एक औरत

कुछ करने नही देती ये दुनिया मुझे डराती है। 
तु औरत है हर दम एहसास दिलाती है।।

तुम घर से जाओगी  तो घर को कौन सम्भालेगा।
तु कुछ कर  नही सकती  ये एहसास दिलाती है।।

माँ के घर जाती हु , माँ मुझको गले लगाती है ।
वापिस कब जाओगी भाभी ये सवाल उठाती है।।

मुझसे कह देती है, तु सब कुछ ले जा अपना।
तेरी आदत है तु सामान भुल जाती है।।

वो भुल जाते है कि मै भी एक नारी हु ।
दुर्गा बन जाऊं तो सब दुष्टो पर भारी हु।।

फिर क्यु मुझको सब, हर पल यु सताते है।
तु सिर्फ एक औरत है मुझको एहसास दिलाते है

एक माँ का रिश्ता है जो सब से सच्चा है।
एक वो माँ है जो अपना दर्द आंचल में छुपा जाती है।
      
  

          रितु शर्मा

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