पिता
मेरे हर पल में मुझको रुला रहे हो
पिता क्या होता है ये अब जाना हमने
जब आ गए उनकी उम्र में तब माना हमने
जब थे मेरे पास तो नही जान पाई आपका प्यार
अब जब जानी हूँ तो आप नही हो साथ
मेरे बचपन को अधूरा छोड़ गए
जरूरत थी जब बहुत तो क्यों चले गए
बहुत सी बातें करना चाहती हूँ आपके साथ
फिर से गोदी में भी चढ़ना चाहती हूँ
काश कि एक बार ईश्वर आ जाए
मुझे सिर्फ एक बार आपसे मिला जाए
जब देखती हूँ औरों को पिता से बातें करते
तब सच मे बहुत याद आती है पापा तुम्हारी
बस एक बार आप भी लौट आओ वापिस
मैं फिर से छोटी बच्ची बनना चाहती हूँ तुम्हारी
आज भी याद है कैसे डाँटते थे आप
उस समय नही अच्छा लगता कभी भी
आज एक बात कहती हूँ मैं आपको पापा
अब सबसे ज्यादा डाँट ही याद आती है तुम्हारी!
बहुत अमीर लगते थे मुझे आप तब
क्योंकि हर ख्वाहिश को पूरा करते थे आप तब
आज सोचती हूँ कुछ अपने लिए नही कमाते थे
अपनी सारी जमा पूँजी बस हम पर ही लगाते थे!
आज हो गई बड़ी आपकी बेटी ये शरारती
अपने घर और गृहस्थी में लगा लिया है मन
लेकिन आज भी भीग जाती हैं ये पलकें
जब देखती हूँ आपकी घर मे लगी ये तस्वीर!
यूँ तो ओर भी हैं तस्वीर तुम्हारी मेरे पास
लेकिन आज मिली वो तस्वीर जो है सबसे खास
बोली मेरी बेटी कितने सुंदर थे नानू
सुनकर उसकी बातें मुझे खुद पे हुआ नाज!
पापा जहाँ भी हो मेरी ये कविता जरूर पढ़ना
बस फिर मेरे सपनों में आकर मुझसे ढेरों बातें करना
दिल की हजारों बातें कहना चाहती हूँ तुमसे
मेरे प्यारे पापा बच्ची बनना चाहती हूँ फिर से
Comments
Post a Comment