नाराज़


  मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़ ,
  तो एक दूजे को मनाए कौन ?
   आज बात छोटी है,
   बात बढ़ी तो गांठ पडे,
   इस गांठ कोअब खुलाएं कौन ?
   मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़ ।
   छोटी -छोटी बात दिल में लगाना ,
   फिर प्यार दिल में जगाए कौन ?
   मैं भी नाराज तुम भी नाराज़ !
   चुप्पी चुप्पी में बात बढे ,
    उस चुप्पी को अब तोड़े कौन?
    परेशान सा में घूमूं ,
     चिंता मग्न सी तुम बैठी।
     मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़,
     तेरी याद हर समय आती है मुझको।
     याद तुझे भी आती होगी,
     इस झूठे अहम को तोड़ के आजा,
     सारे बंधन तोड़ के आजा ।
     मैं भी नाराज़ तुम भी नाराज़ 
     सुनो! वक्त गुजर जाएगा?
     बात अब यू ना बढ़ाओ तुम ।
      कुछ तुम बढ़ जाओ,
      कुछ हम‌ बढ जाएं।
      इन बातों को भूल जाएं हम,
      चलो आओ अब मान भी जाओ ।
      तुम भी नाराज़ मैं भी नाराज़।
       तुम बिन रह ना पाएंगे हम ,
       बिन बात यूं ही मर जाएंगे।
       कुछ तुम नाराज़ के कुछ हम नाराज़।।
                             दिल की कलम
                             मधु अरोड़ा
                             

Comments

Popular posts from this blog

आखिरी अदालत

आज की मांग

आवारा बादल (भाग 30) प्रयास