कूड़े का बादल

        एक गांव में मिनी नाम की लड़की अपनी दादी के साथ रहती थी ।मिनी को इधर-उधर कूड़ा फैलाने की गंदी आदत थी। उसकी दादी उसको बात-बात पर समझाती थी। बेटा केले का छिलका यहां मत डालो कोई फिसल जाएगा। बेटा बिस्किट का रेपर मत फेंको ,घर गंदा हो रहा है। खाली पन्नी इधर उधर मत डालो ,परंतु  मिनी पर किसी बात का असर नहीं होता था।
         वह दादी के कहने पर हंसती रहती।
        एक दिन उसकी दादी को बहुत गुस्सा आया। मिनी ने अपनी चारों ओर आम की गुठलीयाँ, केले के छिलके, तरबूज की फांके फैला रखी थी। जिससे उन पर मक्खियां भिन्न-भिन्ना रही थी और घर भी बहुत गंदा हो गया था।
        उन्होंने मिनी से कहा बेटा यह साफ कर दो मिनी जोर जोर से हंसने लगी दादी ने गुस्से में कहा अब यह कूड़ा तुम्हारे साथ ही रहेगा।
        अगले दिन जब सुबह मिनी सो कर उठी तो उसके सिर पर कूड़े का बादल मंडरा रहा था।
        वह बहुत परेशान हो गई ,उसने उस कूड़े के बादल को डस्टबिन में डालने की कोशिश की ।
        झाड़ू से साफ करने की कोशिश की लेकिन वह नहीं हटा
        अब जहां भी वह जाती वह बादल उसके साथ साथ जाता ।
        उसकी सहेलियां भी अब उससे दूर रहने लगी। कोई उसके साथ नहीं खेलता था ।अब वह बिल्कुल अकेली पड़ गई थी अगर वह किसी से कुछ सामान मांगती तो उसकी सहेलियां उससे दूर भाग जाती । कोई उसके पास नहीं बैठता था ना कोई इसके साथ खेलता था अगर वह छुपन छुपाई खेलना चाहती हूं तो कूडे का बादल उसका राज बता देता।
        एक दिन चिंकी केले का छिलका सड़क पर  फेंक रही थी। मिनी ने उसको रोका चिंकी यह क्या कर रही हो ?
        क्या तुम्हें मेरे सिर के ऊपर कूड़े का बादल नहीं दिखता जो तुम कूड़े को इधर-उधर डाल रही हो। चिंकी ने में केले का छिलका उठाकर डस्टबिन में डाल दिया।
        मिनी को अपने सिर के ऊपर का बादल थोड़ा हल्का लगने लगा।
        अगले दिन उसने देखा रीता आंटी सड़क पर पॉलिथीन फेंक रही है उसने कहां आंटी है क्या कर रही हो पॉलिथीन को दोबारा इस्तेमाल कर सकती हो, नीता आंटी ने उसकी बात समझ  आई ।और वह पॉलिथीन को वापस ले गए।
        अब मीनी ने  देखा किसके सिर का बादल कम हो गया आप उसको अपने सिर के बादल को कम करने का राज पता लग गया था कि सड़क पर इधर-उधर कूड़ा डालने से घर गंदा काम गंदा होता है शहर गंदा होता है हमें अपने गांव और शहर को साफ रखना चाहिए अब उसको अपनी दादी की बात समझ आ गई थी और अब वह किसी को भी कूड़ा इधर-उधर नहीं डालने देती।
        उसके सिर का बादल बिल्कुल खत्म हो गया था और वह सबसे खुशमिजाज  और सफाई पसंद लड़की बन गई। अब उसकी दादी भी उससे बहुत खुश रहने लगी तो बच्चे इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है कि हमें अपने घर का कूड़ा ऐसे ही भाग नहीं डालना चाहिए डस्टबिन का इस्तेमाल करना चाहिए ।
                                  मधु अरोड़ा

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