानती है और कभी वो कमजोर पड़ी तो हम सब है ना उसके साथ हम उसे कभी कमजोर नहीं पड़ने देंगे । उनकी बातें सुनकर स्वाति उनके गले लगकर रोने लगी । 

क्रमशः 

रचनाकार 

श्वेता सोनी

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