खुबसूरत शैतानी शीशा भाग २९

अनीश अब अर्नव बनकर घर आ जाता है तो देखता है कि पीहू और राघव उसी का इन्तेजार कर रहे हैं।पीहू अर्नव को देख कर खुश हो जाती है और उसे अपने पास बुलाकर कहती है यहाँ आ हमारे पास बैठ,देख तेरे लिए तेरी पसन्द का पोहा बनाया है।

अनीश जो कि अर्नव के रूप में है वो आकर पीहू के पास बैठ जाता है और पीहू उसे अपने हाथों से पोहा खिलाने लगती है।

अब अनीश मन मे सोच रहा है कि इस प्यार पर सिर्फ मेरा हक था,जो आपने उस अर्नव को दे दिया।चुड़ैल का बच्चा था तो क्या ,जन्म तो तुमने ही दिया था मुझे!अब मैं ऐसी तबाही करूँगा कि कुछ नही बचेगा!नही आऊँगा तुम्हारी इस ममता के दिखावे में।

पीहू उसे इतनी खामोशी के साथ अपने हाथों से पोहा खाते हुए देखती है तो पूछती है क्या हुआ अर्नव,क्या सोचने लगे?

कुछ नही माँ,बस आपके प्यार के बारे में सोच रहा था।

पीहू उससे पूछती है “क्या सोच रहे थे बेटा,कोई कमी लगी क्या माँ के प्यार में”?

अनीश अचानक से बोल देता है हाँ लगी।लेकिन जब पीहू उसे गम्भीरता के साथ देखती है तो वो बात को बदलते हुए कहता है यही कि माँ कितने दिन हो गए आप मेरे साथ नही सोए।

पीहू उसकी बातों से मुस्कुराने लगती है और कहती है ठीक है बेटा आज रात मैं तेरे साथ तेरे ही कमरे में सोऊँगी,अब खुश?

अब अनीश मन मे नफरत से सोच रहा है कितनी मतलबी है ये औरत!जो खुद का बच्चा हुआ तो उसे इतना प्यार कर रही है और मुझे खुद जन्म देकर मारना चाहती थी!अब नही छोडूंगा मैं इसे।ये कहकर अनीश की आँखों मे खून उतर आया है,लेकिन फिर खुद के गुस्से को काबू करते हुए वो मुस्कुराने लगता है।कौशल्या भी वही पे है और उसके बार-बार बदलते हुए हाव- भाव देखकर वो कुछ असमंजस में पड़ जाती है।उसे उसमे बदलाव साफ नजर आ रहा है।


अब रात फिर से आ गई है और पीहू आज अनीश को अर्नव  समझ कर उसके पास सोने उसके कमरे में चली गई है।अब पीहू अनीश का सिर अपनी गोद मे रखकर उसे लोरी सुना रही है।

चंदा है तू मेरा सूरज है तू
ओ मेरी आँखों का तारा है तू

इस गाने को सुनते-सुनते अनीश पर पीहू की ममता का एक अजीब सा खुमार चढ़ रहा है और वो सच मे सोने लगा है।पीहू के मूहँ से प्यार और ममता भरा गाना सुनते हुए अनीश सच मे सो जाता है!अब जब उसकी आँख खुलती है तो सवेरा हो चुका है और वो देखता है कि वो अभी भी पीहू की गोद मे सो रहा है।पीहू वहीं पर बैठे-बैठे  बेड के सिरहाने से सहारा लगाए सो रही है।अनीश को अब बहुत अजीब लगता है ये सोचकर कि ऐसे कोई अपने बेटे को सारी रात कैसे गोद  मे बैठे-बैठे  सुला सकता है?क्या सच में एक माँ का प्यार ऐसा होता है?

अभी अनीश ये सोच ही रहा था कि तभी पीहू की नींद खुल जाती है और वो कहती है अरे बेटा तू कब जागा?तू बैठ मैं तेरे लिए चॉक्लेट मिल्क लेकर आती हूँ,ये कहकर पीहू जैसे ही उठ कर जाने लगती है तो अनीश उसका हाथ पकड़ कर कहता है माँ सारी रात बैठे-बैठे क्या आप थकी नही?


पीहू उसे कहती है पगले,अपने बच्चे को गोद मे सुलाने में कभी कोई माँ नही थकती है।ये कहकर पीहू वहाँ से चली जाती है कि तभी अनीश के पास एक फ़ोन आता है और अनीश जैसे ही फ़ोन रिसीव करके हेल्लो करता है तो उधर से कोई पूछता है,काम हुआ या नही?


अनीश कहता है अभी नही हुआ।

तो उधर से फिर आवाज आती है तुम्हे बोला था न कि जाते ही सबसे पहले उस पीहू को मारना है,फिर क्यों नही मारा तुमने?

अब अनीश कहता है,ठीक है पापा मैं आज रात ये काम जरूर कर दूँगा।ये कहकर अनीश फोन रख देता है!वो किसी ओर से नही बल्कि अपने पिता नीरज से बात कर रहा था।

दूसरी ओर,नीरज भी फ़ोन रख देता है,वो एक बहुत बड़े तांत्रिक के भेष में है और बहुत भयानक हो चुका है।उसकी शक्तियाँ अपार हो चुकी है उसके सामने अग्नि जल रही है और ठीक उसके सामने छाया की एक बहुत बड़ी मूर्ति लगी हुई है।नीरज में अब बहुत सी नकरात्मक शक्तियों हैं जो उसे अब बेहद शक्तिशाली बना रही है!वो छाया की मूर्ति की ओर देख कर कह रहा है छाया अब समय आ गया है जब  मैं उन सबसे तुम्हारा बदला ले पाऊँगा।हमारा बेटा अब उस पीहू को नही छोड़ेगा!वो ऐसी तबाही लाएगा कि सब देखते रह जाएँगे।ये कहकर नीरज जोर-जोर से शैतानी हँसी हँसने लगता है और उसके आस पास जो भयंकर प्रेतात्माएं हैं वो भी हँसने लगती है!वहाँ का माहौल बहुत डरावना हो चुका है।

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