योग

   योग का अर्थ होता है जोड़ना ।
   योग मन को जोड़ता है ।जैसे हमारा मन इधर-उधर भटकता है ,कभी एक वस्तु के लिए ,वह मिल जाने के बाद दूसरी वस्तुओं के लिए कुछ सोचता है ।इससे पहले मन की गति और तेज हो जाती है ।
   योग उस मन की गति को संयमित करता है। योग हमारे मन के भटकाव को रोकने में सहायक है।
    जैसे मैं एक उदाहरण देकर समझाना चाहती हूं मान लीजिए ,आपके कमरे में आंधी तूफान की वजह से खिड़की का शीशा टूट गया , औ कांच इधर-उधर बिखर गया आप झाड़ू लेकर बिना देखे ।दूसरे कमरे में चले गए तो क्या सफाई कर पाएंगे !नहीं ना पहले ,आपको यह देखना होगा की कांच कहा दिख रहा है।तभी तो आप सफाई करवाएंगे और दूसरे चौखट भी बिना शीशे की हो गई।
    तो अब आपको दो काम करने होंगे प्रथम तो यह कि आपको कांच साफ करना है और दूसरा खाली चौखट का इंतजाम करना है।
    
    इसी तरह हमें पहले अपने मन के जो भी विकार  हैं उनको जानना होगा। और उनको दूर करने का प्रयास करना होगा
    इन सब में योग बहुत सहायक है ।मन की चंचलता को कम करता है, दिमाग में स्थिरता लाता है। योग हमारी बहुत सारी बीमारियों को खत्म करता है। योग उसकी प्रथम सीढ़ी है। इसके ऊपर तो हमें बहुत सारी सीढ़ियां चढ़ने होती है।
    जो हमारा परमात्मा से मिलन कराती हैं। योग से हमारे शरीर की सातों चक्र प्रभावित होते हैं।
    जैसे मैं योग संबंधी आपको थोड़ी सी बातें बताना चाहूंगी प्राचीन काल से हमारे देश में हाथ जोड़कर नमस्ते करने की प्रथा है ।बल्कि यह कहिए यह एक स्वाभाविक परंपरा है यहां तक कि मृतक की अंतिम विदाई पर भी हाथ जोड़ते हैं।
    और कोई गुरु जन या कोई मेहमान आता है तो आप उसके आदर सत्कार में हाथ जोड़ते हैं। अगर कोई आपको भोजन के लिए आने का आग्रह करता है ।तब भी आप हाथ जोड़कर उसका आभार व्यक्त करते हैं ।
    अब इसका स्वास्थ्य संबंधी पहलू सुनिए हाथ जोड़ने से हम निरोगी रह सकते हैं ।मन को शांत कर सकते हैं वात पित्त कफ आदि विकारों पर अंकुश लगा सकते हैं।
    हथेलियों में काया का प्रतिबिंब है हमारी हथेलियों में हमारी पूरी काया का प्रतिबिंब है दोनों हथेलियां मिलाने से सूर्य व चंद्र मतलब‌ दोनों का मिलन होता है ।जिससे हमारी सुषुम्ना नाड़ी क्रियाशील हो जाती है।
    हमारी बीसो उंगलियां पंचतत्व की प्रतीक हैं। अंगूठे अग्नि तत्व के ,अनामिका पृथ्वी तत्व और कनिष्ठा जल तत्व के लिए तत्व मुद्रा विज्ञान में प्रयोग में लाई जाती है। इसका मिलन होने में पंचतत्व भी सम हो जाते हैं।
          सूर्य में चंद्रमा की ऊर्जा मिलती हैं तो हमारी हथेलियों में ग्रहों के पर्वतों का विशेष महत्व है। हस्तरेखा वह पर्वतों के आकार रंग उभार वह दबे होने से मनुष्य के वर्तमान भूत के भावी जीवन पर प्रभाव पड़ता है। हाथ जोड़ने पर सूर्य में चंद्र की हथेलियों से दोनों का मिलन होने से इनका प्रभाव सम हो जाता है।जब यह पर्वत आपस में मिलते हैं तो नकारात्मक प्रभाव नगण्य हो सकते हैं।
          एक्यूप्रेशर पद्धति से भी हमारे हथेलियों में समस्त शरीर के प्रतिबिंब हमारी हथेलियों में उंगलियों में हैं। उंगलियों के अग्र भाग  में मस्तिष्क के क्षेत्र हैं ।अंगुलियों के प्रथमा व मध्यमा के  पर्वतक्षेत्रों में नेत्रों का अनामिका कनिष्ठा के पर्वत क्षेत्रो में कानों के प्रतिबिंब हैं ।
          हथेलियों के मध्य भाग के में उद र के सभी अंग हैं। अंगूठे की गद्दी में गले , फेफड़े और हृदय के अंग हैं ।इन्हीं स्थानों पर उपलब्ध बिंदुओं से काया के सभी रोगों का उपाय किया जाता है।
   सहज भाव से हथेलियां जोड़कर बैठने से भावनाएं शांत होती हैं, मन की चंचलता शांत होती है ।चेतना का उदय होता है।हृदय शांत होता है ।सौम्यता का विकास होता है। हमें अच्छे पन का अनुभव होता है ।हल्का बनाता है स्थूल शरीर सूक्ष्म शरीर की ओर अग्रसर होने लगता है ।काया की कठोरता कोमलता में बदल जाती है।
   अभिमान ,अहंकार ,दर्प क्रोध ,द्वेष आदि विकार तिरोहित होने लगते हैं ।इससे दूसरों के प्रति हमारा व्यवहार मैत्रीपूर्ण का उद्धार हो जाता है ।जिससे हमे सम्मान मिलता है। हमारी काया में ओज ,तेज ,बल व विद्या की वृद्धि होती है। इससे तामसी प्रवृत्ति का नाश होकर आस्तिक प्रवृतियां बढ़ती हैं ।हमारी आधिव्याधि से मुक्ति मिलती है।
   यदि आंखें बंद करके काया को स्थिर करके हाथ जोड़े बैठे रहे ,तो हमें आभास होगा "असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्मामृतम गमय।"
          जुड़े हुए हाथों को सीने के सामने कुछ दूर पर स्थिर रखने से आंतरिक चेतना का विकास होता है। इसे थोड़ा थोड़ा ऊपर उठाते रहे तो चेतना ऊर्ध्वगामी होती है ।शुद्धता शांति व सौम्यता का अनुभव होता है।
            ध्यान रखने योग्य विशेष बातें
            1 हाथ जोड़े रखने के समय पांचों उंगलियां परस्पर          
            सटी रहे
            2. पूरी हथेलिया सटी रहे ।
         3   हथेलियां जोर से ना दबाएं।
           4. आंखें हल्की बंद रहे हैं।
           5  ध्यान हथेलियों पर रहे।
              6.    प्रयास करे शरीर स्थिर रहे ।
             यह मैंने हाथों के द्वारा मन को स्थिर करने का छोटा सा योग बताया है ।
             योग की महिमा तो इतनी अधिक है ।कि कुछ वर्णन नहीं हो सकता। अंत में मेरा आप सभी से अनुरोध है। योग को अपने जीवन में अपनाएं। और अपनी छोटी-छोटी परेशानियों को छोटी-छोटी बीमारियों खत्म कर सकते है।                
             धन्यवाद 
             मधु अरोड़ा

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